भागवत केवल पुस्तक नहीं, साक्षात् श्रीकृष्ण स्वरूप है : राकेश भाई
नखत बन्ना मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन संत समागम, 10 मार्गों पर नि:शुल्क बस सुविधा
बीकानेर। भीनासर गौरक्ष धोरा स्थित श्री नखत बन्ना मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन गुरुवार को कथा वाचन करते हुए राकेश भाई पारीक ने कहा कि समाज द्वारा बनाए गए नियम गलत हो सकते हैं, लेकिन भगवान के नियम न तो गलत हो सकते हैं और न ही बदले जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि साक्षात् श्रीकृष्ण का स्वरूप है।

कथा के दौरान राकेश भाई पारीक ने शुकदेव जन्म, परीक्षित श्राप और अमर कथा का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान की कथा मनुष्य को विचार, वैराग्य, ज्ञान और प्रभु प्राप्ति का मार्ग दिखाती है। उन्होंने बताया कि राजा परीक्षित के कारण ही पृथ्वीवासियों को श्रीमद्भागवत कथा श्रवण का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
उन्होंने भागवत के चार अक्षरों का अर्थ बताते हुए कहा कि ‘भा’ से भक्ति, ‘ग’ से ज्ञान, ‘व’ से वैराग्य और ‘त’ से त्याग का बोध होता है। जो ग्रंथ जीवन में इन चारों गुणों का संचार करे, वही भागवत कहलाता है। कथा में निष्काम भक्ति, भागवत के छह प्रश्न, भगवान के 24 अवतार, नारदजी का पूर्व जन्म, परीक्षित जन्म तथा कुंती देवी द्वारा सुख के समय भी विपत्तियों की याचना जैसे प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया गया।
आयोजन से जुड़े प्रवीण भाटी ने बताया कि गुरुवार को संत समागम का भी आयोजन हुआ, जिसमें विभिन्न स्थानों से संत-महात्माओं ने भाग लिया। संतों के सान्निध्य में संकीर्तन एवं भोजन-प्रसादी का आयोजन किया गया।
समागम में महंत सोमारनाथजी, योगी त्रिलोकनाथजी (गुजरात), कोठारी रविनाथजी (पुष्कर), कोठारी दिवालीनाथजी (कोलायत), कोठारी अशोकनाथजी (सातलावास), भूतपूर्व कोठारी गणेशनाथजी, कोठारी राजूनाथजी, महंत भोलानाथजी (बज्जू), योगी दीपकनाथजी, योगी रामचंद्रनाथजी एवं योगी रामनाथजी महाराज सहित अनेक संत उपस्थित रहे।
आयोजकों ने बताया कि कथा प्रतिदिन सुबह 10:30 बजे से दोपहर 4 बजे तक होगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शहर में 10 निर्धारित मार्गों पर नि:शुल्क बस सेवा की व्यवस्था की गई है।

