‘द डेजर्ट कल्चर इज द न्यू कल्चर’—मरु संस्कृति बनेगी वैश्विक पर्यटन की नई पहचान
बीकानेर। राजस्थान की समृद्ध मरु संस्कृति, विरासत और आधुनिक पर्यटन की संभावनाओं को वैश्विक मंच से जोड़ने के उद्देश्य से अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन दिवस के अवसर पर ‘सुनी-लिखी-पढ़ी’ व्याख्यान श्रृंखला के अंतर्गत विशेष व्याख्यान का आयोजन 27 सितंबर, रविवार को शाम 5:15 बजे राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान, बीकानेर में किया जाएगा।

राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान, पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग तथा महाराजा मानसिंह पुस्तक प्रकाश शोध केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस व्याख्यान में जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली के पर्यटन विभाग के प्रो. एस. आई. ए. जैदी “राजस्थान की मरु संस्कृति : विरासत, यात्रा-पर्यटन एवं वैश्विक आकर्षण” विषय पर व्याख्यान देंगे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता भीखाराम चांदमल के प्रबंध निदेशक श्री आशीष अग्रवाल करेंगे, जबकि बीकानेर विकास प्राधिकरण की आयुक्त श्रीमती स्नेहल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगी।
डिजिटल तकनीक और AI से बढ़ेगा डेजर्ट टूरिज्म
राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान के वरिष्ठ अनुसंधान अधिकारी डॉ. नितिन गोयल ने बताया कि आज पर्यटन का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सोशल मीडिया के माध्यम से थार की विशिष्ट संस्कृति, लोक परंपराओं, स्थापत्य, खान-पान, हस्तशिल्प और जीवन शैली को दुनिया के सामने नए तरीके से प्रस्तुत किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि व्याख्यान में विशेष रूप से इस बात पर चर्चा होगी कि डिजिटल तकनीक और AI के माध्यम से थार मरुस्थल को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और अधिक प्रभावी ढंग से कैसे स्थापित किया जा सकता है तथा विदेशी पर्यटकों को राजस्थान की जीवंत मरु सांस्कृतिक विरासत से किस प्रकार जोड़ा जा सकता है।
डॉ. गोयल ने कहा कि राजस्थान की मरु संस्कृति अब केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि भविष्य के पर्यटन की नई संभावना है। इसी विचार को रेखांकित करते हुए कार्यक्रम का संदेश “The Desert Culture is the New Culture” रखा गया है।
व्याख्यान में पर्यटन विशेषज्ञों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं संस्कृति और पर्यटन में रुचि रखने वाले नागरिकों के भाग लेने की संभावना है।

