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ऊंटों की नैनोबॉडीज से मानव रोगों की जांच और उपचार पर होगा शोध

एनआरसीसी बीकानेर और एनआईवी पुणे के बीच एमओयू

बीकानेर। भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र (एनआरसीसी), बीकानेर और आईसीएमआर-राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी), पुणे के बीच ऊंटों एवं मनुष्यों में होने वाले विषाणुजनित रोगों पर अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। एनआरसीसी में आयोजित कार्यक्रम में केंद्र के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया और एनआईवी के निदेशक डॉ. नवीन कुमार ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए।

एनआरसीसी के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने कहा कि दोनों संस्थान अपने संसाधनों और विशेषज्ञता का साझा उपयोग कर ऊंटों में होने वाले विषाणुजनित रोगों से संबंधित अनुसंधान को आगे बढ़ाएंगे। इसके साथ ही मानव एवं पशु स्वास्थ्य से जुड़ी संक्रामक बीमारियों की पहचान, आधुनिक निदान पद्धतियों के विकास और प्रभावी उपचार के क्षेत्र में भी अनुसंधान किया जाएगा।

एनआईवी के निदेशक डॉ. नवीन कुमार ने कहा कि वर्तमान में वैश्विक वन हेल्थ यानी एकीकृत स्वास्थ्य की अवधारणा महत्वपूर्ण है। इस दिशा में ऊंटों से प्राप्त नैनोबॉडीज का उपयोग मनुष्यों में होने वाले विषाणुजनित रोगों की पहचान और उनके गहन अध्ययन में भी किया जा सकेगा। इससे भविष्य में सटीक जांच विधियां और प्रभावी उपचार विकसित करने में मदद मिलेगी।

केंद्र की पीएमई सेल के प्रभारी डॉ. राकेश रंजन ने एमओयू के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसके तहत ऊंटों और मनुष्यों के वायरल रोगों पर समन्वित अनुसंधान को गति मिलेगी। बायोम

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