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जांभाणी साहित्य विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित

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बीकानेर । टाँटिया यूनिवर्सिटी श्रीगंगानगर व जाम्भाणी साहित्य अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “भारतीय ज्ञान पंरपरा में गुरू जाम्भोजी का अवदान” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी टांटिया सभागार में सम्पन्न हुई। संगोष्ठी में कुल चार सत्र हुए जिनमें देश के अनेक राज्यों के विद्वानों व स्थानीय बिश्नोई समाज के गणमान्य नागरिक शामिल हुए ।

प्रथम सत्र की अध्यक्षता करते हुए श्री गंगानगर पुलिस अधीक्षक गौरव यादव ने बिश्नोई समाज की आधारभूत वाणी सबदवाणी पर अपने विचार रखे व उसे आत्मसात करने पर बल दिया। स्वागत भाषण टांटिया विश्विद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ राजेंद्र गोदारा ने आगंतुकों का स्वागत किया व संगोष्ठी की उपादेयता पर अपने विचार रखे। प्रस्तावना वक्तव्य जाम्भाणी साहित्य अकादमी अध्यक्षा डॉ इन्दिरा बिश्नोई ने देते हुए अकादमी द्वारा संपन्न हुए कार्यों की रुपरेखा प्रस्तुत की।

बीज वक्ता प्रो रमेश कौशिक जामिया मिलिया विश्विद्यालय दिल्ली ने गुरु जाम्भोजी के साहित्य की सभी भाषाओं में अनुवाद व सापेक्षिकता अध्ययन पर जोर दिया | महंत स्वामी सच्चिदानंद आचार्य ने भारतीय ज्ञान पंरपरा में गुरू महाराज की वाणी को लेकर अपने विचार रखे। परंपरा सदैव प्रवाही होती है। प्रवाह के साथ अनेक अवांछित दूषण इसमें शामिल हो जाते है। गुरू महाराज ने समाज के विभिन्न वर्गों से संवाद के माध्यम में भारतीय ज्ञान परंपरा को सरल,सुगम और सुबोध बनाकर जन-जन तक पहुँचाने का कार्य किया। संचालन आयोजन सचिव एडवोकेट संदीप धारणियां ने किया।

द्वितीय सत्र की अध्यक्षता करते हुए प्रो राजेंद्र पुरोहित , प्राचार्य डूंगर महाविद्यालय बीकानेर ने जाम्भाणी साहित्य में उल्लेखित जीव दया पर अपने विचार रखे। प्रो गोपीराम शर्मा ने धर्म व पंथ के परिप्रेक्ष्य में अपने विचार व्यक्त किए। इंजीनियर आर के बिश्नोई दिल्ली ने पर्यावरण संरक्षण व बिश्नोई समाज में इस हेतु हुए बलिदानों का वर्र्णन किया। कवि सुरेंद्र सुंदरम ने जाम्भाणी साहित्य की भारतीय ज्ञान परम्परा में उल्लेखनीय योगदान को रेखांकित किया | डॉ हरिराम बिश्नोई बीकानेर व प्रो अनीता साहू हनुमानगढ़ ने जाम्भाणी साहित्य में उल्लेखित विभिन्न समाजोपयोगी मूल्यों का वर्णन कियासंचालन प्रो अनिल धारणियां ने किया।

तृतीय सत्र की अध्यक्षता करते हुए प्रो ब्रजेन्द्र सिंहल दिल्ली ने जाम्भाणी साहित्य में पाठालोचन व अन्य भक्तिकालीन संतों के समान अध्ययन की जरुरत हेतु समाज को आगे आने पर जोर दिया | डॉ कृष्ण कुमार आशु ने जाम्भाणी मूल्यों के संदर्भ में समतामूलक समाज की स्थापना पर जोर दिया | डॉ रामनारायण शर्मा ने रामायण के संदर्भ में जाम्भाणी साहित्य के अध्ययन पर विचार रखे | डॉ आशाराम भार्गव व डॉ निर्मला निठारवाल अबोहर ने गुरु गोरखनाथ के संदर्भ में जाम्भाणी साहित्य का विवेचन किया | डॉ राजेंद्र शर्मा रायसिंहनगर ने प्रकृति के संरक्षण पर अपने विचार रखे | संचालन मोहन कालीराणा ने किया।

अंतिम सत्र की अध्यक्षता करते हुए मोहनलाल लोहमरोड़ ने युवा पीढ़ी में संस्कारो के उत्थान पर बल दिया | विशिष्ट अतिथि प्रो. अनिला पुरोहित ने बताया कि किसी भी राष्ट्र की संस्कृति को जीवंत रखने में गुरु ज्ञान परंपरा का विशेष योगदान होता है। अकादमी उपाध्यक्ष प्रो डॉ बनवारी लाल साहू ने संगोष्ठी के विभिन्न पहलुओं पर विचार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया | संचालन डॉ सुरेंद्र खीचड़ ने किया | इस संगोष्ठी में भाग लेने के लिए स्थानीय बिश्नोई समाज के साथ साथ विभिन्न तहसील सभाओं बिश्नोई सभा बुड्ढा जोहड़ , बिश्नोई सभा पदमपुर , बिश्नोई सभा रायसिंहनगर , बिश्नोई सभा जैतसर , बिश्नोई सभा सूरतगढ़ की कार्यकारिणी ने भी भाग लिया।

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