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एनआरसीसी में प्रौद्योगिकी एवं व्यवसायीकरण पर कार्यशाला आयोजित

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बीकानेर । भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र में आज दिनांक को ‘प्रौद्योगिकी प्रबन्धन, बाजार विश्लेषण एवं व्यवसायीकरण‘ विषयक कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमें एनआरसीसी सहित बीकानेर में स्थित आईसीएआर के संस्थानों/केन्द्रों के विभागाध्यक्ष एवं वैज्ञानिकों ने सहभागिता निभाई ।

एनआरसीसी में आयोजित इस कार्यशाला के मुख्य अतिथि डा. प्रवीण मलिक, चीफ एग्जीक्युटिव ऑफिसर, एग्रीनोवेट इंडिया लिमिटेड, नई दिल्ली ने विषयगत बाते रखते हुए कहा कि वैज्ञानिक विकसित प्रौद्योगिकी को किसी इंडस्ट्री आदि को जारी करने की प्रक्रिया पूर्ण करने से पूर्व, संबंधित सभी पहलुओं के आधार पर समग्र लागत का आकलन जरूर करें, वह इंडस्ट्री के साथ पारस्परिक समन्वय स्थापित करें ताकि बाजार की संभावनाओं के आधार पर प्रौद्योगिकी में अपेक्षित सुधार लाते हुए यह आम किसान को भी स्वीकार्य हो सकें। डा.मलिक ने बेहतर तकनीकी प्रबन्धन हेतु इसे नियन्त्रित किए जाने एवं क्षेत्रानुसार प्रौद्योगिकी उपयुक्तता परखने की आवश्यकता जताई। उन्होंने, वैज्ञानिकों को अपनी विशेषज्ञता का बेहतर इस्तेमाल करने, सैद्धान्तिक के साथ-साथ स्वयं की धारणा जाहिर करने तथा फील्ड स्तर पर जमीनी हकीकत जानने हेतु प्रोत्साहित किया।

इस अवसर पर कार्यशाला के अध्यक्ष एवं केन्द्र निदेशक डा.आर्तबन्धु साहू ने एनआरसीसी द्वारा उष्ट्र उत्पादन, स्वास्थ्य एवं ऊँटनी के दूध से निर्मित उत्पादों के व्यावसायीकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों जैसे विकसित प्रौद्योगिकी के पेटेंट एवं निजी प्रतिष्ठानों को जारी लाईसेंस, जरूरतमंद पशु पालकों के इसके लाभ आदि के बारे में जानकारी दी। डा.साहू ने कहा कि ऊँटनी का दूध स्वाद में नमकीन होने के कारण इसका भण्डारण एवं प्रसंस्करण कर विभिन्न मूल्य सवंर्धित दुग्ध उत्पादन तैयार किए गए हैं। इन उत्पादों की सामाजिक स्वीकार्यता केन्द्र के लिए उत्साहवर्धक है।

इस अवसर पर डा. जगदीश राणे, निदेशक, केन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्थान, बीकानेर ने कहा कि गत वर्षों में विकसित तकनीकी के पेटेंट एवं इनके लाईसेंस आदि की दिषा में बढ़ोत्तरी हुई है परंतु प्रयोगषाला में तैयार प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण से पूर्ण यह किसान का हित साधने वाली होनी चाहिए।
केन्द्र के आईटीएमयू के प्रभारी एवं आयोजन सचिव डा. योगेश कुमार ने कार्यशाला का संचालन किया तथा धन्यवाद प्रस्ताव सह आयोजन सचिव डा. राकेश रंजन, प्रधान वैज्ञानिक ने ज्ञापित किया।

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