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यहां शुरू हुई कन्या जन्म पर ‘सहजन फली’ का पौधा देने की परम्परा

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*‘शक्ति’ अभियान के तहत ‘एक पौधा सुपोषित बेटी के नाम और बेटी जन्मोत्सव’ कार्यक्रम आयोजित*
बीकानेर, 7 अप्रैल। जन्म के समय लिंगानुपात सुधारने तथा बेटियों और महिलाओं को बेहतर वातावरण उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से जिले में चलाए जा रहे ‘शक्ति’ अभियान के तहत गुरुवार को ‘एक पौधा सुपोशित बेटी के नाम और बेटी जन्मोत्सव’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। पीबीएम अस्पताल में आयोजित समारोह के दौरान जिला कलक्टर भगवती प्रसाद कलाल ने 30 नवजात बेटियों की माताओं को बेबी किट और बधाई संदेश तथा इनमें से डिस्चार्ज होने वाली 9 बेटियों की माताओं को सहजन फली का पौधा भी प्रदान किया। इस दौरान केक काटकर बेटी जन्म की खुशियां मनाई गई।
इस अवसर पर जिला कलक्टर ने कहा कि पिछले दो वर्षों से जिले में जन्म के समय बेटियों की संख्या प्रति हजार बेटों की तुलना में कम हो रही है। यह चिंता का विषय है। इसके प्रति समाज को जागरुक करने तथा बेटी और बेटे को आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध करवाने के प्रति जागरुकता के लिए ‘शक्ति’ अभियान प्रारम्भ किया गया है। उन्होंने कहा कि समाज के विकास में स्त्री-पुरूष की भागीदारी समान होती है। ऐसे में बेटे और बेटी में भेद करना तर्कहीन है। इसके मद्देनजर जागरुकता के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा बेटी जन्म को उत्सव के रूप में मनाने तथा कन्या जन्म पर ‘सहजन फली’ का पौधा देने की परम्परा प्रारम्भ की गई है। उन्होंने कहा कि इसमें कैल्सियम और प्रोटीन की प्रचुर मात्रा होती है तथा वैज्ञानिक शोध के अनुसार डायबिटीज और हृदय रोगों के इलाज में लाभदायक है। इन पौधों के वितरण से बेटियों के बेहतर पोषण का संदेश पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अभियान में पीसीपीएनडीटी के तहत सख्त कार्यवाही की जाएगी।
महिला अधिकारिता विभाग की उपनिदेशक मेघा रतन ने बताया कि नेशनल फैमिली हैल्थ सर्वे के अनुसार बीकानेर में लगभग 59 प्रतिशत महिलाओं में खून की कमी पाई गई है। इसी प्रकार 46.6 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं एनीमिक हैं। इनके अलावा वर्ष 2019-20 में जन्म के समय सेक्स रेस्यो प्रति हजार बच्चों पर 978 थी, जो बाद के दो वर्षो में घटकर 2020-21 में 970 और 2021-22 में 962 रह गई। इस अनुपात को सुधारने के उद्देश्य से ‘शक्ति’ अभियान प्रारम्भ किया गया है।
इस दौरान पीबीएम के कार्यवाहक अधिकारी डॉ. बीएल खजोटिया, डॉ. संतोष खजोटिया, महिला अधिकारिता विभाग के संरक्षण अधिकारी सतीश पड़िहार, विजय लक्ष्मी जोशी आदि मौजूद रहे।

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