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माॅडल गांव बनने की ओर अग्रसर है नापासर

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– भामाशाहों, ग्रामीणों व जन प्रतिनियों का मिल रहा है भरपूर सहयोग

सावन पारीक

बीकानेर। बीकानेर जिले से करीब 30 किमी दूर पूर्व दिशा में स्थित नापासर गांव है। इस गांव को बीकानेर राज्य के समकालीन राजा महाराजा बीकाजी और नापाजी सांखला द्वारा “सह-शहर” के रूप में स्थापित किया गया था। अब यह यहां के भामाशाहों एवं जागरूक जनता के सहयोग के कारण जल्द ही राजस्थान का माॅडल गांव बनने की ओर अग्रसर होने जा रहा है। नापासर के भामाशाह, जन प्रतिनिधि एवं स्वयं ग्रामवासी अपने गाँव को साफ़ सुथरा रखने एवं शिक्षा, चिकित्सा एवं औद्योगिक विकास की ओर कदम बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। साथ ही नापासर की साफ़ सफाई में यहाँ के निवासियों की जागरूकता के साथ साथ स्वच्छता प्रहरी संस्थान के मोहर सिंह यादव का भी विशेष सहयोग मिल रहा है। मोहर सिंह यादव ने पूरे नापासर को छह माह में साफ़ सुथरा बनाने का संकल्प लिया है जिसमें 2 माह के समय में ही नापासर में काफी साफ़ सफाई नजर आने लगी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तिगत बुलावे के संस्मरण बताते हुए मोहर सिंह यादव बताते हैं कि स्वयं प्रधानमंत्री ने आग्रह कर गाँवों में साफ़ सफाई के माॅडल बनाने में यदि कामयाब होते हैं तो स्वयं प्रधानमंत्री उनके बुलावे पर आकर ग्रामवासियों को धन्यवाद देकर माॅडल गांव के ब्रांड एम्बेसडर बनकर पूरे देश में गाँव का प्रचार प्रसार करेंगे।

नापासर को साफ़ सुथरा रखने एवं ग्रामवासियों में जागरूकता लाने में यहाँ के वरिष्ठ समाजसेवी दमालाल झंवर का भी विशेष सहयोग रहा है लगभग 80 वर्ष के दमजी झंवर भामाशाहों से आर्थिक सहयोग प्राप्त कर व जन जागरूकता की मशाल लेकर पूरे गाँव में साफ़ सफाई का विशेष ध्यान रखते हैं। साथ ही इस गाँव पर भामाशाहों की भी विशेष मेहरबानी रही है जिसमें यहाँ के जन्मे भामाशाह कन्हैयालाल मूंधड़ा अपने श्रीमती सी.एम. मूंधड़ा मेमोरियल चेरिटेबल ट्रस्ट द्वारा गाँव की बालिकाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य एवं नापासर के चहुंमुखी विकास में मुक्त हृदय से तन मन एवं धन से सहायता करते रहते हैं।

मूंधड़ा द्वारा अपने ट्रस्ट के माध्यम से नापासर में 1300 बालिकाओं को गाँव में ही शिक्षा उपलब्ध हो सके इस के लिए एक विशाल एवं सभी सुविधाओं से युक्त शाला भवन का निर्माण करवा कर दिया गया है। इतना ही नहीं इसके रखरखाव का खर्च भी ट्रस्ट द्वारा उठाया जा रहा है। नापासर की यह स्कूल पूरे बीकानेर संभाग में एक मॉडल स्कूल के रूप में जानी जाती है। साथ ही ट्रस्ट द्वारा नापासर के ही संस्कृत विद्यालय में 5 कमरे फर्नीचर सहित व बरामदा बनाकर दिया गया। स्वच्छ भारत अभियान के तहत नापासर तथा आस पास के गाँवों में 333 शोचालयों का निर्माण भी करवाया गया। ट्रस्ट ने अपने उद्देश्य कोई व्यक्ति बेघर न रहे के भाव से नापासर तथा आस पास के गाँवों में 18 मकान बनाकर निराश्रितों को आश्रय प्रदान किए गए। नापासर में हरित क्रान्ति के उद्देश्य से 2000 पेड़ लगवाए गए। साथ ही उनकी देखभाल का जिम्मा भी लिया। नापासर ग्राम पंचायत का साफ़ सफाई में 28 माह तक सहयोग करते हुए ग्राम पंचायत को ट्रेक्टर ट्रोली भी दी गई।

गाँव की बालिकाओं को उच्च शिक्षा हेतु गाँव से बाहर ना जाना पड़े इस दृष्टिकोण के साथ श्रीमती सी.एम. मूंधड़ा मेमोरियल चेरिटेबल ट्रस्ट एक महाविद्यालय का निर्माण भी करवाने की मंशा रखता है जिसके लिए राज्य सरकार की स्वीकृति मिलनी बाकी है। नापासर गाँव के युवा, ऊर्जावान सरपंच प्रतिनिधि रत्तीराम तावनिया भी नापासर को साफ़ सुथरा एवं माॅडल गाँव के रूप में प्रदर्शित करने में अपनी कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

समाजसेवी दमालाल झंवर ने बताया कि नापासर को माॅडल गाँव बनाने के लक्ष्य में समस्त ग्रामवासियों से पूर्ण सहयोग की अपील करते हुए अपने घर, दुकान, ऑफिस व फैक्ट्री में कचरा पात्र रखने व कचरे को कचरा संग्रहण गाड़ी में डालने, सड़कों पर कचरा ना फैलाने, साफ़ सफाई के लिए आर्थिक सहयोग करने, शर्म त्याग कर खुद कचरा उठाने व प्रतिदिन एक घंटे स्वच्छता अभियान को गति का आह्वान किया। नापासर में जहां ऐसे समाजसेवी, जन प्रतिनिधि एवं जन सहयोग भावना वाले ग्रामवासी हो तो नापासर को जल्द ही माॅडल गाँव बनने में ज्यादा समय भी नहीं लगेगा और जल्द ही नापासर का नाम पूरे देश में एक मॉडल गाँव के रूप में प्रचारित होगा जो पूरे देश में एक मिसाल होगा।

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