बीकानेर में साड़ी कारोबार को 500 करोड़ का नुकसान

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बीकानेर। बीकानेर में हर रोज साड़ियों का अच्छी तादाद में  कारोबार होता है, लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते पहले लाॅकडाउन और अभी सिटी के प्रमुख कारोबारी एरिया में पिछले एक सप्ताह से चल रहे कर्फ्यू ने भारी नुकसान पहुंचाया है। साड़ी कारोबारियों की माने तो पिछले चार माह में बीकानेर में अब तक लगभग 500 करोड़ का नुकसान हो चुका है। इतना ही नहीं नुकसान में लगातार इजाफा होता जा रहा है। क्योंकि साड़ी कारोबार की सभी छोटी बड़ी फर्म कोटगेट, केईएम रोड, बड़ा बाजार, कपड़ा बाजार, मोहता चैक आदि इलाके पिछले एक सप्ताह से ज्यादा समय से कर्फ्यू जोन के दायरे में है।  
बीकानेर में साड़ियों के करीब 200 खुदरा व 40 थोक विक्रेता है। बीकानेरी सूती डोरिया व प्रिंटेड साड़ियां प्रदेश सहित अन्य राज्यों में मुख्य रूप से पसंद की जाती है। अभी लाॅकडाउन व इसके बाद कफ्र्यू के चलते बीकानेर में सूती डोरिया प्रिंटेड साड़ियों का कारोबार पूरी तरह से बंद है। कारोबार बंद होने से बीकानेर में लगभग चार माह में व्यापारियों को करीब 500 करोड़ से अधिक का नुकसान हो चुका है।

हजारों हो गए बेरोजगार
बीकानेर में साड़ी कारोबार से जुड़े हजारो लोग बेरोजगार हो चुके हैं। जिनके पास कोई काम नहीं है। यहां खुदरा बाजार में 800 का स्टाफ व 200 मालिक लोग हैं। वहीं थोक बाजार में करीब 100 का स्टाफ व 40 मालिक लोग है। इसके अलावा डोरिया व सूती साड़ियों पर स्क्रीन प्रिंटिंग वर्क कढ़ाई बुनाई की डिजाइन तैयार करने वाले हैं। इसके लिए यहां पर 70 से 80 परिवार ऐसे हैं जो यह कार्य करते हैं। व्यापारी इनको साड़ियां व अन्य सामान उपलब्ध करवाते हैं और यह परिवार वर्क प्रिंटिंग कर वापस दे देते हैं फिर व्यापारी इन साड़ियों की स्थानीय ग्राहकों के साथ ही अन्य राज्यों को आर्डर अनुसार भेजते हैं रंगाई, कटाई, सफाई का कार्य हाथ से होता है। वही कुछ एक ने अब कंप्यूटराइज प्लांट भी लगा रखे हैं। अभी ये सब बंद पड़े हैं। इन कारोबारियों का कहना है कि यही हालात रहे तो मजदूर दूसरे धंधों में चले जाएंगे।
रोजाना प्रिंट होती हैं 250
छपाई करने वाले कारीगरों के यहां पर रोजाना करीब 250 साड़ी प्रिंटिंग होती है। इसमें साड़ी की क्वालिटी के लिहाज से खर्च आता है। इस तरह से प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से इस व्यापार में सैकड़ों लोग जुड़े हैं जिनकी रोजी-रोटी इससे चलती हैं। अभी काम बंद होने से बेरोजगारी झेल रहे हैं।
रोजाना 4 करोड़ का नुकसान
बीकानेर में रोजाना करीब 4 करोड़ से ज्यादा का व्यापार होता है, लेकिन अभी काम बंद होने से रोजाना 4 करोड़ का नुकसान हो रहा है। इस कारोबार में फैंसी साड़ियां भी शामिल है जो शादी समारोह पर वह उत्सव में ही बिकती है, लेकिन इन दिनों लॉकडाउन व कर्फ्यू के कारण सभी काम ठप है। ऐसे में किसी तरह का व्यापार नहीं हो रहा है। इसके अलावा मुंबई से मलमल का कपड़ा आता है जिससे राजपूती ड्रेस बनती है इस कपड़े पर भी यहां पर वर्क किया जाता है।
कारोबारियों ने बताया कि यहां की काॅटन डोरिया साड़ी कारोबार मूलरूप से बाहर के बाजार जैसे बिहार, एमपी, कोलकाता के बाजारों पर निर्भर है। वहां से ऑर्डर कैंसिल हो चुके हैं। मुम्बई से आने वाले मलमल कारीगरों के पलायन से प्रोडक्शन बंद पड़ा है। यही हालात सूरत के हैं। इसका प्रभाव बीकानेर के साड़ी कारोबार पर पड़ रहा है। कारोबारियों का कहना है कि अभी तक तो पुराना कमाया हुआ था उससे स्टाफ को वेतन दे दिया। अब आगे यह भी मुश्किल लग रहा है। अनलाॅक-1 में व्यापारियों ने दुकानों में गर्मी के बावजूद एसी बंद कर रखें हैं। क्योंकि बिजली बिल भरना वश में नहीं है। सरकार ने ध्यान नहीं दिया और कोई छूट नहीं दी तो मध्यम वर्गीय व्यापारी और व्यापार दोनों ही खत्म हो जाएंगे।  

कैंसिल हो गए ऑर्डर
कपड़ा कारोबार की स्थिति बेहद खराब है। सावे निकल चुके हैं। सावों में बरी, पंवरी सहित अन्य आयोजन में लेनदेन में ही बड़ी संख्या में साड़ियां निकल जाती है, लेकिन शादी में 50 लोगों की लिमिट से हमें यह नुकसान हुआ है। कर्फ्यू से पहले केवल 6-7 साड़ी ही निकल पाई है। लाॅकडाउन व कर्फ्यू नहीं होता तो 100 के करीब साड़ियां निकल जाती। कोरोना से पहले जो ऑर्डर थे वे सभी कैंसिल हो गए। ग्राहकी चले तो पीछे से राॅ मैटेरियल भी नहीं आ रहा। पिछले साल के सावे की तुलना में इस साल सावे में 90 फीसदी मार्केट डाउन रहा है। यदि कोरोना खत्म होगा तो दुर्गापूजा पर उम्मीद है बाजार ठीक रहेगा। क्योंकि इस मौके पर बीकानेर का माल खूब बिकता है।
-घनश्याम लखानी प्रवक्ता थोक वस्त्र व्यापार संघ

वैक्सीन आने के बाद ही गति पकड़ेगा काम
इस बार काम बहुत बढ़िया था। जनवरी से ही सीजन अच्छा था, लेकिन लाॅकडाउन आते आते काम की सारी चाल ही टूट गई। बाहर से राॅ मैटेरियल नहीं आ रहा। स्किल्ड लैबर वापिस आई नहीं। उत्सव न त्यौहार तो ग्राहकी भी टूट गई। बैंक ब्याज माफ नहीं कर रही और लाॅन चुकाना मुश्किल हो रहा है। अब तो कोरोना की वैक्सीन आएगी तभी काम के गति पकड़ने की उम्मीद है। उम्मीद है होली के बाद व्यापार होगा।
– प्रभु दयाल स्वामी, जय संतोषी मां क्रिएशन, करणी औद्योगिक क्षेत्र

त्यौहारी आजादी पर ही चलेगा साड़ी कारोबार
अभी तो स्टाफ सैलेरी, दुकान किराया, बैंक ब्याज आदि का नुकसान हो रहा है। लाॅकडाउन के बाद कर्फ्यू के चलते लगातार नुकसान झेल रहे हैं। स्टाॅक पुराना हो रहा है उसकी चिंता है। नुकसान का आकलन तो दुकान खुलने के बाद ही पता चलेगा। हालात खराब ही है। कोरोना का डर से ग्राहक मुक्त होगा तभी कारोबार रनिंग में आएगा। त्यौहार की आजादी मिलेगी तभी साड़ी कारोबार चलेगा। लाॅकडाउन व कर्फ्यू अवधि में बैंक ब्याज पर विशेष छूट मिले और बिजली बिल में फिक्स चार्जेज न लें।
– सुशील बंसल, बंसल साड़िज, खजांची मार्केट

अकल्पनीय नुकसान
कपड़ा बाजार में करीब 15 दुकानें हैं और इनमें करीब 25 से 30 का स्टाफ है। सब बेरोजगार हो गए हैं। लाॅकडाउन खुलने के बाद हमने माल मंगवा लिया था। तभी कर्फ्यू लग गया है। अब कोई व्यापार नहीं हो रहा है। उधार के पैसे भी नहीं आ रहे। क्योंकि दुकानें बंद पड़ी है। अकल्पनीय नुकसान हो रहा है। त्यौहारी सीजन में अभी कर्फ्यू लगाना उचित नहीं है। सावन माह में लहरिये की साड़ी खूब निकलती है। बंद से नुकसान हो रहा है। बचाव ही उपचार को अपनाएं और 20 या 21 जुलाई से बाजार खोल देना चाहिए।
– अरविन्द आचार्य, एस़. किशोरी लाल, कपड़ा बाजार

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