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एलोवेरा तथा आँवला के उपयोग से संभव है कैंसर का इलाज

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– विज्ञान एवं तकनीकी नवाचारों पर आधारित दो दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला आयोजित

– अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक समग्र शिक्षा, बीकानेर के सभागार में हुए 6 सत्र

बीकानेर। राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद् के निर्देशानुसार समग्र शिक्षा बीकानेर द्वारा राष्ट्रीय आविष्कार अभियान के तहत विज्ञान एवं तकनीकी नवाचारों पर आधारित दो दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन 5 से 6 जनवरी तक कार्यालय अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक समग्र शिक्षा, बीकानेर के सभागार में किया गया। अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक हेतराम सारण ने बताया कि प्रथम दिवस कार्यशाला में तीन सत्र आयोजित किए गए, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के विषय विशेषज्ञों ने अपने शोध एवं नवाचारों से शिक्षकों को लाभान्वित किया। इस कार्यशाला में प्रथम सत्र में डाॅ. शीशपाल सिंह ने कृषि विज्ञान के शोध एवं नवाचार, द्वितीय सत्र में डाँ. नरेन्द्र बारठ ने पशु पालन एवं उनकी विभिन्न नस्लों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। पशु उत्पाद का विभिन्न बीमारियों के इलाज में तथा चिकित्सा क्षेत्र में उनकी महत्ता बताई। तृतीय सत्र में राजकीय टी.टी. काॅलेज से रीडर शमीम पडिहार ने शिक्षा के क्षेत्र में शोध एवं नवाचारों से अवगत करवाया। इस अवसर पर मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी डाॅ राजकुमार शर्मा ने राष्ट्रीय आविष्कार अभियान की महत्ता पर विशेष चर्चा करते हुए विज्ञान और तकनीकी के सम्बंध में अपने विचार रखे। 6 जनवरी के प्रथम सत्र में डूंगर महाविद्यालय के प्रोफेसर डाॅ. नरेन्द्र भोजक ने ग्रीन केमेस्ट्री पर अपने शोध एवं नवाचार से संभागियों को अवगत करवाया तथा प्लास्टिक के स्थान पर किस प्रकार से आक पौधे से बना हुआ प्लास्टिक उपयोग में लेकर साधारण प्लास्टिक से होने वाली बीमारियों से बचने का उपाय बताया। द्वितीय सत्र में राजकीय पॉलीटेक्निक काॅलेज की प्रवक्ता कमल प्रीत कौर ने दैनिक जीवन में इन्टरनेट के उपयोग और महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के अन्तिम सत्र में डूंगर महाविद्यालय के ही प्रोफेसर डाॅ. आर.के. पुरोहित ने विकिरण तकनीकी तथा कैंसर पर किए गए शोध से अवगत करवाया। इन्होंने बताया कि एलोवेरा तथा आँवला के उपयोग से कैंसर का इलाज संभव है तथा मोबाइल की विकिरणों से होने वाले रोग तथा उनके उपाय के बारे में भी विस्तृत रूप से चर्चा की।
कार्यशाला में सहायक परियोजना समन्वयक कैलाश बड़गुजर, कार्यक्रम अधिकारी उमर फारूख, पृथ्वीराज लेघा और पीरामल फॉउन्डेशन के समन्वयक जयनेश उपस्थित रहे।

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