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पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है नवीकरणीय ऊर्जा स्त्रोत

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बीकानेर 10 मार्च। स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के अभियांत्रिकी विभाग तथा कृषि व्यवसाय प्रबंध संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना अन्तर्गत आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन बुधवार को हुआ। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए कुलपति प्रो. आरपी सिंह ने ऊर्जा की भावी आवश्यकताओं के मद्देनजर पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु नियंत्रण हेतु नवीकरणीय ऊर्जा स्त्रोतों- सौर, पवन, बायोमास आदि के उपयोग को बढ़ावा देने का आहवान किया। प्रो. सिंह स्नातकोतर एवं विश्वविद्यालय के कृषि, गृह विज्ञान एवं कृषि प्रबंधन संस्थान के विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण एवं सत्त कृषि में नवीकरणीय स्त्रोत विषय पर संबोधित कर रहे थे। उन्होने कहा कि हमारे देश में लगभग 300 दिन पर्याप्त सौर ऊर्जा मिलती है जिसका उपयोग कर खाना पकाने, पानी गर्म करने, अशुद्ध जल का शोधन करने, फसल को सुखाने, सिंचाई हेतु पंप चलाने तथा रोशनी करने में किया जा सकता है। पवन ऊर्जा के उपयोग को विद्युत उत्पादन में लाभकारी बताते हुये उन्होनें कहा कि हम विश्व में पवन उर्जा उत्पादन के क्षेत्र में प्रथम पाॅच स्थानों में शामिल है। कृषि अपशिष्टों के समुचित उपयोग में बायो उर्जा उत्पादन कर पर्यावरण को स्वच्छ एवं संरक्षित रखा जा सकता है। इस अवसर पर राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना के प्रधान अन्वेक्षक प्रो. एन. के. शर्मा ने नवीकरणीय उर्जा स्त्रोत के उपयोग को आज की आवश्यकता बताते हुये इसे प्रायोगिक रूप से प्रदर्शित करने की आवश्यकता जताई। कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डाॅ. आई.पी.सिंह ने इस अवसर पर कहा कि हमारे छात्र स्वंय की इकाई स्थापित करने की दिशा में सोचे एवं नियोक्ता बने जिस हेतु नवीकरणीय ऊर्जा एक प्रमुख तकनीकी बाजार है। कृषि प्रबंधन संस्थान की निदेशिका डाॅ मधु शर्मा ने बताया कि प्रशिक्षण में 68 प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण समन्वयक ईजी. जितेन्द्रकुमार गौड़ ने बताया कि प्रशिक्षण में बायो डीजल, छत पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापना, सौर जल उष्मक, सौर ऊर्जा द्वारा जल शोधन, सौर शुष्कक पशु शक्ति, पवन ऊर्जा, बायोगैस एवं सौर पंपों की स्थापन एवं संचालन पर व्याखान हुए। इस अवसर पर प्रशिक्षण केे दौरान दिये गये व्याखानों की संकलन पुस्तिका का विमोचन प्रो. रक्षपाल सिंह ने किया तथा प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किये।
कार्यक्रम की सह संयोजिका डाॅ अमिता शर्मा ने कार्यक्रम का संचालन किया एवं क्षेत्र भ्रमणों का संचालन किया।

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