सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: पेंशनरों के साथ भेदभाव नहीं, DA-DR में समान बढ़ोतरी जरूरी
बीकानेर। सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) में अलग-अलग दरों से बढ़ोतरी करना भेदभावपूर्ण और संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। कोर्ट ने कहा कि जब महंगाई का प्रभाव समान रूप से कार्यरत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों पर पड़ता है, तो दोनों के लिए अलग-अलग दरें तय करना उचित नहीं है।

मामला केरल राज्य सड़क परिवहन निगम (KSRTC) के कर्मचारियों और पेंशनरों से जुड़ा था। राज्य सरकार ने मार्च 2021 में कर्मचारियों के लिए DA में 14% वृद्धि कर इसे 112% किया, जबकि पेंशनरों के लिए DR में केवल 11% बढ़ोतरी कर 109% किया गया। इस असमानता को चुनौती दी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि DA और DR दोनों का उद्देश्य महंगाई के प्रभाव को कम करना है। चूंकि महंगाई सभी पर समान रूप से असर डालती है, इसलिए बढ़ोतरी की दर में अंतर का कोई तार्किक आधार नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसा अंतर मनमाना (arbitrary) और भेदभावपूर्ण (discriminatory) है।
कोर्ट ने यह भी माना कि वित्तीय स्थिति के आधार पर सरकार लाभों को टाल सकती है या अलग-अलग तिथियों से लागू कर सकती है, लेकिन जब एक बार लाभ देने और उसे बढ़ाने का निर्णय लिया जाता है, तो उसमें समानता जरूरी है।
इस फैसले में कोर्ट ने कहा कि यहां पेंशन या DR के अधिकार पर विवाद नहीं है, बल्कि मुद्दा केवल बढ़ोतरी की दर में भेदभाव का है। ऐसे में अलग-अलग दरें तय करना संविधान के समानता के सिद्धांत के खिलाफ है। अंत में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और KSRTC की अपील को खारिज कर दिया और हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया।

