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संत और शास्त्र के सामने तर्क नहीं, श्रद्धा आवश्यक: जगद्गुरु वसंत विजयानंद गिरि

बीकानेर। गंगाशहर मार्ग स्थित अग्रवाल भवन परिसर में आयोजित ग्यारह दिवसीय चैत्र नवरात्रि महोत्सव, श्री महालक्ष्मी महायज्ञ एवं श्रीमद् देवी भागवत कथा महापुराण की पूर्णाहुति जयकारों और हर्षोल्लास के बीच सम्पन्न हुई। कार्यक्रम जगद्गुरु 1008 आचार्य वसंत विजयानंद गिरि जी महाराज के पावन सान्निध्य में आयोजित हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया।


इस अवसर पर जगद्गुरु ने कहा कि संतों और शास्त्रों के समक्ष कभी तर्क नहीं करना चाहिए। अज्ञानवश किया गया तर्क बुद्धि को भ्रमित कर देता है, जबकि श्रद्धा और भक्ति व्यक्ति को ईश्वर के निकट ले जाती है। उन्होंने कहा कि भक्ति रूपी भाव और श्रद्धा रूपी शक्ति ही जीवन को श्रेष्ठ दिशा प्रदान करती है।


कार्यक्रम के दौरान ग्यारह दिनों तक चले हवन, जाप और अनुष्ठानों में करोड़ों मंत्रों से अभिमंत्रित पवित्र जल कलश से वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच जगद्गुरु का अतिदिव्य महाभिषेक किया गया। इस भव्य आयोजन को बीकानेर के इतिहास में एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक पर्व के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें भक्ति और सनातन शक्ति के अनेक चमत्कारिक प्रसंग सामने आए।


जगद्गुरु ने अपने प्रवचनों में कहा कि अच्छी संगति व्यक्ति के जीवन को सकारात्मक ऊर्जा से भर देती है और वर्तमान के साथ-साथ भविष्य को भी कल्याणकारी बनाती है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि व्यक्ति अपने गलत कर्मों पर सच्चे मन से पश्चाताप करता है, तो उसके पाप और दुख समाप्त हो जाते हैं।


कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए रोग मुक्ति, ऋण मुक्ति और कार्य सिद्धि जैसे चमत्कारिक प्रसंगों का उल्लेख किया। आयोजन के दौरान सेवाभावी गुरुभक्तों और कार्यकर्ताओं का सम्मान करते हुए उन्हें सेवा शिरोमणि, सेवा चक्रवर्ती सहित विभिन्न उपाधियों से अलंकृत किया गया।


जगद्गुरु ने आगामी जून माह में 26 से 28 तारीख तक तमिलनाडु के कृष्णगिरि स्थित श्रीपार्श्व पद्मावती शक्तिपीठ के वार्षिकोत्सव में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण यूट्यूब चैनल “थॉट योगा” पर लाइव किया गया।

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