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जीएसटी से जुड़ी समस्याओं का निवारण करना जरुरी, अन्यथा बहुत सारे मामले अदालतों में जाएंगे

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– कारोबारियों ने पीएम मोदी व वित्त मंत्री को लिखा पत्र

बीकानेर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व वित्त मंत्री निर्मला सीमारमण को बीकानेर व्यापार उद्योग मंडल पदाधिकारियों ने शनिवार को जीएसटी से जुड़ी समस्याओं का निवारण करने के लिए पत्र लिखा है और कहा है कि निवारण करना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि इन मध्यमवर्गीय व्यापारियों को लगातार जीएसटी के नोटिस मिल रहे हैं जो कि उनकी मुश्किलें और बढ़ा रहे हैं। जिस संख्या में जीएसटी नोटिस जारी हो रहे हैं उसी से मान लेना चाहिए कि प्रक्रिया कितनी कठिन है और इनका पालन करने में कई तकनीकी गलतियां हुई है अब उन गलतियों को सुधारने का मौका है। कैट के महासचिव रमेश पुरोहित, मंडल के उपाध्यक्ष अनिल सोनी झूमरसा, सचिव वेदप्रकाश अग्रवाल ने संयुक्त पत्र में लिखा कि अगर इन गलतियों को सुधारा नहीं गया तो जीएससटी डीलर्स के बहुत सारे मामले अदालतों में जाएंगे जो किसी भी सरल कर प्रणाली के लिए उचित बात नहीं है। मंडल पदाधिकारियों ने पत्र में लिखा कि जीएसटी एक नया कर था और भारत के उद्योग व्यापार ने इसके पालन करने में पूरी मेहनत और ईमानदारी से सहयोग दिया है लेकिन इसके पालन में प्रारंभिक समय से उद्योग और व्यापार से काफी तकनीकी गलतियां हुई है लेकिन इस प्रकार की तकनीकी गलतियों में किसी भी प्रकार की कर चोरी की भावना नहीं होती क्योंकि जीएसटी के प्रमुख रिटर्न जीएसटीआर 3B में गलती के संशोधन का कोई प्रावधान नहीं था तो यह गलतियां सुधर ही नहीं सकी जीएसटी से पहले अप्रत्यक्ष कर कानून था जिसके सरलीकरण के लिए जीएसटी लाया गया उस कानून में जिसमें सर्विस टैक्स वेट और सेंट्रल एक्साइज भी शामिल थे रिटर्न को संशोधित करने की सुविधा थी आयकर का रिटर्न भी संशोधित किया जा सकता है फिर जीएसटी कर जोकि सरलीकरण के लिए लाया गया था उसमें इस तरह की सुविधाजनक प्रतिबंध लगाने का कोई तर्क नहीं है और यदि जीएसटी के रिटर्न संशोधित करने का प्रावधान कर दिया जाए तो जीएसटी रिटर्न एवं कर निर्धारण में होने वाली अधिकांश समस्याएं हल हो जाएगी और यह सभी समस्याएं हल हुए बिना वार्षिक रिटर्न भी कर निर्धारण में अधिकारियों की कोई मदद नहीं कर पाएंगे और इसके अभाव मैं सारे कर निर्धारण नोटिस जारी करने के बाद ही होंगे जो कि जीएसटी के सरलीकरण के सिद्धांत के विरुद्ध है जीएसटी का नेटवर्क जीएसटी लागू होने के बाद कभी भी अच्छी तरह से काम नहीं कर पाया है और जीएसटी का अधिकांश परेशानियों का कारण यही जीएसटी नेटवर्क है जिस की गति एवं क्षमता को बढ़ाना अति आवश्यक है और इस नेटवर्क को शीघ्र दुरुस्त करने का कष्ट करें ताकि जीएसटी की प्रक्रियाओं का पालन में व्यापारी वर्ग को परेशानी ना हो जीएसटीएन एक राष्ट्रीय नेटवर्क है और इसके लगातार असफल होने को अब आंकड़ों से छुपाया नहीं जा सकता है जीएसटी नेटवर्क के सेवा प्रदाता को इस बात के लिए बाध्य किया जाना चाहिए कि जीएसटी नेटवर्क की गति क्षमता इस तरह बढ़ाई जाए कि आने वाले 10 साल तक बढ़े हुए काम को यह झेल सके जो की सूचना प्रौद्योगिकी का एक मूल सिद्धांत होता है जीएसटी में खरीद पर इनपुट क्रेडिट का मिसमैच भी एक बड़ी समस्या है और जिस तरह से अब यह कानून बनाया गया है वह इस समस्या को और भी गंभीर बनाता है जीएसटी खरीद की इनपुट क्रेडिट के मिसमैच को दूर करने के लिए 3 से 6 महीने का समय देना चाहिए इसके अतिरिक्त खरीदार को इस प्रकार का दंड देने की जगह उस बेचने वाले डीलर को दंडित करें जो कर खरीदार से लेकर जमा नहीं करवा रहे है जिन डीलर से माल बेचा है उन्हें भी रजिस्ट्रेशन भारत सरकार ने ही दिया है और अब यह कर जमा नहीं करवाता है या देरी से जमा कराता है जिसके कई कारण हो सकते हैं इसके लिए खरीदार को जिम्मेदार ठहराना कोई न्याय नहीं है यह कहना कि आप अपना विक्रेता समझदारी से चुने बहुत ही आसान अधिकारिक बयान हो सकता है पर यह कोई मिसमैच की समस्या का हल नहीं है डीलर्स को अपने विक्रेता के द्वारा कर जमा नहीं करवाने के कारण मालूम करना उन्हें दूर करना और विक्रेताओं से कर जमा करवाना इसके लिए समय चाहिए आरसीएम को लेकर व्यापारी वर्ग पर लगे इस अव्यवहारिक प्रावधान से सरकार को राजस्व के रूप में कुछ नहीं मिलता सिर्फ व्यापारी वर्ग को अतिरिक्त प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है जो कि सरलीकरण के नाम पर लाए गए जीएसटी के मुख्य उद्देश्य से मेल नहीं खाता जीएसटी कानून की धारा 16/चार के अनुसार किसी एक निर्धारण वर्ष में मिलने वाली इनपुट क्रेडिट एक निर्धारित समय में नहीं ली जाए तो वह समाप्त हो जाती है और इस तरह से व्यापारी वर्ग को कर की आर्थिक हानि उठानी पड़ती है जिसका भुगतान वह विक्रेता को दे चुका है सरकार द्वारा GSTR-1 दो प्रकार से लिया जाता है डेढ़ करोड़ पर की बिक्री वाले व्यापारी को 3 महीने में इनसे ज्यादा बिक्री वाले व्यापारी को प्रतिमाह रिटर्न एवं जीएसटी भरना पड़ता है यह नियम भी व्यापारियों के लिए घातक बनता जा रहा है इसमें प्रतिमाह GSTR-1 लगाने वाले को अपने जीएसटी का इनपुट लगभग 4 माह बाद मिलेगा क्योंकि डेढ़ करोड़ से कम बिक्री वाले अपना रिटर्न तीन महीना एवं 20 दिन बाद लगाएगा तो डेढ़ करोड़ से ऊपर बिक्री वाले व्यापारी को उसका इनपुट 4 माह बाद मिलेगा यह कहां का न्याय है कि व्यापारी दो बार जीएसटी एक ही खरीद पर दे में इसलिए सरकार को या तो सबको हर महीने GSTR-1 का नियम बनाना चाहिए या सबको ही 3 महीने कर देना चाहिए जिससे व्यापारिक विवाद से बचा जा सके और कोई मिसमैच की संभावना ना रहे ईवे बिल के संबंधित सरकार राज्य सरकारों को निर्देश थे कि ई वे बिल की रकम कम से कम ₹200000 रखें कई राज्य सरकारों ने इसे 50000 पर ही रख रखा है जहां तक उचित हो उसे इंटर स्टेट एवं इसको एक ही शहर में बिक्री पर लागू नहीं रखना चाहिए शहर के अंदर ही बिक्री पर ई वे बिल लागू करना है तार्किक है आगे कंपोजिशन स्कीम के बारे में कंपोजीशन स्कीम के व्यापारियों को अंतर राज्य खरीद की तरह अंतर राज्य बिक्री की भी छूट मिलनी चाहिए एवं उनको ऐच्छिक बना देना चाहिए उससे सरकार को भी फायदा है एवं व्यापारी को कम परेशानी में अधिक टैक्स भी भरना पड़ता है तब भी वह खुश है सरकार की नई नीति में अब जीएसटी का इनपुट उतना ही मिलेगा जितना कि बीटू में दर्शाया जाएगा इससे व्यापारी को डबल हानि हो रही है एक तो अगर कोई व्यापारी लेट रिटर्न भरता है तो उसको रिटर्न समय से भरने की लड़ाई व्यापारी ही करें सरकार को जीएसटी खुद भी दे दूसरों को भी भरने के लिए लड़े तभी उसका बेनिफिट मिल पाएगा अन्यथा नहीं ऐसा समझा जाए कि सरकार की कोई जिम्मेवारी नहीं है उनके अधिकारी इसमें कुछ नहीं बोलेंगे दूसरा जिस व्यापारी का टर्नओवर डेढ़ करोड़ से कम है नई स्कीम में 5 करोड तक बिक्री वालों को 3 महीने में रिटर्न भरने का अधिकार देना भी सिर्फ कागजी कार्रवाई है क्योंकि इसमें भी व्यापारी को जीएसटी तो तू भी के आधार पर हर महीने ही भरना पड़ेगा जीएसटी भारत में अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को सरल बनाने के लिए लाया गया एक बहुत ही महत्व काशी और साहसिक कदम था लेकिन इस समय जो जीएसटी की स्थिति चल रही है उससे ऐसा लगता है कि जीएसटी का यह मुख्य उद्देश्य काफी पीछे चला गया है या यूं कहे कि अदृश्य ही हो गया है बीते 4 वर्षों में जीएसटी में करीब 950 संशोधन लाए गए हैं ! कोई भी संशोधन लाने से पहले व्यापारियों से कोई बातचीत नहीं की और न ही जीएसटी को लेकर व्यापारियों की परेशानियों को जानने का कोई प्रयास ही किया प्रत्येक दिन एक नया प्रावधान लागू कर दिया जाता है जिसकी पालना करना व्यापारियों के लिए बेहद मुश्किल भरा है व्यापारी को अनेक प्रकार के क़ानून का पालन करने वाली मशीन बना दिया है वर्तमान में जो जीएसटी का स्वरुप है, यदि उसके विरोध में आज आवाज नहीं उठाई तो अब व्यापार करना बेहद मुश्किल हो जाएगा इसलिए जीएसटी के कुछ वर्तमान प्रावधानों को जानना और समझना तथा अपने साथी व्यापारियों को भी बताना बेहद जरूरी है

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