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महाकुम्भ हरिद्वार में लगेगा बीकानेर का खालसा
श्रद्धालुओं के लिए रहेगी नि:शुल्क व्यवस्था

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धर्म मार्ग से ही जीवन की सफलता : श्री सरजूदासजी महाराज
बीकानेर। धर्म के मार्ग पर चल कर ही जीवन को सफल बनाया जा सकता है। मानव जीवन धर्म-पुण्य कार्यों के लिए मिला है। सारे संसार में की धुरी धर्म और कर्म पर ही टिकी है। उक्त प्रवचन श्री श्री 108 महामंडलेश्वर सरजूदासजी महाराज ने सुजानदेसर स्थित रामझरोखा कैलाश धाम में प्रेसवार्ता के दौरान व्यक्त किए। रामझरोखा कैलाशधाम के महंत सरजूदासजी महाराज ने बताया कि हरिद्वार 2021 में महाकुम्भ स्नान मेला आयोजित हो रहा है। खास बात यह है कि उक्त महाकुम्भ मेले में बीकानेर से प्रथम बार खालसा लगने जा रहा है। महाराजश्री ने बताया कि इससे पूर्व 2018 में प्रयागराज में बीकानेर से खालसा लगाया गया था। प्रेसवार्ता से पहले महामंडलेश्वर सरजूदासजी महाराज की वंदना में मन्नु कच्छावा, ओमप्रकाश भाटी, चांदमल भाटी, एडवोकेट गणेश गहलोत, कैलाशपति, रतन भाटी, मनीष भाटी, दिशांत सोनी, प्रयागराज से बोनी शर्मा, गोलू शर्मा व विकास शर्मा आदि उपस्थित रहे।

यहां लगेगा बीकानेर का खालसा, नि:शुल्क रहेगी व्यवस्था
यह खालसा 1 अप्रेल से 27 अप्रेल तक कनखल बैरागी कैम्प हरिद्वार में आयोजित होगा। इस दौरान श्री राम कीर्तन महायज्ञ, संत समागम एवं रोजाना भंडारे का भी आयोजन रहेगा। महामंडलेश्वर सरजूदासजी महाराज ने बताया कि इस आयोजन में 27 दिन तक श्रद्धालुओं के लिए भोजन, अल्पाहार, आवास आदि की व्यवस्था पूर्णत: नि:शुल्क रहेगी।

सुनो मानव… तुम्हें धर्म पुकार रहा
महाराजश्री ने कहा कि आज के युग में लोगों का धर्म के प्रति रूझान केवल मनोकामना अथवा स्वार्थसिद्धि तक ही सीमित रह गया है। सनातन धर्म की रक्षा करने के लिए संत-महात्माओं को आगे आना पड़ रहा है। महाराजश्री ने कहा कि लोगों को धर्म से जुडऩा चाहिए। जनसहयोग से चलने वाले इस खालसे में सहयोग करके पुण्यकार्यों में भागीदारी निभानी चाहिए। महाराजश्री ने बताया कि जितना ज्यादा धर्म से जुड़ेंगे कर्म अपने आप सुकर्मों में परिवर्तित हो जाएंगे।

विशेष महत्ता है कुम्भ स्नान की
महामंडलेश्वर सरजूदासजी महाराज ने कहा कि कुंभ पर्व हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसमें करोड़ों श्रद्धालु कुंभ पर्व स्थल प्रयाग, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में स्नान करते हैं। इनमें से प्रत्येक स्थान पर प्रति बारहवें वर्ष और प्रयाग में दो कुंभ पर्वों के बीच छह वर्ष के अंतराल में अर्धकुंभ भी होता है। 2013 का कुम्भ प्रयाग में हुआ था। फिर 2019 में प्रयाग में अर्धकुंभ मेले का आयोजन हुआ था। ऐसा पहली बार हुआ है जब कुंभ मेला इस बार 12 साल की बजाय 11 वें साल में आयोजित होगा। पहले कुंभ मेला 2022 में आयोजित होने वाला था. 83 वर्षों में यह पहली बार है कि कुंभ मेला 11वें साल में होने जा रहा है। जब कुंभ राशि का गुरु आर्य के सूर्य में परिवर्तित होता है. अर्थात गुरु, कुंभ राशि में नहीं होंगे। इसलिए इस बार 11वें साल में कुंभ का आयोजन हो रहा है।

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