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बीकानेर में आयोजित होगा इंटरनेशनल लिटरेचर और रम्मत फेस्टिवल-डाॅ. कल्ला

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-बीकानेर कला संस्कृति एवं थिएटर फेस्टिवल का हुआ समापन

बीकानेर, 31 जनवरी। लोकायन संस्थान तथा कला संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पंद्रह दिवसीय बीकानेर कला, संस्कृति एवं थिएटर फेस्टिवल ‘कला रंग राग’ का समापन समारोह रविवार को धरणीधर रंगमंच पर आयोजित हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कला एवं संस्कृति मंत्री डाॅ. बी. डी. कल्ला थे। उन्होंने कहा कि बीकानेर में इस वर्ष अक्टूबर-नवंबर में इंटरनेशनल आर्ट फेस्टिवल आयोजित किया जाएगा। कला संस्कृति विभाग द्वारा इसकी तैयारियां प्रारम्भ कर दी गई हैं। इसी प्रकार बीकानेर की रम्मतों को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के रम्मत चौक में रम्मत फेस्टिवल भी आयोजित किया जाएगा। उन्होंने लोकायन संस्थान द्वारा आयोजित फेस्टिवल की सराहना की तथा कहा कि संस्था द्वारा रम्मत फेस्टिवल एवं इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल में भी भागीदारी निभाई जाए। विभाग की इस पहल का उद्देश्य यही है कि युवा पीढ़ी लोक संस्कृति को समझे और सीखे। उन्होंने कहा कि बीकानेर गंगा जमुनी तहजीब वाला आलीजा शहर है। यह सही मायनों में लोक कलाओं और लोक परम्पराओं को जीता है। उन्होंने भारत की संस्कृति उदार चरित्र वाली संस्कृति बताया कि यह पूरी दुनिया को जोड़ने की खूबी रखती है। उन्होंने कहा, संस्कृति को किसी देश की सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता। डाॅ. कल्ला ने कहा कि राजस्थान के कण-कण में कलाएं रची-बसी हैं। यहां गीतों के माध्यम से त्यौहारों के बारे में पता चल जाता है। यहां महीनों, त्यौहारों और संस्कारों के गीत हैं। युवा पीढ़ी इनसे दूर होती जा रही है। ऐसे में लोकायन द्वारा किए गए प्रयास मील का पत्थर साबित होंगे। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण के मद्देनजर लोकायन द्वारा वर्चुअल माध्यम पर फेस्टिवल का आयोजन किया गया। इससे दुनिया भर के देशों में बीकानेरी संस्कृति की पहचान हुई है। इसके माध्यम से लोक कलाओं, लोक परम्पराओं, साहित्य एवं संस्कृति से जुड़े कलाकारों को मंच मिला। फेस्टिवल को ऑनलाइन नौ लाख से भी अधिक लोगों ने देखा।
लोकायन के गोपाल सिंह चौहान ने फेस्टिवल के तहत आयोजित कार्यक्रमों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों में बैठे कला प्रेमियों ने इसे सराहा। इस अवसर पर फेस्टिवल में भाग लेने वाले कलाकारों, साहित्यकारों, लेखकों एवं कला धर्मियों को स्मृति चिह्न एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। वहीं डॉ. कल्ला ने डॉ. जितेंद्र आचार्य का कोरोना वॉरियर के रूप में सम्मान किया। लक्ष्मी नाथ मंडल द्वारा हरजस के गीतों की प्रस्तुति दी गई। बसंत कुमार ओझा द्वारा नाक से बांसुरी वादन की अद्भुत प्रस्तुति दी गई। लालचंद उपाध्याय ने धमाल गीत गाकर समा बांधा।

लोकायन के महावीर स्वामी ने बताया कि विशिष्ठ अतिथि के रूप में पर्यटन विभाग बीकानेर के सहायक निदेशक कृष्ण कुमार, लोकायन के संस्थापक कृष्ण चंद्र शर्मा,जीवन बीमा निगम के गुलाब सिंह चौधरी तथा कमलेश परिहार उपस्थित थे। लोकायन के उपाध्यक्ष चंद्र कुमार पुरोहित ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन रोहित बोड़ा ने किया।

इन कलाकारों का हुआ सम्मान फेस्टिवल में भाग लेने वाले राजस्थानी कथाकार एवं सहायक निदेशक (जनसम्पर्क ) हरिशंकर आचार्य, रंगकर्मी विपिन पुरोहित, कवियत्री चंचला पाठक, रिद्धिका आचार्य, लोक कलाकार गोपाल बिस्सा, किशन पुरोहित, शायर इरशाद अज़ीज़, संजय आचार्य वरुण, सुनील गज्जाणी, जिया उल हसन कादरी आदि का सम्मान किया गया।

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