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5 को सामूहिक अवकाश पर रहेंगे प्रदेशभर के 70 हजार कर्मचारी, नहीं खुलेंगे सरकारी कार्यालयों के तालें

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– 60 विधायकों के आश्वासन के बाद भी नहीं बनी बात

– वर्ष 2006 से हर कर्मचारी को हर माह हो रहा है 15 हजार रूपए का नुकसान

बीकानेर। पिछले कई दशकों से मंत्रालयिक कर्मचारियों की मांगों को नहीं सुना जा रहा है। सरकार के 60 विधायकों ने कोरा आश्वासन दिया। सरकार भी नहीं सुन रही है। इसलिए इस 5 फरवरी को प्रदेशभर के 70 हजार कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर रहेंगे। यह बात आज जयपुर रोड स्थित कृषि भवन में अखिल राजस्थान संयुक्त मंत्रालयिक कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष मनीष विधानी ने पत्रकारों से कही। उन्होंने कहा कि सोमवार को मीटिंग कर कर्मचारियों से संपर्क करेंगे। उन्होंने कहा कि संगठन समर्थन हासिल करने के लिए पाॅलिटेक्निक काॅलेज, डूंगर काॅलेज, एम एस काॅलेज व कई सरकारी स्कूलों में संपर्क कर चुका है और यह अभियान भी जारी रहेगा।

उन्होंने कहा कि मंत्रालयिक कर्मचारियों की मांगे एक चुनावी जुमला बनकर रह गई। सब भली-भांति जानते हैं कि प्रदेश का मंत्रालय कर्मचारी शासन की रीड होता है क्योंकि सभी विभागों के प्रशासनिक दायित्व को भली-भांति त्याग, तपस्या और बलिदान का गुण अपनाकर अपना राज्य कार्य पूर्ण निष्ठा से संपादित करता है। आज संघ पुन: अवगत कराना चाहेगा कि प्रदेश के मंत्रालयिक कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति अत्यंत कमजोर होती जा रही है, ‌क्योंकि वर्ष 2013 में सरकार द्वारा दिए गए आर्थिक लाभ को पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में वित्त विभाग राजस्थान सरकार के 30 अक्टूबर 2017 द्वारा वेतन कटौती के लाभ को छीन लिया गया एवं इसके पश्चात सातवें वेतन आयोग का लाभ मिलने पर भी प्रदेश का मंत्रालयिक कर्मचारी को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। संघ पुनः अवगत करवाना चाहता है कि किस प्रकार से प्रदेश के मंत्रालय कर्मचारियों के साथ सदैव ही आर्थिक दुर्व्यवहार/भेदभाव पूर्व की सरकार द्वारा किया गया। सन 1950 में कनिष्ठ लिपिक व अध्यापक संवर्ग का वेतन बराबर था, जबकि आयुर्वेद कंपाउंडर, पशुपालन कंपाउंडर पुस्तकालय अध्यक्ष व कई अन्य कैडर्स का वेतन मंत्रालयिक कर्मचारियों से कम हुआ करता था। सन 1976 में कनिष्ठ लिपिक व अन्य कैडर्स को बराबर कर दिया गया। सन 1989 में कनिष्ठ लिपिक को छोड़कर अन्य कैडर जैसे पुस्तकालय अध्यक्ष, पशुपालन कंपाउंडर आदि का वेतन प्राथमिकता से बढ़ाया गया। सन 1998 में मंत्रालयिक कर्मचारियों की मांगों पर तत्कालीन सरकार व मंत्रालयिक कर्मचारियों के मध्य एक समझौता हुआ जो कि आज तक लागू नहीं हुआ। सन 2006 में कनिष्ठ लिपिक को छोड़कर अन्य कई वर्गो में ग्रेड पे 3600 कर दी गई।
वर्ष 2013 में वर्तमान सरकार व मंत्रालयिक कर्मचारियों के मध्य फिर समझौता हुआ, लेकिन वह भी आज तक लागू होने की प्रतीक्षा में है। वर्ष 2017 में राजस्थान सरकार के वित्त विभाग ने 30 अक्टूबर 17 को शेड्यूल 5 के अंतर्गत आदेश निकालकर सभी अल्प वेतनभोगी कर्मचारियों की वेतन कटौती कर दी। ग्रेड पे 2400 के 3 लेवल और ग्रेड 28 00 दो लेवल कर दिए। वर्तमान में भी इस कोविड-19 के काल में देश का अल्प वेतनभोगी मंत्रालयिक कर्मचारी लोकतांत्रिक ढंग से अपनी जायज मांगों के लिए प्रयास कर रहा है। हाल ही में प्रदेश के लगभग सभी जनप्रतिनिधियों ने मंत्रालयिक कर्मचारियों की मांगों पर आदेश किए जाने की अभिशंषा की है ।वर्तमान में मंत्रालयिक कर्मचारियों की स्थिति यह है कि कोई भी विभाग्य जॉब चार्ट निर्धारित नहीं होने से मंत्रालय कर्मचारी ना तो तृतीय श्रेणी सेवाओं में आ रहा है, ना ही चतुर्थ श्रेणी एवं काम दोनों ही करता है। हाल ही में इस कोविड-19 काल में मंत्रालयिक कर्मचारियों द्वारा मांगों के विषय में सोशल मीडिया की सहायता लेकर विशाल ट्विटर अभियान चलाया, जिसमें बड़ी संख्या में 11 लाख ट्वीट किए गए। इसके अतिरिक्त भी प्रदेश के मंत्रालयिक कर्मचारियों अलग-अलग तरीके अपना कर सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं। अल्प वेतनभोगी मंत्रालयिक कर्मचारियों का हमेशा ही राज्य सरकार द्वारा शोषण किया गया है। यही नहीं राज्य सरकार ने सातवें वेतनमान में वेतन कटौती कर कर पे मैट्रिक्स लैब में उलझा कर इस अंतर को और भी गहरा कर दिया है, जिसके कारण सरकार की रीड की हड्डी समझे जाने वाला यह सब अपने आप को ठगा सा अति पिछड़ा मानने को मजबूर है। प्रदेश के मंत्रालय के संगठनों के बार-बार सरकार को मांगों पर ज्ञापन भिजवाने के पश्चात भी सरकार मंत्रालयिक कर्मचारियों की मांगों को दरकिनार कर रही है जिससे प्रदेश के मंत्रालय कर्मचारियों में भारी असंतोष व्याप्त हो गया है। शासन की रीड कहे जाने वाले इस संवर्ग के साथ ऐसा व्यवहार दुर्भाग्यपूर्ण है। अतः संघ के प्रदेश व्यापी आह्वान पर पुनः आपका ध्यान आकर्षित कर मंत्रालयिक कर्मचारी की इन मांगों पर जल्द ही आदेश दें।

भीख नहीं हक मांग रहें हैं

संघ के प्रदेश महामंत्री जितेन्द्र गहलोत ने कहा कि वर्ष 2006 से हर कर्मचारी को हर माह 15 हजार रूपए का नुकसान हो रहा है। इसलिए कर्मचारी सरकार से भीख नहीं अपना हक मांग रहें हैं। अपने हक के लिए इस 5 फरवरी को सहायक कर्मचारी सरकारी कार्यालयों के ताले नहीं खोलेंगे। वहीं प्रोबेशन पीरियड वाले सहायक कर्मचारी अवकाश तो नहीं लेंगे, लेकिन काली पट्टी बांध कर काम करेंगे।

नहीं तो सड़कों पर उतरेंगे

सहायक कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष लक्ष्मण पुरोहित ने कहा कि सरकार अपना वचन निभाए अन्यथा आने वाला समय संघर्ष का होगा और प्रदेशभर के कर्मचारी सड़कों पर उतरेंगे। इसके लिए सरकार जिम्मेदार होगी।

ये हैं प्रमुख मांगें

  1. कनिष्ठ सहायकों को विशेष वर्ग दर्जा देकर ग्रेड पे 3600 किया जावे।
  2. वित्त विभाग राजस्थान सरकार के दिनांक 30.10.2017 के शेड्यूल 5 के तहत हुई वेतन कटौती को निरस्त कर सातवें वेतनमान का लाभ दिया जावे।
  3. प्रदेश के मंत्रालय कर्मचारियों के हित में पृथक से निदेशालय का गठन कर प्रदेश के समस्त विभागों में स्टेट के आधार पर मंत्रालयिक के उच्च पदों में सर्जन किया जावे।
  4. सभी विभागों के नवनियुक्त मंत्रालयिक कर्मचारियों/ कनिष्ठ सहायकों की परिवेदना निस्तारण कर, गृह जिलों में पदस्थापित किया जावे।
  5. सभी विभागों के राजकीय कार्यालयों में मंत्रालयिक कर्मचारियों के अतिरिक्त अन्य संवर्ग जैसे शिक्षक, इंजीनियर, कर्मचारियों की प्रति नियुक्तियां निरस्त कर , उन्हें उनके मूल पदस्थापन स्थान पर भेजा जावे, शिक्षा विभाग के कार्यालयों में कार्यरत शिक्षकों ,का पदस्थापन तत्काल प्रभाव से विद्यालय में किया जावे , उनके स्थान पर मंत्रालयिक कर्मचारियों के पदों में बढ़ोतरी की जावे।
  6. नई पेंशन योजना , वापस लेकर पुरानी पेंशन योजना लागू की जाए।

मजबूरन करना पड़ेगा पेन डाउन

पदाधिकारियों ने बताया कि इन सभी मांगों पर सरकार शीघ्र आदेश नहीं होने की स्थिति में अब मजबूरन प्रदेश के मंत्रालयिक कर्मचारियों को आंदोलन का रास्ता अपनाना ही पड़ रहा है । तत्पश्चात भी हमारी मांगों पर कोई विचार नहीं किया जाता है तो हमें मजबूरन पेन डाउन करना पड़ेगा। मांगे नहीं मानने की स्थिति में संघ द्वारा कभी भी पेन डाउन की घोषणा की जा सकती है। आयोजित हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में, प्रदेश अध्यक्ष मनीष विधानी के साथ, प्रदेश महामंत्री जितेंद्र गहलोत, प्रदेश अध्यक्ष महामंत्री मधुसूदन सिंह, प्रदेश परामर्श लक्ष्मी नारायण बाबा, बीकानेर संभाग अध्यक्ष रसपाल सिंह, बीकानेर जिला अध्यक्ष शिव छंगाणी, बीकानेर सहायक कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष लक्ष्मण पुरोहित , कमल प्रजापत, कमल नयन सिंह, रवि सिंह, विक्रम जोशी, प्रभु दयाल , लक्ष्मी नारायण , संजय भाटी, महेंद्र सिंह, विजय कुमार पारीक, जगवीर बेनीवाल, राज कुमार जोशी , पुरुषोत्तम जोशी, विद्यासागर रंगा सहित सहायक कर्मचारी संघ आदि शामिल रहे।

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