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गौ उत्पादों को एक लाभकारी इकाई बनाकर आत्मनिर्भर भारत अभियान से जोड़े जाने की जरूरत

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– वेटरनरी विश्वविद्यालय: गोबर व गौमूत्र पर वर्चुअल राष्ट्रीय गौ समृद्धि सम्मेलन सम्पन्न

बीकानेर, 27 दिसम्बर। गोबर व गौमूत्र पर वर्चुअल राष्ट्रीय गौ समृद्धि का दो दिवसीय सम्मेलन रविवार को वेटरनरी विश्वविद्यालय में सम्पन्न हो गया। यह सम्मेलन राजस्थान गौ सेवा परिषद् एवं वेटरनरी विश्वविद्यालय के सामाजिक विकास एवं सहभागिता प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। रविवार को आनलाइन सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए केन्द्रीय भारी उद्योग राज्यमंत्री श्री अर्जुनराम मेघवाल ने कहा कि गाय और गौशालाओं के महत्व को लेकर केन्द्र सरकार सजग है। गौ उत्पादों को एक लाभकारी इकाई बनाकर आत्मनिर्भर भारत अभियान से जोड़े जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि गौवंश का आध्यात्मिक, सामाजिक और आर्थिक महत्व है। गाय और उसके उत्पादों को लेकर राजस्थान गौ सेवा परिषद् को साथ लेकर उससे जुड़ी सकारात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ाया जाएगा। इसके लिए नई दिल्ली में बैठक आयोजित कर योजनाबद्ध तरीके से कार्यक्रमों की समीक्षा व क्रियान्वयन किया जा सकेगा। इस सम्मेलन में परिषद् के साथ राष्ट्रीय गोकुल मिशन, कामधेनू योजना, जीव जन्तु कल्याण बोर्ड की योजनाओं की भी केन्द्रीय अधिकारियों के साथ सार्थक विचार-विमर्श किया जाएगा। राज्य के उच्च शिक्षा राज्यमंत्री श्री भंवर सिंह भाटी ने कहा कि गौवंश भारतीय संस्कृति का प्रतीक और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है। देशी गौवंश प्रकृति व जलवायु के अनुकूल है। राज्य के वेटरनरी विश्वविद्यालय में देशी गौवंश संवर्द्धन कार्यों और गौ उत्पादों का उल्लेख करते हुए कहा कि राजस्थान गौ सेवा परिषद् द्वारा जैविक खेती के लिए गोबर खाद और गौमूत्र से कीटनाशक बनाने के कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा। वेटरनरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विष्णु शर्मा ने राष्ट्रीय सम्मेलन में शिरकत करते हुए कहा कि गौ संवर्द्धन-संरक्षण तथा गौ उत्पादों को लेकर आयोजित सम्मेलन गोधन विकास में अपनी अहम भूमिका अदा कर सकेंगे। दिनेश गिरी जी महाराज ने कहा कि गौधन की हमारे शास्त्रों और विज्ञान में मान्यता है। राज्य में गौ आधारित नीतियां बनाकर प्रभावी क्रियान्वयन करके क्रांति लाई जा सकती है। वेटरनरी विश्वविद्यालय में गौ संवर्द्धन के कार्य का उल्लेख करते हुए कहा कि शासन भी इस ओर पहल करे। राजुवास के पूर्व कुलपति प्रो. ए.के. गहलोत ने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, कृषि व पशुचिकित्सा विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर पंचगव्य का प्रमाणीकरण किया जाना चाहिए। गौपालन विभाग के अतिरिक्त निदेशक डाॅ. लाल सिंह ने गौ कल्याण योजनाओं की जानकारी दी। निदेशक अनुसंधान प्रो. हेमन्त दाधीच ने कहा कि हरित क्रांति से रासायनिक खाद का उपयोग बढ़ा है लेकिन गोबर और देशी खाद के उपयोग से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। गौ विज्ञान अनुसंधान केन्द्र, नागपुर के परिषद के राष्ट्रीय समन्वयक सुनील मानसिंगा ने कहा कि देश में अनेक सामाजिक संस्थाएं स्वाभिमानी- स्वावलम्बन के भाव से गौ सेवा और उत्पादों का उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं। गोबर खाद, गैस और गौमूत्र के कीटनाशकों का उत्पादन छोटे-छोटे संयंत्र लगाकर की जा सकती है। वेबिनार के प्रारंभ में राजस्थान गौ सेवा परिषद् के अध्यक्ष हेम शर्मा ने बताया कि गोबर और गौमूत्र का जैविक खेती के लिए उत्पादकों को उचित मूल्य मिले और रासायनिक खेती का विकल्प बने। इसके लिए केन्द्र व राज्य सरकार के स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। सम्मेलन में कृषि विभाग के उपनिदेशक डाॅ. हरीश शर्मा, राजुवास के अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. एस.सी. गोस्वामी, परिषद के अनिल अग्रवाल, राजेश डोगरा, सीताराम सोलंकी और निर्मला शर्मा ने भी विचार रखे। वेटरनरी विश्वविद्यालय के प्रसार शिक्षा निदेशक प्रो. आर.के. धूड़िया ने बताया कि दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में 4 हजार से अधिक लोगों ने राजुवास फेसबुक पेज पर देखा और सुना। वेबिनार का संचालन गजेन्द्र सिंह सांखला ने किया। परिषद के सचिव अजय पुरोहित ने धन्यवाद ज्ञापित किया। वेटरनरी विश्वविद्यालय के डीन-डारेक्टर, वीयूटीआरसी के वैज्ञानिक एवं विभिन्न राज्यों के गौ प्रेमी भी शामिल रहे।

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