गणाधिपति गुरुदेव तुलसी राष्ट्र संत थे – ज्योति कुमार बेगानी

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काठमांडू (नेपाल)। अणुव्रत अनुशास्ता गणाधिपति आचार्य श्री तुलसी के 107 वे जन्मोत्सव पर अणुव्रत समिति नेपाल के तत्वावधान में 18 नवम्बर को जूम द्वारा सफल कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत मंगलाचरण तेरापंथ महिला मण्डल काठमांडू की बहनों द्वारा हुआ। स्वागतीय भाषण में नेपाल अणुव्रत समिति के अध्यक्ष ज्योति कुमार बेगानी ने कहा कि हम दुनियां के धर्मों का इतिहास पढ़ते है तो उसमे वैदिक.,सनातन, जैन, बौद्ध, इस्लाम का उल्लेख तो हर जगह मिलता है लेकिन मानव धर्म का उल्लेख कहीं नहीं मिलता है सभी धर्माचार्य अपने अपने धर्मों को मानव केंद्रित करते है। सच में इस धर्म ने ही मानव जाति को बांटा है और एक दूसरे से अलग किया है। इस विषय को लेकर गुरुदेव तुलसी ने गहन चिंतन किया। 2 मार्च 1949 में उन्होंने अणुव्रत की सहकल्पना को समाज के सामने प्रस्तुत किया। अणुव्रत समस्त समाज को एक करने में सफल परिकल्पना सिद्ध हुई। तभी तो गुरुदेव तुलसी राष्ट्रीय संत कहलाए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नेपाल के उद्योग वाणिज्य एवं आपूर्ति राज्य मंत्री मोती लाल दुगड़ ने कहा कि में सौभाग्यसाली हूँ जो इस समाज में मैने जन्म लिया। गुरुदेव तुलसी ने समस्त समाज को नशा मुक्त करने का सफल प्रयास किया। तेरापंथ सभा काठमांडू के अध्यक्ष सुशील छाजेड़ ने कहा कि गुरुदेव तुलसी समाज सुधारक संत थे उन्होंने रूढ़िवादी परम्परा को जड़ से समाप्त करने का बिगुल बजाया। कार्यक्रम में संतोष नवलखा के गाये गीत ने चार चाँद लगा दिए। तेरापंथ महिला मण्डल अध्यक्ष प्रेमा नाहटा ने अपने वक्तव्य में कहा गुरुदेव तुलसी वाणी के जादूगर थे। महिला मण्डल को स्थापित कर उन्होंने नया इतिहास बनाया था। ते यु प के अध्यक्ष प्रभात नाहटा ने कहा कि गुरुदेव तुलसी चंदेरी के चाँद थे उन्होंने अनगिनत अवदान समाज को दिए। ललित मरोटी के अनुसार कार्यक्रम में रेणु दुगड़, विमल सुराणा, सुजाता मेहता, महासभा के संरक्षक लोकमान्य गोलछा, कैलाश नवलखा, सुमेर मल नाहटा ने अपनी प्रस्तुतियां दी। ज्ञानशाला के बच्चों ने अलग अलग जातिवर्ग की वेषभूषा पहन कर शानदार प्रस्तुति दी। नेपाल अणुव्रत समिति के उपाध्यक्ष पंकज जैन ने सभी जूम से जुड़े सदस्यों का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का कुशल एवं प्रभावी संचालन मंत्री पवन सेठिया ने किया।

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