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डिप्रेशन में क्यों जा रहे हैं बीकानेर के फार्मा रिटेलर्स ?

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राजेश रतन व्यास

बीकानेर। सर्वाधिक आय देने वाला दवा कारोबार भी इस कोरोना काल में जबरदस्त घाटे में चल रहा है। इसके चलते कई दवा कारोबारी डिप्रेशन के शिकार हो रहे हैं और यह डिप्रेशन उन्हें मजबूरन नशे की ओर धकेल रहा है। दवा कारोबारियों ने बताया कि बीकानेर में नशे की दवाओं को छोड़ दें तो अन्य दवाओं की सेल 60 से 70 फीसदी डाउन चल रही है। बीकानेर में होलसेलर, रिटेलर आदि को मिलाकर कुल 1500 से 2000 कैमिस्ट हैं। इनमें महज 10 फीसदी ही बड़े व्यापारी है बाकी मध्यम वर्गीय व्यापारी है। हालात यह है कि कई दवा विक्रेता लाइसेंस सरेंडर कर चुके हैं। वहीं 60 से 70 फीसदी व्यापारी तो दवा कारोबार से महज गुजार ही कर पा रहे हैं। इनमें से कई तो दुकानों का भाड़ा चुकाने का पैसा भी नहीं जुटा पा रहे हैं। कारोबारियों के अनुसार बीकानेर में 200 के करीब दवा की दुकानें बंद हो चुकी हैं। रोजगार लगभग खत्म सा हो चुका है। इसके चलते दवा विक्रेता व आमजन भी डिप्रेशन में है। यही वजह है कि डिप्रेशन के शिकार ये लोग नशे की दवा की मांग कर रहे हैं। जहां तक है दुकानदार ऐसी दवाओं को नहीं देते हैं, लेकिन 10 से 20 फीसदी दुकानदार मजबूरन ऐसी दवाओं का विक्रय कर रहे हैं। बताया जा रहा है इस नशे की आपूर्ति गंगानगर, हनुमानगढ़, जोधपुर आदि जिले के रास्ते से हो रही है। सूत्रों के मुताबिक नशे के ये कारोबारी इन दवाओं को दुकान में न रख कर अपनी गाड़ी में ही रखते हैं और वहीं से कारोबार संचालित करते हैं। हाल ही में डाकघर के पास एक दवा विक्रेता द्वारा अवैध रूप से नशीली दवा बेचने पर स्वास्थ्य महकमें ने उस पर कार्रवाई भी की थी। उसके द्वारा एमआरपी से 70 फीसदी अधिक दर भी वसूली जा रही थी। वहीं गंगाशहर पुलिस एक युवक से 2 हजार नशीले कैप्सूल बरामद कर चुकी है तथा एक होलसेलर को पीबीएम अस्पताल में दवाओं की सप्लाई की आड़ में नशे का कारोबार करने पर गिरफतार भी किया जा चुका है।

इन दवाओं की हैं सर्वाधिक डिमांड
जिन दवाओं को लेने से नशा होने लगता है बाजार में ऐसी दवाओं की डिमांड बहुत ज्यादा है। इनमें एलप्रोजोलाम, नाइट्रोजोलाम, ट्रमाडोल, कफ सीरप कोरेक्स, सोडियम सल्फेट सहित अन्य कई नशे की दवाओं की डिमांड बढ़ रही है। इनमें एलप्रोजोलाम व नाइट्रोजोलाम की सेल तो 10 से 30 फीसदी बढ़ी हैं। दवा कारोबारियों की मानें तो ये दवा शैडयूल श्एच H में शामिल है यानि जिन्हें डाॅक्टर की पर्ची के बिना कोई भी कैमिस्ट बेच नहीं सकता, लेकिन बीकानेर जिला दवा विक्रेता संघ की गवर्निग बाॅडी के चेयरमैन महावीर पुरोहित के मुताबिक मिलीभगत के चलते ये दवाएं बाजार में धड़ल्ले से बिक रही है। गली मोहल्लों में चलने वाली दुकानों में ऐसी दवाओं की बिक्री आसानी से होती हैं। कोरोना काल से पहले एक दुकान में 2 से 3 कस्टमर ऐसी दवाओं की डिमांड करते थे, लेकिन अब 5 से 6 कस्टमर आते हैं। पीबीएम हाॅस्पिटल रोड पर तो नशे बेचने वालों पर कार्रवाई भी हुई, लेकिन चोरी छिपे अब भी यह धंधा चल रहा है। पुरोहित के अनुसार ड्रग आॅथोरिटी को यह मालूम भी है। दबाव व लालच में कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। इसके चलते बीकानेर में नशे की प्रवृति बढ़ रही है।

कच्चे माल की है भारी कमी
पुरोहित का कहना है कि राॅ मैटेरियल की कमी से बाजार में पूरी दवा रेंज नहीं मिल रही है। इसका कारण कच्चा माल चाइना से आता है। भारत व चाइना के माल के भावों में 25 से 30 फीसदी का फर्क है। फिर भी हम इंडियन फार्मा की दवा बेचने में विश्वास रखते हैं।
नशे पर अंकुश के लिए प्रस्तावित है कार्यशाला
पुरोहित ने बताया कि औषधी नियंत्रक विभाग व जिला दवा विक्रेता संघ द्वारा नशे की बढ़ती प्रवृति व दवा व्यवसायी के लालच पर अंकुश लगाने को लेकर एक कार्यशाला प्रस्तावित है। जिसे जल्दी ही आयोजित करने का प्रयास चल रहा है। संघ सर्कूलर वितरित कर नशे से बचने की अपील भी कर चुका है। इससे कुछ फायदा भी नजर आ रहा है। फिर भी कुछ गड़बड़ है। इस मुददे को लेकर ड्रग कंट्रोलर आॅफिसर से वार्ता कर एक बार मीटिंग भी कर ली है।

नशे में है ज्यादा मार्जिन
पुरोहित बताते है कि यह सत्य है कि हमारे ही कैमिस्ट बंधु नशा बेच रहे हैं जबकि दवा एक सेवा का व्यवसाय है। लेकिन नशे में मार्जन ज्यादा है। इसलिए ब्लैक में नशेड़ियों को बेचते हैं। साथ ही जैनरिक दवाओं की एमआरपी अधिक होती है और होलसेल रेट कम होती है। इससे ज्यादा मार्जिन बनता है। इस कोरोनाकाल में 10 फीसदी दुकानदार ऐसी प्रेक्टिस करते हैं। क्योंकि मार्जिन ज्यादा मिलता है। लेकिन दवा विक्रेता संघ ऐसे व्यापार करने वालों के पक्ष में नहीं है। औषधी नियंत्रक विभाग इस पर सख्त कार्रवाई करें। विभाग को पता है कि ये दवाएं कहां से आती हैं और कौन बेचता है, लेकिन कार्रवाई नहीं होती। संघ का आग्रह है कि जिले को नशे का हब बनने से रोका जाए। संघ भी जनजागरण अभियान चलाकर नशे से बचने की अपील करेगा। हमारा कारोबार सेवा का है। अनैतिक मुनाफे का नहीं है। ऐसे काम करने वालों को संगठन दंडित करने का काम करेगा। नशे का रैकेट राजस्थानभर में है। इसमें तथाकथित कैमिस्ट नेता भी शामिल है। पुरोहित ने ऐसे नेताओं की सम्पति की जांच की मांग भी की है।
इनका कहना है-
ड्रग इंस्पेक्टर को सख्त निर्देश दे रखें कि वह जिस भी दुकान पर जाए उसकी जांच करें, सेल व पर्चेज मांगे। अगर नहीं है तो नियमानुसार कार्रवाई करें। मुझे भी रिपोर्ट दें मैं भी ऐसे लोगों पर कार्रवाई कर रहा हूं।
– सुभाष मुटरेजा, सहायक औषधी नियंत्रक, बीकानेर

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