कोरोना काल निकल नहीं जाता तब तक रूकवाया जाए वैट ऑडिट के नोटिस- पचीसिया, अध्यक्ष, उद्योग संघ

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बीकानेर। बीकानेर जिला उद्योग संघ के अध्यक्ष द्वारकाप्रसाद पचीसिया ने अतिरिक्त जिला कलक्टर ए.एच. गौरी से मिलकर बीकानेर के औद्योगिक विकास के समक्ष आ रही समस्याओं से अवगत करवाते हुए बताया कि वाणिज्य कर विभाग द्वारा वर्ष 2017-18 की वैट ऑडिट हेतु बार बार भिजवाए गए नोटिसों को जब तक कोरोना काल निकल नहीं जाता तब तक रूकवाया जाए क्योंकि वर्तमान में बीकानेर में प्रतिदिन लगभग 200 पोजिटिव केस सामने आ रहे हैं और ऐसे समय में वाणिज्य कर विभाग धारा 27 में बिजनेस ऑडिट वर्ष 2017-18 के नोटिस जारी कर उद्यमी व व्यापारी में भय फैलाया रहा है। जबकि समय सीमा 5 वर्ष होने से वर्ष 2017-18 की ऑडिट अभी कालातीत नहीं हो रही है। विभाग द्वारा कर दाताओं को ऑडिट के लिए बही खाते लेकर विभाग में बुलाया जा रहा है। इन कर दाताओं में ज्यादातर वरिष्ठ उद्यमी व व्यापारी शामिल है जिनके लिए इस महामारी में बाहर निकलना राज्य सरकार के आदेशों की अवहेलना होगी, लेकिन इसका ध्यान नहीं रखते हुए विभाग द्वारा ऑडिट के नाम पर वरिष्ठ उद्यमी व व्यापारी की सुरक्षा को ताक पर रखते हुए उन्हें विभाग में आने को मजबूर किया जा रहा है। दोहरी मार झेल रहे हैं फ्लाई ऐश उद्योग उन्होंने बताया कि NLC प्रशासन द्वारा थर्मल प्लांट के आस-पास ऐश आधारित उद्योगों को फ्लाई ऐश आपूर्ति नहीं किये जाने से इन उद्योगों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। बीकानेर जिले के बरसिंगसर में NLC INDIA LIMITED का लिग्नाईट आधारित विद्युत संयंत्र है जिससे निकलने वाली फ्लाई ऐश ईंट, ब्लोक, टाइल्स आदि लघु उद्योगों के कच्चे माल में काम आती है।बीकानेर के अनेक उद्यमियों ने थर्मल के आस-पास ऊँचे दामों पर जमीनें क्रय कर अपनी इकाइयां स्थापित कर ली ताकि MOEF & CC, CPCB आदि के नीति निर्देशों के अनुसार इन इकाइयों को फ्लाई ऐश की आपूर्ति मांग के अनुरूप प्राथमिकता से होती रहे और कच्चे माल की कमी के कारण उत्पादन बंद ना हो। भारत सरकार के वन एवं पर्यायवरण मंत्रालय द्वारा गजट अधिसूचना में संसोधन करते हुए पावर प्लांट प्रबंधन से जहां ऐश जेनरेट होती है। उस क्षेत्र के समीप ऐश आधारित उत्पाद बनाने वाली इकाइयों की अधिकाधिक स्थापना का समर्थन, सहयोग एवं संवर्द्धन के प्रावधान किये गए तथा ऐश की परिवहन लागत थर्मल प्लांट द्वारा वहन करने के निर्देश दिए गए। उपरोक्त प्रावधानों एवं नीति निर्देशों के बावजूद एन.एल.सी. का संयंत्र के आस-पास ऐश आधारित इकाइयों की स्थापना की दिशा में न तो कोई सकारात्मक रवैया है न ही आस-पास की इन इकाइयों को ऐश के आवंटन में कोई सहयोग किया जाता है। फलस्वरूप आस-पास की इन इकाइयों को कच्चे माल के अभाव में उत्पादन चालू रखना व उत्पादन को बढ़ाने की समस्या के साथ साथ आर्थिक हानि भी उठानी पड़ रही है।

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