कोराना काल: स्टेशनरी कारोबार में अधूरा रह गया सेल का पाठयक्रम, नतीजे में बड़ा नुकसान

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– कारोबारी बोले निजी बुक्स पर लगे रोक

– जीएसटी मुक्त हो बुक्स एंड काॅपी

– एक देश, एक बोर्ड व एक पाठयक्रम से आएगी एकरूपता

– जहां कोरोना केस नहीं वहां खुले स्कूल

✍राजेश रतन व्यास✍

बीकानेर। वैश्विक महामारी कोरोना ने बुक्स एंड स्टेशनरी को बुरी तरह से प्रभावित किया है। पूरे कोरोना काल में स्टेशनरी कारोबार में सेल का पाठयक्रम अधूरा ही रह गया। इसके नतीजे में अब आ रहे नुकसान का बड़ा गणित सामने आने लगा है। पिछले लगभग 6-7 माह से देशभर में स्कूल काॅलेज बंद पड़े हैं। इसके चलते स्कूल व काॅलेजों में इस्तेमाल होने वाले आइटम बिक ही नहीं रहे हैं। इसका सीधा असर स्टेशनरी कारोबारियों पर पड़ रहा है। हालात यह है कि स्टेशनरी का सामान गोदामों में ही पड़ा रह गया। कारोबारियों की माने में तो बीकानेर में इस अवधि में 4 से 5 करोड़ का नुकसान  इस कारोबार को हुआ है। यहां के कारोबारी फरवरी तक स्टेशनरी से जुड़ा सारा माल गोदामों में जमा करके रख लेते हैं और स्टेशनरी की सेल के पीक समय अप्रेल से जुलाई तक काफी माल बेच चुके होते हैं, लेकिन इस बार 75 प्रतिशत माल तो गोदामों में ही पड़ा रह गया। क्योंकि लाॅकडाउन अवधि इसी सीजन में आ गया और इसी अवधि में ऑफिसेज भी बंद रहे। इससे कारोबारियों को काफी नुकसान झेलना पड़ा। कारोबारियों के अनुसार बीकानेर में लगभग सवा सौ के करीब स्टेशनरी कारोबारी है। इनमें होलसेलर, रिटेलर आदि शामिल है। स्कूलों में बच्चों के नहीं जाने से ये कारोबारी महज 25 फीसदी ही व्यापार कर पाए हैं। स्टेशनरी में स्कूल बैग, बोतल, सेलो टेप, ज्याॅमेट्री बाॅक्स, गम स्टिक, पेन पैन्सिल, काॅपिया और फाइलें शामिल हैं। इन सवा सौ कारोबारियों की व्यापारिक हालात बिगड़ रहे हैं। स्टेशनरी कारोबार में 400 के करीब लोगों को रोजगार मिला हुआ है। इनमें से कईयों की आजीविका संकट में आ चुकी है और कईयों संकट में आने के कगार पर है।

कोरोना में फेल हो गई सेल

स्टेशनरी कारोबारियों की माने तो इस बार कोरोना काल में सेल बुरी तरह से फेल हो गई। कारोबारियों का कहना है कि किताबें व गाइड बुक थोड़ी बहुत ही सेल हो पाई हैं। इंग्लिश मीडियम बुक्स का सीजन मार्च से पहले चालु हो जाता है। इस अवधि में सेल की तैयारी कर लेते हैं। पूरा माल स्टाॅक कर लेते हैं क्योंकि होली के बाद जैसे ही रिजल्ट आने शुरू होते हैं सेल चालु हो जाती है। ऐसे में फरवरी में स्टाॅक आ गया, लेकिन मार्च में लाॅकडाउन लग गया और जो रिजल्ट आने थे वे आए ही नहीं तो सेल हुई नहीं। स्टाॅक सबके पास घर में ही पड़ा रह गया। यानि 25 फीसदी सेल हुई और 75 फीसदी घर में ही पड़ा रह गया।

रेट्स गिरा देने के बावजूद नहीं आई सेल

कारोबारियों ने बताया कि मैन्युफैक्चर्स ने रेटें 25-25 फीसदी गिरा दी क्योंकि सबकी मजबूरी है सेल नहीं आ रही है। जैसे पेपर मिल वालों के खर्चे 5 से 10 फीसदी गिरें, व्यापार 75 प्रतिशत गिर गया तो जो गेप आ रहा है उसका सबकों नुकसान आ रहा है। किसी ने बैंक ब्याज पर रकम ले रखी है। ब्याज की पूर्ति करने के लिए कागज को घर आई रेट से 2 से 5 फीसदी कम में देने को तैयार हो रहा है। कारोबारियों ने बताया कि कागज के रेट आज की तारीख में 10 से 25 फीसदी गिर गए, लेकिन खरीददार फिर भी कोई नहीं है। क्योंकि स्टाॅक्स सबके पास पड़ा है और माल निकला ही नहीं।

इनका कहना है-

हमनें मार्च में ही बुक्स एंड स्टेशनरी का ही स्टाॅक कर लिया था, लेकिन लाॅकडाउन से लेकर अब तक काॅपियों की 90 फीसदी तथा बुक्स की 70 प्रतिशत सेल डाउन हो गई। अब तो हालात यह है कि बहुत से दुकानदार दुकान का भाड़ा ही नहीं दे पा रहे हैं। ऐसे में कई दुकानें तो बंद होने के कगार पर पहुंच गई है।

– जतन लाल पींचा, प्रमुख, ज्योति बुक्स स्टेशनरी, जयनारायण व्यास काॅलोनी

राज्य सरकार को कम से कम गांवों में जहां कोई केस नहीं है वहां स्कूल शुरू कर देने चाहिए। ताकि कुछ तो सेल हो। इससे 30 से 40 फीसदी सेल चालू हो जाएगी। अभी जो सेल हो रही है वह 25 फीसदी लोकल में हुई है। अभी टीचर्स तो स्कूल जा ही रहे हैं। किताबें भी निशल्क बांट रहे हैं, लेकिन बच्चों को नहीं बुला रहे तो फिर क्या मतलब। गांवों में स्कूल खोल दे ंतो सेल चालू हो जाती है तो काफी फर्क पड़ सकता है।

– ओम प्रकाश मुखेजा, प्रमुख, शिवा स्टेशनरी, गोगागेट

पिछले 5-6 माह में 70 फीसदी नुकसान हुआ। महज 30 फीसदी ही सेल हो पाई और पिछले एक सप्ताह में तो 30 फीसदी भी नहीं हो रही है। बीकानेर में इस कारोबार को करोड़ों का नुकसान हुआ है। इससे उबरने के लिए सरकार को काॅपी किताब को जीएसटी से मुक्त कर देना चाहिए। इस कारोबार को केवल कोराना से ही नहीं अन्य कारणों से भी नुकसान हो रहा है।  इसमें सरकार को प्राइवेट बुक्स पर रोक लगा देनी चाहिए। सरकार को एक बोर्ड व एक एनसीईआरटी की बुक्स कर देना चाहिए। इससे स्कूलों में एकरूपता आ जाएगी। साथ ही शत प्रतिशत मार्केट में फायदा होगा। मार्केट में हर दुकानदार को बाजार में बिजनेस मिलेगा। अभी कुछ लोग स्कूलों से काॅन्टेक्ट करते हैं और अपना माल बिकवा लेते हैं। यानि एक स्कूल का करोड़ों का काम होता है वे अपना कमीशन तय कर लेते हैं। बुक सेलर 2 लाख के पीछे 2 करोड़ का माल बेच लेते हैं। इससे बाकी का भविष्य खत्म हो गया। इसलिए सरकार निजी बुक्स के कारोबार पर रोक लगा दें और एक बोर्ड कर दें। तो ही पुस्तक विक्रेता को बाजार में सहायता मिल सकेगी।

– गिरिश कल्याणी, डायरेक्टर, जी डी सेल्स, माॅडर्न मार्केट

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