प्रदेश के पहले वर्चुअल दीक्षांत समारोह में 906 विद्यार्थियों को मिली उपाधियां, 6 स्वर्ण पदक से विभूषित

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संविधान पार्क का ई-शिलान्यास तथा दो पुस्तकों के ई-संस्करणों का हुआ विमोचन
‘लोकल’ के लिए ‘वोकल’ बनना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता-राज्यपाल श्री मिश्र

बीकानेर, 28 अगस्त। स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय का 17वां तथा प्रदेश का पहला वर्चुअल दीक्षांत समारोह शुक्रवार को राज्यपाल एवं कुलाधिपति कलराज मिश्र की अध्यक्षता में आयोजित हुआ। समारोह के दौरान राज्यपाल मिश्र ने 906 विद्यार्थियों को उपाधियां, छह विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक तथा दो विद्यार्थियों को चौधरी चरण सिंह स्मृति प्रतिभा पुरस्कार प्रदान किए। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय में बनने वाले संविधान पार्क का ई-शिलान्यास तथा दो पुस्तकों के ई-संस्करण का विमोचन किया। श्री मिश्र ने संविधान की उद्देशिका एवं मूल कत्र्तव्यों का वाचन किया तथा इन्हें जीवन में अंगीकार करने का आह्वान भी किया।
समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल श्री मिश्र ने कहा कि ‘लोकल’ के लिए ‘वोकल’ बनना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है, तभी देश आत्मनिर्भर और समन्वित रूप से विकसित बन सकेगा। उन्होंने कहा कि हमारे देश की 58 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। यह देश के विकास का महत्त्वपूर्ण अंग है। इस कारण कृषि से जुड़े नीति निर्धारकों, वैज्ञानिकों, अध्यापकों और विद्यार्थियों की जिम्मेदारी है कि वे कृषि को नए आयामों तक पहुंचाने और कृषक वर्ग को आय सुरक्षा प्रदान करने में अपनी भागीदारी निभाएं।

मिश्र ने कहा कि आज के युग में जब हम वैश्वीकरण की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, तब यह आवश्यक है कि हमारे किसान कृषि उत्पादक संघ बना कर सहकारिता के सिद्धांत के साथ काम करें। विश्वविद्यालय इस दिशा में काम करके किसानों की बीज खरीदने से लेकर विपणन तक की सहायता कर सकते हैं। मिश्र ने कहा कि भारत में नौजवानों की संख्या अधिक है। इन युवाओं की ऊर्जा व समझदारी से हम देश को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि अच्छी कार्ययोजना बनाकर, मौजूदा अवसरों का लाभ उठाते हुए, अपनी मेहनत के बल पर आगे बढ़ें और देश की प्रगति में भागीदारी बनें।
राज्यपाल ने कहा कि कोविड-19 महामारी ने जीवन के परिदृश्य को बदल कर रख दिया है। आज लगभग संपूर्ण विश्व इस परेशानी से जूझ रहा है, लेकिन यह सुखद है कि सभी पूर्ण सतर्कता के साथ इस महामारी को हराने में जुटे हंै। इसी कारण आज उद्यमों के नए रूप सामने आए हैं। डिजिटल तरीकों से पढाई हो रही है। सभी उम्र के लोगों ने इसका प्रयोग सीख कर काम करना शुरू कर दिया है। बड़े-बड़े आयोजन डिजिटल तरीकों से हो रहे हैं।
मिश्र ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को गाँवों में ही व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करना होगा। अपने क्षेत्र से जुडी संभावनाओं को पहचान कर लोकल मज़बूतियों के लिए ‘वोकल’ बनने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आज के ग्रामीण क्षेत्र भी नवाचारों को अपनाने और इनका प्रयोग करने में पीछे नहीं हैं। किसान भी नई चीज़ों को समझना चाहता है और इनका फायदा उठाना चाहता है। ग्रामीण युवा आधुनिक तकनीकियों, खरीदारी, विपणन व सूचना के लिए डिजिटल तरीकों को अपना रहा है और आमदनी बढ़ाने के लिए प्रयासरत हैं। उन्होंने सावचेत किया कि तकनीक, जहाँ अवसर व सहूलियत प्रदान करती है वहीं यह चुनौती भी है, इसलिए हमें इसके उपयोग में समझदारी व सही चुनाव करने की आवश्यकता है।
राज्यपाल मिश्र ने विश्वविद्यालय में कृषि शिक्षा, अनुसंधान एवं प्रसार क्षेत्र के कार्यों की सराहना की तथा आह्वान किया कि विश्वविद्यालय के सभी अधिकारी-कर्मचारी इसे उच्च मुकाम तक पहुंचाने में प्रयत्नशील रहें। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय पर मरु क्षेत्र में कृषि विकास की जिम्मेदारी है। इस क्षेत्र में अनुसंधान, नए उद्यमों एवं नवाचारों की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कृषि उत्पादों में गुणवत्ता वृद्धि और मूल्य संवर्धन के प्रयासों को भी जरूरी बताया तथा कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा जल संग्रहण इसके समुचित उपयोग के साथ सौर व पवन ऊर्जा के उपयोग के क्षेत्र में कार्य किया जाए।
राज्यपाल ने कहा कि हमारे देश में संविधान हमारा मार्गदर्शक है तथा संविधान की प्रस्तावना में राष्ट्र की मूल भावना का उल्लेख है। संविधान ने हमें मौलिक अधिकार दिए हैं। साथ ही हमारे कत्र्तव्यों के बारे में भी बताया गया है। हम सभी की नैतिक ज़िम्मेदारी है कि हम मौलिक अधिकारों के साथ-साथ कत्र्तव्यों को भी जानें और इनके अनुरूप ही व्यवहार करें। उन्होंने नई शिक्षा नीति के विभिन्न बिंदुओं के बारे में बताया।
दीक्षांत अतिथि के रूप में बोलते हुए पद्म भूषण प्रो. राम बदन सिंह ने कहा कि पिछले कुछ समय में कृषि परिदृश्य में बड़े बदलाव आए हैं। कृषि वैज्ञानिक इन्हें समझें तथा नई तकनीकें किसानों तक पहुंचाने में योगदान दें। उन्होंने कहा कि आज जवान और किसान के साथ विज्ञान और अनुसंधान का महत्त्व भी बढ़ा है। प्रो. सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा 33 वर्षों में 20 हजार से अधिक विद्यार्थियों को कृषि शिक्षा प्रदान की गई है। यह विश्वविद्यालय का समाज को बड़ा योगदान है। उन्होंने महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज की कल्पना को साकार करने की आवश्यकता जताई तथा कहा कि गांव आत्मनिर्भर होंगे तो देश स्वतः सम्पन्न हो जाएगा।
कुलपति प्रो. आर. पी. सिंह ने विश्वविद्यालय का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि दीक्षांत समारोह के दौरान शैक्षणिक सत्र 2018-19 में स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले 783 विद्यार्थियों तथा स्नातकोत्तर के 110 विद्यार्थी और विद्या वाचस्पति के 13 विद्यार्थी, जिनका परीक्षा परिणाम 1 जुलाई 2018 से 31 दिसम्बर 2019 के मध्य घोषित हुआ, उन्हें उपाधियां प्रदान की गई। समारोह में 5 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक, एक को कुलाधिपति स्वर्ण पदक तथा दो विद्यार्थियों को चौधरी चरण सिंह स्मृति प्रतिभा पुरस्कार से नवाजा गया।
इस दौरान राज्यपाल श्री मिश्र ने कृषि व्यवसाय प्रबंधन संस्थान की कविता देवी एवं करन भंडारी, गृह विज्ञान महाविद्यालय की कृति जैन, कृषि महाविद्यालय के प्रवीण कुमार एवं रूकू चावला को स्वर्ण प्रदान प्रदान किया। कृषि व्यवसाय प्रबंधन संस्थान के करन भंडारी को कुलाधिपति स्वर्ण पदक दिया गया। वहीं रूकू चावला को चैधरी चरण सिंह स्मृति प्रतिभा प्रथम एवं ज्योत्सना राठौड़ को द्वितीय पुरस्कार से विभूषित किया गया। दोनों विद्यार्थियों को पुरस्कार स्वरूप क्रमशः आठ एवं छह हजार रुपये नकद एवं प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।
समारोह के दौरान राज्यपाल मिश्र ने प्रसार शिक्षा निदेशालय की पुस्तक ‘किसानों की प्रेरणादायी सफलता की कहानियां’ तथा अनुसंधान निदेशालय की ‘ए डिकेड आॅफ रिसर्च अचीवमेंट’ के ई-संस्करणों का विमोचन किया। श्री मिश्र ने संविधान पार्क का ई-शिलान्यास भी किया। इससे पहले कुलपति प्रो. सिंह ने स्वागत उद्बोधन दिया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय का कुलगीत भी प्रस्तुत किया गया। दीक्षांत समारोह का आयोजन ‘सिसको वेबेक्स’ वर्चुअल प्लेटफाॅर्म पर हुआ। इस पर 650 से अधिक प्रतिभागी जुड़े। वहीं विश्वविद्यालय की वेबसाइट, फेसबुक पेज और यू-ट्यूब चैनल पर भी इसका लाइव प्रसारण किया गया। कृषि संकाय अध्यक्ष डाॅ. आई. पी. सिंह, गृह विज्ञान संकाय अध्यक्ष डाॅ. विमला डुकवाल तथा कृषि व्यवसाय प्रबंधन संकाय अध्यक्ष डाॅ. मधु शर्मा ने उपाधि एवं पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की जानकारी दी। समारोह का संचालन डाॅ. अदिति माथुर एवं विवेक व्यास ने किया। तकनीकी व्यवस्थाओं को विशेषाधिकारी इंजी. विपिन लढ्ढा के नेतृत्व में डाॅ. अरविंद झांझडिया, डाॅ. बी. डी. एस नाथावत, डाॅ. सुशील खारिया, डाॅ. अमित कुमावत, डाॅ. मदन लाल रेगर ने संभाला।

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