बीकानेर में बंद हो गई सैंकड़ों दुकानें

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आने लगा है कोरोना, लाॅकडाउन व कर्फ्यू का रूझान
– आय बंद हुई कमाई
– दुकानदार नहीं चुका पाए किराया – कारोबारियों को राहत पैकेज की दरकार
बीकानेर। शहर में पहले कोरोना महामारी का आगाज हुआ। तब आमजन की सेहत की सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन को लाॅकडाउन व कर्फ्यू का रास्ता अपनाना पड़ा और यह सिलसिला पिछले करीब पांच माह से चल रहा है। इसके चलते कमाई के सारे रास्ते बंद हो गए हैं। अल्टीमेटली इस व्यवस्था का प्रभाव किराए पर चल रही दुकानों पर पड़ा। बीकानेर में ऐसी कई दुकानें थीं जो किराया नहीं चुका पाने की वजह से स्थाई रूप से बंद हो गई। इनमें से वे दुकानें ज्यादा बंद हुई जिनका मासिक किराया 10 हजार रूपए या इससे ज्यादा था। बंद होने वाली दुकानों में से शहर के व्यस्ततम केईएम रोड स्थित मार्केट व कटलों की दुकानें हैं। हालांकि कारोबारियों ने बताया कि इन दुकानों को बचाने के लिए लाॅकडाउन से पहले का आधा, फिर आगे दो माह का पूरा किराया माफ भी किया गया। इसके बावजूद कमाई के अभाव में सरवाइव नहीं कर पाए दुकानदार दुकानें बंद करने को विवश हो गए। यही वजह रही कि बीकानेर के व्यस्ततम बाजार की सैंकड़ों दुकानें बंद हो गई। इन इलाकों में दुकानों के साइज व लोकेशन के अनुसार किराए निर्धारित है। कारोबारियों के अनुसार केईएम रोड व तोलियासर भैरूजी गली में 5 हजार से 30 हजार रूपए मासिक किराया चल रहा है। बंद होने वाली दुकानों में वे ज्यादा हैं जिन्हें चलते एक-दो साल ही हुए हैं और किराया ज्यादा है। इनमें वे ही दुकानें ही बची हैं जो लगभग 30 से ज्यादा साल पुरानी है और जिनका किराया 1200 से 2000 रूपए मासिक है।
वेंटिलेटर पर है बाजार
हालात यह है कि बीकानेर का बाजार अभी भी वेंटिलेटर पर चल रहा है। क्योंकि पांच माह से बंद को झेल रहे बाजार में ग्राहकी नहीं के बराबर है। इस पर अब प्रशासन का बीते शनिवार सेे शाम छह बजे बाद तथा रविवार को पूरे दिन बाजार बंद का निर्णय संघर्ष कर रहे दुकानदारों के लिए बेहद मुश्किल भरा साबित हो रहा है। इन दुकानदारों का कहना है कि लाॅकडाउन के बाद बार-बार कफ्र्यू ने बाजार को पूरी तरह से रनिंग में आने ही नहीं दिया और कोरोना के भय से ग्राहक जरूरी वस्तुओं की खरीद के लिए मुश्किल मार्केट में कदम रख रहे हैं। आमदनी नहीं के बराबर और दुकान के बिजली, किराया, स्टाफ सहित अन्य खर्चे सिर पर खड़े रहने के कारण दुकान बंद करने का फैसला करना पड़ रहा है। बाजार में आमदनी चवन्नी भी नहीं और खर्चा रूपया वाली स्थिति बनी हुई है।
यहां यहां बंद हुई दुकानें
तौलियासर भैरूजी गली में कई कटले एवं दुकानें है। एक कटले में तो 40 फीसदी दुकानें बंद हो गई। इसके अलावा यहां 60 फीसदी अन्य दुकानें बंद हो गई। सूत्रों के मुताबिक यहां 60-70 दुकानें खाली हो चुकी हैं। जैन मार्केट में 7-8 दुकानें खाली हो चुकी हैं। गणपति प्लाजा में करीब आधा दर्जन दुकानें बंद हो चुकी है। गणपति प्लाजा में 200 से ज्यादा दुकानें हैं, लेकिन रनिंग में 150 के करीब है। शेष में दुकानें तो किराए पर चढ़ाई ही नहीं तो कुछ में ऑफिस आदि है। कुछ बंद हो गई। यहां अंडरग्राउंड व प्रथम फ्लोर का किराया 6 से 8 हजार है। वहीं ग्राउंड फ्लोर का किराया 20 से 25 हजार रूपए है। ज्यादतर इसी फ्लोर की दुकानें बंद हुई है। गणपति प्लाजा में अधिकतर मोबाइल व एसेसीरिज की दुकानें हैं। खजांची मार्केट में लगभग 450 दुकानों में 300 ऑफिसेज है। बाकी 150 दुकानों में से 10 से 20 दुकानें बंद हो चुकी है और 4-5 बंद होने की कगार पर है। यहां दुकानों का किराया न्यूनतम 25 हजार से अधिकतम डेढ़ लाख तक है। इस मार्केट में अधिकांश रेडिमेड कपड़ों की दुकानें हैं।  

इनका कहना है-
तौलियासर भैरूजी गली में एक कटले में 30 से 40 फीसदी दुकानें बंद हो गई। इनका पहले दिसम्बर तक 50 फीसदी किराया माफ किया। फिर अगले दो माह पूरा किराया माफ किया। इसके बाद भी बंद हो गई। क्योंकि बंद लम्बा चला, कमाई भी नहीं हुई। इस गली में और भी बड़ी संख्या में दुकानें बंद हो चुकी है। यहां 5 से 15 हजार किराया है। कुछ ऐसी भी है जिनका किराया 25 से 30 हजार है। जैन मार्केट में 7 से 8 दुकाने बंद हुई है। कुल मिलाकर बाजार के हालात बेहद खराब है।
– के. के. मेहता, अध्यक्ष, जैन मार्केट एसोसिएशन
कोरोना महामारी ने सभी को प्रभावित किया है। केईएम रोड इलाके में दुकानें बंद हुई है। ग्राहकी नहीं है, कमाई नहीं है। बाजार में पहले 25 से 30 फीसदी सेल थी। राखी पर यह घटकर 15 से 20 फीसदी रह गई। वजह सावा नहीं होना है। आगे भी चार माह सावा नहीं है। सूरत में चार माह से काम बंद पड़ा है। लाभूजी कटला में करीब 200 दुकानें हैं। यहां दुकानें बंद नहीं होने की वजह दुकानें बहुत पुरानी है और उसी हिसाब से किराया है।
– अनन्तवीर जैन, अध्यक्ष, बीकानेर वस्त्र व्यवसाय संघ
व्यापार मंदा चल रहा है। दुकानदारों के पास किराया भरने का पैसा नहीं है। लाॅकडाउन में शुरू में किसी ने एक माह का तो किसी ने डेढ़ माह का किराया माफ किया तो किसी ने छोड़ा ही नहीं। दुकाने भी हफ्ते-दस दिन तो कभी ऑड इवन में खुलती। इससे खर्चा निकालना भी मुश्किल हो गया। प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं मिल रही है। कोरोना से ज्यादा व्यापार पर इम्पेक्ट आने से व्यापारी मर रहा है।
– दीपांशु टाक, अध्यक्ष, गणपति प्लाजा वेलफेयर सोसायटी
खजांची मार्केट में बाजार सही नहीं हैं। रेडिमेड का बाजार 80 फीसदी डाउन चल रहा है। यहां काफी दुकानें खाली हो चुकी हैं तथा कुछ खाली होने की तैयारी में है। अब बाजार में सुधार तभी आ सकता है जब सरकार बिजली बिलों को माफ करें और जीएसटी में रिलेक्सेशन दें। मझले दुकानदारों को बगैर ब्याज फाइनेंस सुविधा दें। स्कीमों के बजाय आमजन किसान व लैबर के खातों में सीधे पैसा जाए तो बाजार में फ्लों आएगा।
– जुगल राठी, अध्यक्ष, बीकानेर व्यापार उद्योग मंडल

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