लोक में स्थापित परम्पराओं को समर्पित हरीकिशन जोशी का सृष्टि पर्व

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समाज को सामाजिक संरचना से परिचित करवाते है हरीकिशन : राजेन्द्र जोशी साझी विरासत, बीकानेर

बीकानेर। साझी विरासत के तत्वावधान रविवार को फुलबाई कुआँ स्थित भैरु निवास में संस्कृतिकर्मी एवं वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता हरीकिशन जोशी के सृष्टि पर्व के अवसर पर उनका नागरिक अभिनंदन किया गया ।
सृष्टि पर्व कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जल प्रबंधन विशेषज्ञ इंजीनियर सुनील पुरोहित थें तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार राजेन्द्र जोशी ने की ।
जोशी के सृष्टि पर्व के अवसर पर मुख्य अतिथि पुरोहित ने कहा कि भारतीय समाज की विशेषता यह है कि विभिन्नताएं होते हुए भी प्रेम और सौहार्द की संस्कृति है। उन्होंने कहा कि ऐसे में पूरे विश्व में रह रहे भारतीय मूल के नागरिकों को स्थापित संस्कृति से परिचित कराने का काम समुदाय के साथ सामाजिक संस्कार देने वाले सामाजिक कार्यकर्ता ही कर सकते है । पुरोहित ने कहा कि विसंगतियों को दूर करने के लिए युवाओं को संस्कृति से जोड़ने की जरुरत है ।
उन्होंने कहा कि हरीकिशन जोशी सदैव सामाजिक कार्यों में अग्रणी भूमिका निभाते रहे है ।
नागरिक अभिनंदन की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार राजेन्द्र जोशी ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को समाज की संरचना का ज्ञान करवाने तथा वर्तमान परिभाषा से परिचित करवाने में संस्कृतिकर्मियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका है , जोशी ने कहा कि हरीकिशन जोशी सदैव सामाजिक कार्यों में यथा लोक में स्थापित परम्पराओं, जीवन और मृत्यु के दौरान सम्पन्न होने वाले संस्कारों में स्वंय आगे बढ़कर काम करते हैं साथ ही युवाओं को प्रेरित करने का प्रयास करते हैं, उन्होंने कहा कि वर्तमान महामारी के निवारण हेतु भी हरीकिशन जोशी ने जोरदार काम किया है ।
युवा अधिवक्ता खुशालचंद जोशी ने हरीकिशन जोशी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला । कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता शिवकुमार थानवी ने अभिनंदन पत्र का वाचन किया तथा प्रारंभ में स्वागत भाषण समाज सेवी विजय कुमार ने दिया ।
अपने सम्मान के उपरांत बोलते हुए हरीकिशन जोशी ने कहा कि समाज में काम करने की प्रेरणा मुझे समाज से ही मिलती है तथा यह प्रेरणा मुझे हमारे समाज के बड़े बुजुर्गों से विरासत में मिली है । सृष्टि पर्व के अवसर पर सरकारी एडवाइजरी का पालन करते हुए जोशी को शाल, श्रीफल, अपर्णा, अभिनंदन पत्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। मोहन लाल जोशी ने आभार प्रकट किया ।

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