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गुरु पूर्णिमा: शिक्षक तेरे कितने अवतार

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बीकानेर। शिक्षक तेरे कितने अवतार कब समझेगी सरकार सारे सिस्टम का बोध शिक्षक के कंधे पर उड़ेल दिया गया है हम बात कर रहे हैं शिक्षकों की जहां मर्जी आए वहां ड्यूटी लगा दी उनका अध्यापन कार्य तो अपूर्ण ही रह जाता है आज गुरु पूर्णिमा के अवसर पर शिक्षकों को समर्पित है हमारी आज की यह प्रस्तुति हम लंबे समय से यह देखते आ रहे हैं कि शिक्षक के कभी पशु गणना कभी जनगणना नामांकन शौचालय गणना पल्स पोलिया अभियान मिड डे मील मतदान मतगणना स्वास्थ्य जांच अकाउंट खुलवाना बच्चों को दूध पिलाना आदि कार्यों में ड्यूटी लगा दी जाती है अब ऐसा लगता है सरकार कहीं बच्चों को सुलाने का भी काम नहीं सौंप दें अब तो ऐसा लगता है कि शिक्षकों को रुलाना बाकी रह गया है इतना ही है तो फिर सरकार को इन सारे मुद्दों को B.Ed के पाठ्यक्रम में शामिल कर लेना चाहिए ताकि आने वाले भविष्य के जो शिक्षक हैं वह इन चीजों का प्रशिक्षण प्राप्त करके जब फील्ड में जाएंगे तो काम सही ढंग से हो पाएगा अब हमें ऐसे शिक्षक तैयार करने होंगे जो सरकार के विभिन्न विभागों के कामों को भी संपन्न कर ले और छात्र-छात्राओं के पाठ्यक्रम को भी समय पर पूरा करवा दें सरकार से यहां यह सवाल है कि शिक्षकों को केवल अध्यापन कार्य करवाने का जिम्मा क्यों नहीं दिया जा रहा है शिक्षण व्यवस्था को लेकर आज हम शिक्षाविद डी पी जोशी के विचार जानेंगे। प्रस्तुत है ‘द इंडियन डेली’ की डी पी जोशी से हुई बातचीत के संपादित अंश। देखें वीडियो

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