औषधियों व पर्यावरण संरक्षण में खेजड़ी वृक्ष का है बड़ा महत्व

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तीन दिवसीय जाम्भाणी अन्तर्राष्ट्रीय वेबिनार सम्पन्न

बीकानेर। गुरू जम्भेश्वर पर्यावरण संरक्षण शोधपीठ, जोधपुर और जाम्भाणी साहित्य अकादमी, बीकानेर के संयुक्त तत्वावधान में तीन से पांच जून तक वैश्विक पर्यावरण की वर्तमान चुनौतियां, जैव विविधता और श्री गुरू जम्भेश्वर जी के सिद्धान्त एवं समाधान विषयक अन्तर्राष्ट्रीय वेबिनार शुक्रवार को सम्पन्न हुआ। अकादमी की उपाध्यक्ष डाॅ. इन्द्रा विश्नोई ने बताया कि वेबिनार में देश विदेश के लगभग तीन हजार शिक्षाविदों, पर्यावरणविदों, कवियों एवं और शोधार्थियों ने भाग लिया। वेबिनार के प्रथम दिन के मुख्य अतिथि नोखा विधायक बिहारीलाल विश्नोई रहे एवं अध्यक्षता प्रो. लक्ष्मी अय्यर ने की। प्रारम्भ में अकादमी के अध्यक्ष कृष्णानन्द आचार्य ने सभी प्रतिभागियों का अपने उद्बोधन से स्वागत किया। इस सत्र में डूंगर महाविद्यालय के डाॅ. राजेन्द्र पुरोहित ने खेजड़ी वृक्ष की औषधीय महत्ता पर प्रकाश डाला। इस सत्र में प्रो. सरोज कौशल एवं प्रो. मदन खीचड़ ने भी शोध पत्र प्रस्तुत किये। दूसरे सत्र के मुख्य अतिथि पूर्व विधायक श्री लादूराम विश्नोई रहे एवं अध्यक्षता जामिया विश्वविद्यालय नई दिल्ली के प्रो. के.के कौशिक ने की। लादूराम विश्नोई ने कहा कि निरन्तर इस प्रकार के आयोजनों से समाज में पर्यावरण के प्रति एक नई चेतना जागृत हो सकेगी।
वेबिनार के दूसरे दिन के प्रथम सत्र के मुख्य अतिथि फलौदी विधायक पब्बाराम विश्नोई रहे एवं अध्यक्षता चौधरी बंशीलाल विश्वविद्यालय, भिवानी के प्रो. बाबूराम ने की। इस सत्र में डूंगर काॅलेज, बीकानेर के डाॅ. श्याम सुन्दर ज्याणी, गाजियाबाद के ग्रीनमैन विजयपाल बघेल एवं जोधपुर की प्रो. कैलाश कौशल ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किये। इसी दिन दूसरे सत्र के मुख्य अतिथि सलिल विश्नोई रहे। चार जून की शाम को श्री कृष्णलाल विश्नोई के नेतृत्व में एक कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें राष्ट्रीय स्तर के कवियों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं।

पर्यावरण संरक्षण में विश्नोई समाज का है योगदान

पांच जून को को हुए उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि राजस्थान सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्री सुखराम विश्नोई ने अपने उद्बोधन में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में विश्नोई समाज के योगदान का उल्लेख किया। मंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा वन्य जीवों की हर सम्भव रक्षा किये जाने के समूचित उपाय किये जायेगें। सुखराम ने कोरोना संकट पर गहरी चिन्ता प्रकट करते हुए सभी से आह्वान किया कि इससे उबरने में पर्यावरण संरक्षण अत्यावश्यक है। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में जोधपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पी.सी. त्रिवेदी ने भी पर्यावरण संरक्षण की महती आवश्यकता पर बल दिया। प्रो. त्रिवेदी ने कहा आगामी सत्र से विश्वविद्यालय द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को गुरू जम्भेश्वर पुरस्कार से नवाजा जायेगा। समाजसेवी राजाराम धारणिया ने सभी अतिथियों का जोशीले अंदाज में धन्यवाद ज्ञापित किया। ओजस्वी संचालन डाॅ. इन्द्रा विश्नोई ने किया।
साहित्य अकादमी के सचिव डाॅ. सुरेन्द्र खीचड़ ने बताया कि तीन दिवसीय इस वेबिनार में विभिन्न वक्ताओं एवं अतिथियों से प्राप्त महत्वपूर्ण जानकारी को संकलित करके उच्च स्तर पर प्रतिवेदन प्रस्तुत किये जाएंगे जिससे कि पर्यावरण संरक्षण के विषय में ठोस जानकारी सरकार एवं अन्य संस्थाओं को उपलब्ध हो सकेगी। डाॅ. खीचड़ ने कहा कि तीन दिवसीय वेबिनार में कोरोना संकट पर भी गहरी चिन्ता व्यक्त की गयी।
वेबिनार में दुबई के आर.के.विश्नोई, अकादमी के बनवारी लाल साहू, संरक्षक डाॅ. सरस्वती विश्नोई, जोधपुर के जेताराम विश्नोई की प्रमुख भूमिका रही। तकनीकी संचालन का कार्य डाॅ. लालचन्द विश्नोई ने किया।

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