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साइलेंट किलर कोरोना बढ़ा रहा है चिंता

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बीकानेर। भयावह होता कोरोना। साइलेंट किलर बनाता कोरोना। राजधानी दिल्ली सहित कई जगह ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें कोरोना का कोई लक्षण नहीं दिख रहा था फिर भी टेस्ट में वे पॉजिटिव पाए गए। कोरोना के ऐसे मरीज जिनमें कोई लक्षण नहीं है वह न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। इसलिए वो अनजाने में ही कोरोना फैलाते चले जा रहे हैं। बिना लक्षण वाले ऐसे मरीजों को एसिम्पटोमैटिक मरीज कहा जाता है। माना जा रहा है कि दुनिया भर में इस तरह के एसिम्प्टोमैटिक कोरोना पॉजिटिव मामले 50 फीसदी के आस-पास हैं। ये बहुत चिंता की बात है क्योंकि बिना लक्षण वाले वायरस को समझना बेहद जरूरी है।
ये हैं वजह :डॉक्टरों के मुताबिक म रीज में कोरोना के लक्षण दिखने या न दिखने के पीछे कई वजहें हो सकती हैं, जैसे कि किसी के शरीर में वायरस की मात्रा, उसका इम्यूनिटी लेवल और मरीज की उम्र. ऐसे में कोरोना के मरीज़ को पकड़ना बेहद मुश्किल काम है। इसे रोकने का एक ही इलाज है ज्यादा से ज्यादा टेस्टिंग..भारत समेत कुछ दूसरे देश रैपिड टेस्‍ट किट के खराब होने की समस्‍या के अलावा एक दूसरी समस्‍या से भी जूझ रहे हैं। ये दूसरी समस्‍या बने हैं एसिम्प्टोमैटिक मरीज। ये वो मरीज होते हैं जिनमें कोरोना वायरस के लक्षण दिखाई नहीं देते और वो अनजाने में इससे दूसरों को प्रभावित कर देते हैं। इन्‍हें तलाश करना, इनका इलाज करना हर किसी के लिए बड़ी चुनौती है और ये एक बड़ा खतरा भी हैं। डॉक्टरों की माने तो अगर मात्रा ज्यादा नहीं हो तो वायरस घातक नहीं होता और लक्षण नहीं दिखते, लेकिन ये टेस्ट में दिख जाते हैं। ऐसी स्थिति में क्या अब हर व्यक्ति को टेस्ट कराना होगा। क्या संसाधनों के अभाव में यह मुमकिन हो पायेगा आखिर इतने टेस्ट किट्स का इंतजाम कैसे हो पायेगा। ऐसे कई सवाल खड़े हो रहे हैं ! पचास फीसदी से अधिक बिना लक्षण वाले मरीजों का पॉजिटिव आना चिंता का विषय बन गया वहीं निरन्तर मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा होना लोगों को दहशत में डाल रहा है। हालांकि राजस्थान में अभी बिना लक्षण वाले पॉजिटिव आने वाले मरीजों की संख्या ना के बराबर है, मगर जिस तरह अन्यत्र कई जगहों पर अपना रूप बदल कर अटैक कर रहा है तो राजस्थान कैसे बच सकता है। कोरोना मरीजों में लक्षण नहीं दिखने वाले मरीजों का आंकड़ा हर जगह अलग-अलग ही दिखता है, ऐसे मरीजों की संख्या दिल्ली में अधिक नजर आई है। आईसीएमआर की मानें तो भारत के करीब 69% मरीज ऐसे हैं जिनमें शुरुआती लक्षण नहीं दिखे। इसके अलावा सेंटर फॉर डिजिज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन और डब्ल्यूएचओ का शोध कहता है कि विश्व में करीब 50 से 70 प्रतिशत मरीजों में संक्रमण का पता नहीं चला। पर ये प्रमाणित नहीं हो सका है कि इनसे एक साथ कितने लोग संक्रमित हो सकते हैं। गौरतलब है कि चीन से आयातित रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट किट की गुणवत्ता पर सवाल उठने के बाद एक अच्छी खबर आई है कि अब देश में भी ये किट बनने लगी हैं। गुरुग्राम के मानेसर में सरकारी कंपनी एचएलएल हेल्थकेयर और दक्षिण कोरियाई कंपनी एसडी बायोसेंसर रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट किट बनाने में जुटी हुई हैं। दोनों कंपनियां अब तक कुल तीन लाख रैपिड टेस्ट किट तैयार हो चुकी हैं। अगले आठ दिनों में 10 से 12 लाख किट और तैयार हो जाएंगी। वहीं, लोनावला स्थित डायग्नोस्टिक फर्म माइलैब्स पीसीआर किट तैयार कर रही है। सरकार हर तरह की तैयारी के साथ कोरोना को हराने के हरसंभव प्रयास कर रही है। कुल मिलाकर हम कह सकते हैं कि कोरोना वायरस अब अपना रूप बदल कर अटैक कर रहा है। ऐसी स्थिति में संक्रमण से बचने के लिए ऐतिहात बरतते हुए घरों में ही सुरक्षित रहा जा सकता है। सोशल डिस्टेंसिंग व सरकारी एडवाइजरी को फॉलो करने के अलावा इससे बचने का कोई उपाय नहीं। अगर इसका सख्ती से पालन नहीं किया गया तो परिणाम भयावह हो सकते हैं।

साभार : जितेन्द्र व्यास

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