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नहीं तो डूब जाएगा बीकानेर की 25 हजार ग्रामीण महिलाओं का रोजगार

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करणी औद्योगिक क्षेत्र की वूलन मिलों के लिए बनाती हैं गांधी चरखे से धागा

बीकानेर (टीआईडी न्यूज)। बीकानेर के पिछड़े ग्रामीण क्षेत्रों की 25 हजार महिलाओं के रोजगार पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। इसकी वजह करणी औद्योगिक विस्तार क्षेत्र के बड़े भू भाग पर फैला गंदे पानी के तालाब से उपजी समस्या को बताया जा रहा है। दरअसल, रीको ने जब इस औद्योगिक क्षेत्र को बनाया था तब से इसके ड्रेनेज सिस्टम को लेकर बरती गई लापरवाही अब यहां के उद्यमियों व श्रमिकों के लिए जी का जंजाल बन गई है। हैरत की बात तो यह है कि साल 2017 में रीको ने इस तालाब के प्रदूषित पानी के निस्तारण को लेकर सीईटीपी निर्माण की प्रतिबद्धता जताते हुए 26 करोड़ की राशि का प्रावधान रखा था। रीको ने पर्यावरण विभाग के प्रति यह प्रतिबद्धता कर रखी है कि वह सीईटीपी लगा देगा। इसके बावजूद अपनी मामूली राशि को बचाने के चक्कर में उसने मामले को कागजों में अटका कर रख दिया है। यह मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, रीको, प्रदूषण मंडल सहित राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर के विभागों व एजेंसियों में उलझ कर रह गया है। रीको की इस लापरवाही से ग्रामीण महिलाओं के रोजगार पर तलवार लटक रही है। कारोबारियों का कहना है कि रीको अपने बचाव में अपनी संदेहास्पद कार्य नीति के तहत साजिशन प्रदूषित उद्योग व प्रदूषित पानी का कहते हुए सीईटीपी को उद्यमियों को ट्रांसफर या सबलेट करने की उसकी चाहत के कारण करणी क्षेत्र के रनिंग 551 उद्योग बंद होने के कगार पर है। बता दें कि करणी औद्योगिक क्षेत्र के एसपीवी के 28 उद्योगों में अधिकांश में सबसे छोटे उद्योग हैं जिनमें 1118 लेबर कार्यरत है व कारपेट वूलन यार्न का उत्पादन करते हैं जिनसे हैंडमेंड कारपेट बनकर पूर्णतया एक्सपोर्ट होता है। वूलन कारोबारियों का कहना है कि हमारे उद्योग हैरिटेज इंडस्ट्रीज के रूप में है व देश के लिए बेहद ही महत्वपूर्ण है। 

20 हजार करोड़ का निर्यात

देश की आजादी के समय से भारत के जिलों में गांधी चरखे से कताई किए धागे से कालीन बनाकर निर्यात किए जाते थे। उसी परम्परा अनुसार अधिकांश उद्योगों में उन का लेफा (पुणी) बनाकर पिछड़े ग्रामीण क्षेत्रों में वितरण करते हुए गांधी चरखे से धागा बनाया जाता है। इसमें लगभग 25 हजार ग्रामीण महिलाओं को रोजगार प्राप्त है। भारत में कालीन का निर्यात लगभग 20 हजार करोड़ का है जिसमें काफी धागा गांधी चरखे का लगता है व इस कार्य से विदेशी मुद्रा अर्जित होती है। इसके बावजूद रीको प्रशासन, प्रदूषण विभाग व चीफ सेक्रटरी के आदेशों की अवहेलना कर रहा है। बरसों से नोटिस व पत्राचार किए जा रहे, लेकिन समस्या का समाधान दूर दूर तक नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि करणी औद्योगिक क्षेत्र के यह गंदे पानी की समस्या निकट भविष्य में हल होगी भी या नहीं?

इनका कहना है – 

हमने बीते 12 नवम्बर को आईएएस एवं प्रभारी अधिकारी आलोक गुप्ता को पत्र दिया था और बताया कि पत्र में रीको की कार्य प्रणाली का अवलोकन व जांच करते हुए रनिंग लघु उद्योगों को न्याय दिलाए। इन्हें बंद होने से बचाने के साथ राज्य सरकार के जीएसटी आदि टैक्सों के राजस्व नुकसान व इन उद्योगों से जुड़ी पिछड़े क्षेत्रों की ग्रामीण महिलाओं के रोजगार के नुकसान को बचाए । 

महेश कोठारी, अध्यक्ष, करणी इंडस्टीज एसोसिएशन बीकानेर

करणी इंडस्ट्री की फैक्ट फाइल

रनिंग उद्योग     551  फैक्ट्री 

गंदे पानी का एरिया 122907. 76 वर्गमीटर 

सीईटीपी राशि    26 करोड़ रुपए 

28 उद्योगों में    1118 लैबर

ग्रामीण रोजगार 25000 महिलाएं 

कालीन निर्यात   20000 करोड़ रुपए 

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