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सुखी जीवन का सूत्र है अपने आप में रहना : मुनि जितेंद्र कुमार

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तेरापंथ प्रबोध प्रतियोगिता का हुआ शुभारंभ

गंगाशहर। युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी के अज्ञानुवर्ती मुनि शांतिकुमारजी, विद्वान शिष्य मुनि जितेंद्र कुमार जी आदि ठाणा-9 के सान्निध्य में रविवार को व्यक्तित्व विकास व्याख्यानमाला के अंतर्गत ‘कैसे करें तनाव प्रबंधनÓ विषय पर विशेष आयोजन हुआ। मुनि जितेंद्रकुमारजी ने मुख्य उद्बोधन में कहा कि व्यक्ति को जीवन में समस्याओं से घबराना नहीं चाहिए। समस्या एक हो सकती है परंतु उसके अनेक रूप में समाधान हो सकते हंै। आज के युग में व्यक्ति अपने आप को भूल कर केवल बाहर ही बाहर जी रहा है। अपने आप में जीना, स्वयं में जीना सुखी रहने का सूत्र है। परिस्थितियां कई बार छोटी होती है किन्तु व्यक्ति द्वारा चिंता उसे पहाड़ के जैसे बना देता है। अपने आप में जीने वाला व्यक्ति फिर कभी परिस्थितियों से नहीं प्रभावित होता। हम अपनी जीवन चर्या में सुधार करें, व्यवहार में सात्विक परिवर्तन लाएं तो तनाव मुक्त जीवन जीने की दिशा में आगे बढ़ सकते है।

इस अवसर पर मुनि अनुशासन कुमार जी ने कहा कि चिंता समस्या तो चिंतन समाधान की तरह है। आचार्य श्री महाश्रमण जी फरमाते हैं कि चिंता नहीं चिंतन करो। मन के नकारात्मक विचारों की जगह हम अच्छे विचारों को स्थान दें। जितने अच्छे विचार हमारे मस्तिष्क में रहेंगे उतनी ही नेगेटिव बातें हमें कम प्रभावित करेंगी। मुनि अनेकांत कुमार जी ने एक गीत के माध्यम से सुखी जीवन के मूल्यों को व्याख्यायित किया। मुनि श्रेयांसकुमारजी ने तपस्या की महत्ता बताई। कार्यक्रम में नवरतन श्यामसुखा के सुपुत्र विनय श्यामसुखा ने अठाई की तपस्या का प्रत्याख्यान किया।

तेरापंथ प्रबोध प्रतियोगिता का हुआ शुभारंभ
तत्पश्चतात जैन श्वेतांबर तेरापंथ सभा, गंगाशहर के तत्वावधान में आयोजित होने वाली तेरापंथ प्रबोध प्रतियोगिता के बैनर का सभा अध्यक्ष अमर सोनी एवं तयुप अध्यक्ष अरूण नाहटा द्वारा विमोचन किया गया। आचार्य श्री तुलसी की कृति तेरापंथ प्रबोध पर आधारित यह वृहद प्रतियोगिता 15, 16 अक्टूबर को आयोजित होगी। देवेन्द्र डागा ने प्रतियोगिता से संबंधित जानकारी दी। साथ ही इस अवसर पर पिछले रविवार तेयुप के तत्वावधान में किशोर मंडल गंगाशहर द्वारा आयोजित हुई ‘मैं भी बनूं प्रतिभावान’ प्रतियोगिता के विजेताओं की घोषणा की गई। तेयुप उपाध्यक्ष महावीर फलोदिया ने प्रथम स्थान पर मोनिका संचेती, द्वितीय सौंपी डागा, तृतीय स्थान पर अजीत संचेती के नाम घोषित किया। विजेताओं को संस्था के पदाधिकारियों द्वारा शील्ड से सम्मानित किया गया।

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