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बारिश को लेकर मौसम विभाग ने यह की भविष्यवाणी

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बीकानेर मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में दिन व रात के तापमान मे कमी होने, मध्यम आपेक्षिक आर्द्रता के साथ तेज गति की हवाएँ चलने और आंशिक बादल छाए रहने के साथ अच्छी वर्षा होने की संभावना है। आज मंगलवार को बीकानेर का अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जिले में 13 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलती रही। किसानों के लिए सलाह 👇

आने वाले दिनो में मौसम की भविष्यवाणी के आधार पर किसानों को सलाह दी जाती है कि खरीफ फसलों ( बाजरा, ग्वार, मूंग, मोठ) कि बुवाई के लिए उन्नत बीज बीज उपचार के लिए रसायन एवं उर्वरकों की व्यवस्था रखे जिससे बारिश होते ही बिना देरी किए बुवाई की जा सके।

किसान भाई बाजरा, मूंग, मोठ व ग्वार की बुवाई के लिए उन्नत किस्मों का चयन करे। कृषि जलवायु खंड 1 सी के लिए बाजरा की उन्नत किस्मे राज 171, एच.एच.बी 60, आर.एच.बी. 121, एच. एच. बी. 67 ( imp ), आर.एच.बी. 90, आई.सी.एम.एच. 356, मूंग की उन्नत किस्मे एस. एम. एल. 668, एम.यू. एम. 2, आर. एम. जी. 62, आर. एम. जी. 268, के. 851, मोठ की उन्नत किस्मे आर. एम ओ. 257, 225, 435, 423 व 40 तथा ग्वार की उन्नत किस्मे आर. जी. सी. 936, 197, 986, 1002, 1003 व 1066 आदि प्रमुख है।

बुवाई के समय बीज उपचार के बाद ही बुवाई करे। इसके लिए बाजरा व मोठ के बीज को बीजजनित रोगो की रोकथाम के लिए 3 ग्राम थायराम व दीमक से बचाव के लिए 4 मिली लीटर क्लोरोपायरीफॉस प्रति किलो बीज तथा ग्वार को 250 पी.पी.एम. एग्रोमाइसिन (1 ग्राम प्रति 4 लीटर पानी) के घोल में 2 घंटे डुबोकर रखने के बाद ही बुवाई करे। ग्वार मूंग, मोठ के बीजो को कवकनाशी एवं कीटनाशी से उपचार के बाद उपयुक्त जीवाणु खाद से उपचारित कर कुछ देर छाया में सुखाकर ही बुवाई करे।

किसान भाई बाजरा की बुवाई के लिए 4 किलो, मूंग व ग्वार के लिए 16 किलो तथा मोठ के लिए 12 से 16 किलो बीज प्रति हैक्टर की दर से काम मे लेवें।

. वर्षा होने पर चारे वाली फसलो में यूरिया का छिड़काव करे।

आने वाले दिनों में वर्षा होने की संभावना है अतः मूँगफली की फसल में सिंचाई को कुछ समय के लिए स्थगित करे तथा खड़ी फसल ( मूँगफली व चारे वाली फसल) में किसी भी प्रकार के रसायनो का छिड़काव न करे।

अधिक बरसात होने की स्थिति में बुवाई किये हुए मूँगफली एवं बाजरा के खेतो में उचित जल निकास की व्यवस्था करे। बारिश के मौसम में संतुलित हरे चारे के लिए बाजरा व ज्वार के साथ लोबिया व ग्वार के साथ मिलाकर बुवाई करें।

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