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डॉ सूरज की सेवा रूपी सोच से प्रकाशित हो रही मानवता

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बीकानेर। भारतीय विकास परिषद के संस्थापक डॉ सूरज प्रकाश विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। सेवा के लिये उनकी अद्धभुत सोच व विचार का परिणाम ही आज की भारत विकास परिषद है । उनकी कार्यशैली, व्यव्हार और कार्यकुशलता सभी अदभुत थे। उन्होंने सामाजिक, धार्मिक, राष्‍ट्रीय विषयों पर काम करते हुए इस संस्‍था को समाज के विभिन्‍न वर्गों के कल्‍याण और विकास में समर्पित किया। ये उद्गार परिषद के राष्ट्रीय महासचिव श्याम शर्मा ने रविन्द्र रंगमंच में डॉ सूरजप्रकाश के 102 वीं जयंती पर आयोजित संगोष्ठी में व्यक्त किये।

उन्होंने कहा कि नाम के अनुरूप ही डॉ सूरज प्रकाश ने भारत विकास परिषद के माध्यम से सेवा रूपी रोशनी को समाज में प्रकाशित करते हुए मानवता को नई राह दिखाई है। आज देशभर में भारत विकास परिषद् की शाखाएं उन्ही के दिखाए मार्ग पर चलकर सेवा के नये आयाम स्थापित कर रही है। मुख्य अतिथि महापौर सुशीला कंवर राजपुरोहित ने कहा कि सेवा समर्पण संस्कार का दूसरा नाम भाविप है। इन तीनों प्रकल्पों के माध्यम से मानवता को सेवित करने का काम परिषद के सदस्य कर रहे है।

क्षेत्रिय महासचिव त्रिभुवन शर्मा ने कहा कि वे परिषद के प्रत्येक सदस्य के लिए आदर्श है। उनके मूल्य, उनकी नीतियाँ हम सबके लिए प्रेरणादायी हैं। प्रांतीय अध्यक्ष मोटाराम चाचान ने कहा कि डॉ सूरज प्रकाश राष्‍ट्र सेवा, भारत की अखंडता और मानव सेवा के लिए काम करना चाहते थे और इसी के लिए अपना जीवन समर्पित किया। कार्यक्रम संयोजक अश्विनी कुमार घेई ने उनके कृतित्व व व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे एक नेतृत्वशील, स्वपनदर्शी, ढृढ़-निश्चयी व आत्मविश्वासी व्यक्तित्व थे।

उन्होंने अपने मित्रों व सहयोगियों के साथ गहन विचार मंथन के पश्चात् संपन्न वर्ग के लोगों को देश के गरीब, पिछड़े एवं वंचित भाई-बहनों की सेवा हेतु प्रेरित करते हुए वर्ष 1963 में स्वामी विवेकानंद जन्म शताब्दी वर्ष में भारत विकास परिषद् की स्थापना की। उनके द्वारा रोपित भारत विकास परिषद् रूपी पौधा आज वट वृक्ष बनकर पूरे देश में 1500 से अधिक शाखाओं एवं 75000 से अधिक सदस्यों द्वारा अनेक प्रकल्पों के माध्यम से देश के सर्वांगीण विकास में संलग्न है।

परिषद के नगर शाखा सचिव राजीव शर्मा ने संस्था का उद्देश्य भारतीय समाज का सर्वांगीण विकास करना है, इस विकास में सामाजिक, सांस्कृतिक, नैतिक, राष्ट्रीय एवं आध्यात्मिक सभी प्रकार का विकास समाहित है। संस्थापक सदस्य राजेन्द्र गर्ग ने बताया कि परिषद् के प्रकल्पों एवं कार्यक्रमों में संस्कार के अंतर्गत राष्ट्रीय समूहगान,भारत को जानो प्रतियोगिता, गुरु वंदन छात्र अभिनन्दन, महिला एवं बाल विकास,सामूहिक सरल विवाह,प्रौढ़ साधना शिविर,गुरु तेगबहादुर बलिदान दिवस व अन्य प्रेरक आयोजन कराये जाते है।

इसी प्रकार सेवा प्रकल्प के अंतर्गत दिव्यांग सहायता एवं पुनर्वास, वनवासी सहायता , स्वास्थ्य सेवाएं, रक्तदान, समग्र ग्राम विकास, कुपोषण एवं एनीमिया मुक्त भारत, महिला सशक्तिकरण, बेटी बढ़ाओ-बेटो पढ़ाओ- बेटी बसाओ, नशामुक्ति अभियान, पर्यावरण संरक्षण, योग एवं कौशल केन्द्र, प्राकृतिक आपदा राहत, पुनर्वास कार्य आदि का आयोजन मुख्य रूप से किया जाता है। जिसके माध्यम से सेवा संस्कार व समर्पण के भाव आने वाली पीढ़ी में पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है। बाद में नगर अध्यक्ष डॉ वेदप्रकाश गोयल ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। संगोष्ठी में शाखा अध्यक्ष घनश्याम सिंह,मीरा शाखा अध्यक्ष छवि गुप्ता भी मंचस्थ रही। संचालन मनीष कुमार खत्री ने किया।

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