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मौसम : बीकानेर में बढ़ेगा तापमान, लेकिन चलेगी तेज हवाएं

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बीकानेर । बीकानेर में पिछले दिनों बारिश के चलते मौसम सुहाना रहा, लेकिन अब फिर से गर्मी सताने लगी है। जिले में आज अधिकतम तापमान 41.2 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 25.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बीछवाल मौसम केंद्र के अनुसार आने वाले दिनों में दिन व रात के तापमान में बढ़ोतरी होने, कम आपेक्षिक आर्द्रता के साथ तेज गति की हवाएँ चलने और बादल छाए रहने के साथ वर्षा नहीं होने की संभावना है। किसानों के लिए सलाह 👇

जिन क्षेत्रों में पिछले दिनों वर्षा हो गई है, मूँगफली की बुवाई हेतु 10. 15 टन प्रति हेक्टर की दर से अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर

की खाद या कम्पोस्ट को खेत में समान रूप से बिखेर कर खेत में मिलायें। सफेद लट कीट के प्रभावी नियंत्रण के लिए मौसम कि पहली बारिश के साथ ही दोपहर में खेजड़ी व झाड़ीदार वृक्षों पर मोनोक्रोटोफोस .

36डब्ल्यू. एम. सी या क्यूनॉलफॉस 25ई. सी. नामक दवा का 1.5 से 2.0 मिली / लीटर की दर से पानी के साथ छिड़काव करें। बड़े पेड़ों पर सफेद लट के प्रोढ़ो को आकर्षित करने के लिए एनिसोल नामक रसायन का 3 मिली/ स्पंज / पेड़ के आधार से पेड़ो पर फेंक कर कीटनाशी का छिड़काव करें।

मानसून या मानसून के पूर्व की वर्षा का लाभ लेने के लिए मूँगफली की बुवाई की तैयारी रखे। उन्नत बीज बीज उपचार के लिए रसायन उर्वरक आदि की व्यवस्था करें और अच्छी मात्रा में वर्षा होने पर बुवाई करें। .

मूँगफली में बिजाई से पहले 2.5 ग्राम क्लोरोथेलोनिल या 2 ग्राम कार्बेण्डाजीम प्रति किलो की दर से उपचारित करे । जहाँ सफेद लट का प्रकोप हो वहाँ 3 मिली लीटर प्रति किलो की दर से इमिडाक्लोप्रिडकाम में लेवें। इसके बाद राइजोबियम पी एस बी जीवाणु खाद 3 पैकेट/है. की दर से उपचारित करे । .

बुवाई के समय 44 किग्रा यूरिया एवं 200 किग्रा एस एस पी / है की दर से उर्वरक काम में लेवें। बिजाई के लिए उन्नत बीज जैसे एच एन जी 10, टी जी 37 ए आदि उन्नत किस्मों के बीज की 80 किग्रा / है की दर से बिजाई करें।

• बारानी क्षेत्रों में बाजरा कि बुवाई के लिए उन्नत किस्मों यथा एच.एच.बी. 67 ( imp). आर. एच. बी. 177. आई.सी.एम.एच. 356, आर. एच. बी. 173 आदि का बीज काम में लेवे तथा बुवाई के समय बीजजनित रोगों की रोकथाम के लिए 3 ग्राम थायराम व दीमक से बचाव के लिए 4 मिली लीटर क्लोरोपायरीफॉस प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करने के बाद ही बुवाई करे।

मौसम में परिवर्तन के कारण बाह्य एवं अंतः परजीवियों का प्रकोप हो सकता हैं। अतः पशुचिकित्सक की सलाह से बाह्य परजीवी जैसे जुएँ, चिचड़े, जोंक आदि से बचाव/रोकथाम के लिए ब्यूटोक्स अथवा टिक्कल नामक दवा 1 मिली प्रति लीटर की दर से पशुओं के शरीर पर प्रयोग करे।

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