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बीकानेर-गंगाशहर में संघ प्रभावक प्रवास सम्पन्न कर बढ़ चले ज्योतिचरण

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-अपने आराध्य को विदा करने उमड़ा श्रद्धा का ज्वार

-महातपस्वी महाश्रमण का महाश्रम जारी, प्रलम्ब विहार के बाद भी तीन जगहों पर दिया उद्बोधन

-सीमा सुरक्षा बल के जवानों व राजस्थान पुलिस के सैंकड़ों जवानों ने दर्शन कर पाया आशीष

-सुनने से हो सकती है कल्याण की प्राप्ति: युगप्रधान आचार्य महाश्रमण

बीकानेर । बीकानेर-गंगाशहर क्षेत्र में अल्पकालिक ही किन्तु संघ प्रभावक यात्रा सुसम्पन्न कर जैन श्वेताम्बर तेरापंथ के ग्यारहवें अनुशास्ता, मानवता के मसीहा युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने शनिवार को आचार्य तुलसी शांति प्रतिष्ठान ‘नैतिकता का शक्तिपीठ’ से मंगल विहार किया तो गंगाशहर-बीकानेर के हजारों श्रद्धालु अपने आराध्य को विदा करने के लिए उपस्थित नजर आए। प्रातःकाल आचार्यश्री सर्वप्रथम आचार्यश्री तुलसी की समाधि पर पहुंचे और वहां कुछ क्षण के ध्यानस्थ हुए। कुछ समय बाद उपस्थित श्रद्धालुओं पर आशीषवृष्टि करते हुए आचार्यश्री अगले गंतव्य को प्रस्थित हुए। कुछ दूरी विहार कर आचार्यश्री आचार्य तुलसी कैंसर अस्तपाल एण्ड रिसर्च सेंटर में पधारे। जहां डाक्टरों ने आचार्यश्री का भावभीना अभिनंदन किया। आचार्यश्री वहां कुछ क्षण आसीन होकर डाक्टरों को पावन प्रेरणा प्रदान की।

तत्पश्चात आचार्यश्री पुनः गतिमान हुए। कल रात हुई बरसात और प्रातः से ही आसमान में आते-जाते बादलों के कारण सूर्य भले ही ओझल था, किन्तु उमस शरीर को पसीने से नहला रही थी। ऐसे में मानवता के कल्याण को समर्पित महातपस्वी महाश्रमणजी निरंतर गतिमान थे। आचार्यश्री श्रीडूंगर महाविद्यालय में पधारे। वहां से संबंधित लोगों ने आचार्यश्री का स्वागत किया तो आचार्यश्री ने संबंधित लोगों को उपस्थित विद्यार्थियों को पावन प्रेरणा प्रदान की।

कुछ समय उपरान्त आचार्यश्री पुनः गतिमान हुए तब तक सूर्य भी यदा-कदा धरती को अपने किरणों से तपा रहा था। शरीर पसीने से तर-बतर होने के बाद भी आचार्यश्री निस्पृहभाव से गंतव्य की ओर गतिमान थे। लगभग सोलह किलोमीटर का प्रलम्ब विहार कर आचार्यश्री रिदमलसर में स्थित बोथरा फार्म हाउस में पधारे। बोथरा परिवार के सदस्यों ने आचार्यश्री का भावभीना स्वागत किया।

फार्म हाउस परिसर में आयोजित मंगल प्रवचन में उपस्थित जनता को आचार्यश्री ने पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि मनुष्य को बोलने और सुनने का काम पड़ता है। मौन करना भी महत्त्वपूर्ण बात है, किन्तु बोलने का भी अपना महत्त्व है। शास्त्रों में बताया गया है कि सुनकर मनुष्य कल्याण और पाप को जान लेता है। जानने के बाद उसके लिए जो हितकर हो उसे अपने जीवन में ग्रहण करने का प्रयास करना चाहिए। सुनने से आदमी का ज्ञान वृद्धिंगत होता है। संवर, निर्जरा और तप जैसे तत्त्वों को जानकर उसे अपने जीवन में उतारने का प्रयास करना चाहिए। इसलिए आदमी को यदा-कदा सत्संगति करने का प्रयास करना चाहिए। सुनने से कई बाद मनुष्य के जीवन की दशा और दिशा भी बदल सकती है। इसलिए जब भी अवसर मिले सुनने का प्रयास करना चाहिए। आचार्यश्री ने अपने मंगल प्रवचन के उपरान्त कहा कि आज मूलचंद बोथरा परिवार के स्थान में आना हुआ है। बोथरा परिवार के लोगों में अच्छे धर्म के संस्कासर बने रहें।

कार्यक्रम में बालक जयेश छाजेड़ व प्रज्ञान बैद ने ‘महाश्रमण अष्टकम्’ का वाचन किया। बोथरा परिवार की महिलाओं व युवाओं ने परिसंवाद और गीत आदि की प्रस्तुति दी। श्रीमती गीतिका बोथरा ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी और आचार्यश्री से पावन आशीर्वाद प्राप्त किया।

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