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‘पुष्करणा सावो आयो रे, रमक झमक हुई शहर माय’

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सावा रस धारा में रचनाकारों ने रमक झमक मंच पर बहाया रस

बीकानेर। पुष्करणा सावा के अवसर पर रमक झमक मंच पर ‘सावा रस धारा’ कार्यक्रम में कवियों और गीतकारों ने खूब रस बहाया। कवयत्री मनीषा आर्य सोनी ने ‘रमक झमक हुई शहर बिकाणे में,हरख हरख अठे मंगल मनावे है’ गीत सुनाकर रस बहाने की शुरुआत की। कैलाश टाक ने ‘घर घर मंडगी चवँरी’, कमल रंगा ने ‘पुष्करणा सावो आयो रे,रमक झमक हुई शहर माय’, आनन्द मस्ताना ने ‘सखी म्हारो सावो छपग्यो ए, मन मोती हरखायो ए’ जुगल पुरोहित ने ‘बीकाणा में धूम मची सावो आयो रे’ इंद्रा व्यास ने ‘घर घर मे गीत सुणी जै रे,सावो आयो रे’ रचनाओं के माध्यम से कोलकत्ता मुम्बई आदि शहरों से सावा के लिए आने वाले लोगों एवं शहर में बन रहे सावामय माहौल को बताया।

युवा कवि विप्लव व्यास ने ‘सावो करे सवार सगळो ने बतावे’, डॉ कृष्णा आचार्य ने ‘सादगी से सावा मनाना’ रचनाएं सुनाकर सावा की महत्ता पर बताकर वाह वाही लूटी। नगेंद्र किराड़ू ने ‘ ओ गुड़िया तुम खुश रहिजो’ तथा संजय आचार्य वरुण ने ‘चिड़कली उड़ने को तैयार’ रचना सुनाकर सगाई से लेकर खासकर विदाई के समय माँ बाप व भाई के दिल की दशा को उपस्थित लोगों तक पहुचाया। हनुमंत गौड़, गिरिराज पारीक ने विवाह के समय परिवार के जुड़ाव पर रचनाएं प्रस्तुत की। बाबू कटपीस ने ख्यातनाम कलाकरों की आवाज में पैरोडी सुनाकर सबको गुदगुदाया।

सावा रस धारा कार्यक्रम की अध्यक्षता राजस्थानी के वरिष्ठ गीतकार शिवराज छंगाणी ने की। रमक झमक के अध्यक्ष प्रहलाद ओझा ‘भैरु’ ने सावा पर विशेष रचनाएं सुनाने के लिए सबका आभार व्यक्त किया। अतिथियों का स्वागत सतीश किराड़ू ने किया।

रमक झमक के राधे ओझा ने बताया कि रविवार को ‘सावे को लेकर महिला सम्मेलन होगा जिसमें विभिन्न विषयों पर उनसे खुलकर चर्चा करवाई जाएगी। इसमें सर्व समाज को शामिल किया जाएगा।

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