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नौजवान कृष्ण चरित्र को समझे ताकि भ्रम न हो- भागवताचार्य व्यास

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बीकानेर । रास लीला रंग लीला नहीं है बल्कि भक्त और भगवान का मिलन है। शुकदेवजी ने परीक्षित से कहा कि तेजस्वी लोगों में दोष न देखे । रासलीला के समय कृष्ण की उम्र 8 वर्ष थी अत: वह काम लीला नहीं थी। इस कारण नौजवान कृष्ण चरित्र को समझे ताकि भ्रम न हो। यह प्रसंग भागवताचार्य मुरली मनोहर व्यास गोकुल सर्किल स्थित सूरदासाणी बगेची में चल रही श्री मद् भागवत कथा के छठे दिन भक्तजन को सुना रहे थे। कथा में व्यास महाराज ने कृष्ण की प्रतिज्ञाओं के बारे में बताया कि वृंदावन में कृष्ण ने बाल न कटवाने, शस्त्र न उठाने, सिले वस्त्र न पहनने तथा पगरखी न पहनने की प्रतिज्ञा की थी। साथ ही कंस वध का सिलसिलेवार रोचक प्रसंग सुनाया। इसके अलावा संदीपन ऋषि से कृष्ण के शिक्षा ग्रहण करने का महत्व समझाया। छठे दिन की कथा के समापन से पूर्व समाज के अनेक प्रबुद्धजनों को महाराज ने दुपट्टा-तस्वीर देकर सम्मानित किया। बता दें कि एक दिन पूर्व मुन्ना व्यास (कलकत्ता वाले ) द्वारा रात को रामदेव जी जन्म के मधुर भजन भी सुनाए गए जिसे सुनकर भक्तजन भाव विभोर हो उठे। गौरतलब है कि चूरा परिवार द्वारा आयोजित की जा रही यह कथा स्व. दुर्गा देवी चूरा की स्मृति में आयोजित की ज रही है। जहां हर रोज बड़ी संख्या में भक्तजन कथा का रसास्वादन ले रहे हैं। इस दौरान भक्तजन वहां सजी सजीव झांकियां को निहारने से भी नहीं रोक पा रहे हैं।

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