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नाल ओवरब्रिज में रह गई अनेक कमियां, न मंत्री सुन रहे और न अफसर

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सरपंच ने केन्द्रीय परिवहन मंत्री से लगाई गुहार

बीकानेर । नाल गांव में नेशनल हाईवे नं 15 पर स्थित रेलवे क्रॉसिंग पर बनाए गए ओवरब्रीज में कई खामियां और त्रुटियां रह गई है। साथ ही प्लान किए गए नक्शे के मुताबिक पुल का निर्माण नहीं किया गया है। इस वजह से आमजन व ग्रामवासियों को आए दिन अनेक कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध में ग्राम पंचायत नाल बड़ी की सरपंच तुलसी देवी ने केन्द्रीय परिवहन मंत्री नितिन गड़करी को पत्र लिखकर ओवरब्रिज से जुड़ी अनेक समस्याओं से मुक्ति दिलाने के लिए गुहार लगाई है। सरपंच तुलसी ने बताया कि ओवरब्रिज में रही कमियों के बाबत अनेकों बार सम्बन्धित कार्यालयों, अफसरों एवं विभागों को सर्वेश रूप में एवं पत्र व्यवहार द्वारा अवगत कराया गया है, परन्तु निष्कर्ष में निल बटा निल यानि किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं की गई और ना ही की जा रही है। यहां तक की केंद्रीय मंत्री गडकरी के दफ्तर से भी इस विषय में कई बार पत्र व्यवहार किया गया, लेकिन न तो किसी भी प्रकार का उतर ऑफिस से आया और ना ही किसी भी प्रकार की कार्रवाई की गई । इन सब के बावजूद सरपंच ने पुल में रह गई मुख्य कमियों की लिस्ट बनाकर फिर से केंद्रीय मंत्री को भेजी है।

ब्रीज के नीचे आ रही है समस्या रेलवे पटरी के दोनों तरफ पक्की दीवार बन जाने से दोनों तरफ आने जाने का सम्बन्ध विच्छेद हो गया है। रेलवे पटरियों के दूसरी तरफ गोचर चारागह होने के कारण मवेशियों को रेलवे पटरियों के ऊपर से जाना पड़ता है। इससे आए दिन मवेशी पटरियों को पार करते समय दुर्घटना के शिकार हो जाते है और पशु मरने के कुछ समय बाद सड़ गल जाते है और उनकी बदबू से वातावरण भी दूषित होता है । मृत पशु उठाने वाले हजारों रूपए की मांग करते है। इसका मुख्य कारण यह है कि उन्हें मृत पशु उठाकर ब्रिज के ऊपर से जाना पड़ता है। सड़ांध मारते पशुओं की दुर्गंध से बचाव के लिए स्थानीय लोग मृत पशु को उठाने वालो को मुंह मांगा भुगतान करते हैं। सरपंच ने सुझाव दिया कि यदि एक अण्डर ब्रिज बना दिया जाए तो पशु मवेशी एवं आने-जाने वाले मुसाफिरों को रेल पटरियों के ऊपर से नहीं जाना पड़ेगा। साथ ही कोई दुर्घटना की सम्भावना भी नहीं रहेगी।

नहीं लगाई सीढ़ियां नाल के आस-पास के ग्रामीणों के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग पर से पुल से नीचे उतरने व चढ़ने के लिए पर्याप्त सीढियां भी नहीं लगाई गई। सरपंच तुलसी ने बताया कि जिस समय पुल का निर्माण चल रहा था। उस समय पुल के चार तरफ की सीढ़ियां लगाना प्रस्तावित था व इसके लिए सीढियां भी लाकर रखी गई थी। ब्रिज निर्माण के बाद सीढ़ियों का आधा-अधूरा काम करके बीच में ही छोड़ दिया गया जिस कारण से ग्रामीणों में काफी रोष हैं ।

नहीं जलती रोड लाइट पुल के आस पास व पुल के नीचे सर्विस रोड पर विद्युत पोल तो लगा दिए गए परन्तु कभी भी लाईटें नहीं जलायी जाती है। अन्धेरा होने के कारण यहां अवैध शराब का कारोबार तथा नशा करने वाले असामाजिक तत्वों का जमावड़ा भी लगा रहता है। जिससे आम आदमी व स्थानीय लोगों को जानमाल का खतरा बना रहता है। साथ ही लाइटे नहीं जलने से आवारा पशु भी सर्विस रोड पर आकर बैठ जाते है अन्धेरा होने से आने जाने वाले वाहन इन मवेशियों से टकरा कर भयंकर दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं।

डिवाइडर पर बन्द कर दिया रास्ता नाल गांव पर बने पुल से उतरते ही डिवाइडर को बन्द कर दिया गया है जिससे नाल गांव व आस पास के गांवों एवं बीकानेर से आने वाले राहगीरों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। डिवाइडर पिछले चार साल तक चालू था, लेकिन फिलहाल उसे बन्द कर दिया गया है जिससे राहगीरों को कम से कम चार से पांच किलोमीटर तक का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ता है जो कि आम लोगों में परेशानी का सबब है। डिवाइडर पिछले चार साल से चालू था लेकिन कुछ समय से इसे बन्द कर दिया है। सरपंच से ने गडकरी से अनुरोध किया कि इस डिवाइडर को पुनः पहले की तरह चालु करवाया जाए एवं एक सर्किल भी बनवाया जाए जिससे आमजन को राहत मिल सके।

नहीं लगा है दिशा-निर्देश बोर्ड नाल गांव के आस पास लगभग दस गांव के लोगों को भी इस भंयकर समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इसमें मुख्य गांव गेमनापीर चावडा की बस्ती बच्छासर, कोलासर, अक्कासर, सालासर, नाईयों की बस्ती, चाण्डासर, चानी, छोटी नाल व बडी नाल आदि गांव हैं। इन गांवों से व अन्य जगहों से आने जाने वाले यात्रियों के लिए दिशा निर्देश का कोई बोर्ड नहीं लगा हुआ है। जिस कारण से यात्री मुसाफिर कड़ी धूप में इधर उधर रास्ता पूछने के लिए भटकते रहते हैं।

सीवरेज लाइन की है समस्या पुल के नीचे दोनों ओर सीवरेज लाइन नाला निर्माण में भी बड़ी कमिया रह गई है। इस नाले का निर्माण कार्य मात्र बीस प्रतिशत ही हुआ है। अस्सी प्रतिशत काम बाकी है। रेलवे क्रॉसिंग के दोनों तरफ पक्की दीवार बन जाने से बारिश का पानी जगह जगह इकठठा हो जाता है एवं एक छोटी तलाई का रूप ले लेता है। पानी इकट्ठा हो से कई बीमारिया पनपती है। साथ ही मुसाफिरों एवं ग्राम वासियों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है।
सरपंच तुलसी देवी ने उम्मीद जताई है कि केन्द्रीय मंत्री गड़करी इन कमियों का संज्ञान लेते हुए जल्द से जल्द किसी वरिष्ठ एवं जिम्मेदार अफसर को इन कमियों एवं त्रुटियों का निरीक्षण कर उचित कार्रवाई करवाने का निर्देश देंगे।

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