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प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति रोग निवारण व सात्विक जीवन का हैं मूल आधार – प्रो. आर.पी. सिंह, कुलपति

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– राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा दिवस
बीकानेर । स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय परिसर में स्थित योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र पर आज “राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा दिवस” के उपलक्ष में सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रो. आर पी सिंह जी- माननीय कुलपति- स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, प्रो. एस एल गोदारा, प्रो. वीरसिंह, डॉ. देवाराम काकड़ ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया।

राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा दिवस के अवसर पर माननीय कुलपति प्रो. आर पी सिंह जी ने सेमिनार को सम्बोधित करते हुए कहा कि स्वदेशी चिकित्सा पद्धति प्राकृतिक चिकित्सा, कम लागत व तनाव मुक्त उपचार के क्षेत्र में अग्रणी है। यह कोई मत-पंथ या सम्प्रदाय नहीं अपितु जीवन जीने की सम्पूर्ण पद्धति है। प्रत्येक मानव इस पथ पर चलकर जीवन में पूर्ण सुख, शांति व आनंद प्राप्त कर सकता है। इस पद्धति से हम मानसिक, नैतिक व शारिरिक लाभ के साथ – साथ सात्विकता पूर्ण जीवन जीने का आनंद ले सकते है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी स्वस्थ रहने के लिए हमेशा प्राकृतिक चिकित्सा में विश्वास रखते थे और अपने निकटवर्ती लोगों को इसके बारे में बताते थे, प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति गांधी जी की सबसे प्रिय चिकित्सा पद्धति थी। वर्तमान समय में रोग एवं स्वास्थ्य के बीच के अंतर को कम करने के लिये योग – प्राकृतिक चिकित्सा को व्यापक पैमाने पर प्रतिष्ठित करने की आवश्यकता है। इस लिये हम सभी अपने उत्तम स्वास्थ्य हेतु प्रतिदिन इस पद्धति की क्रियाओं का अभ्यास करना होगा।

योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र के निदेशक डॉ. देवाराम काकड़ ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्राकृतिक चिकित्सा पंचमहाभूतों के संतुलन एवं विभिन्न व्याधियों में प्रायोजित आहार के माध्यम से एक स्वतंत्र चिकित्सा पद्धति है। इस पद्धति में पंच महाभूतों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु एवं आकाश) के द्वारा उपचार कर रोगी को स्वस्थ किया जाता है।

सेमिनार को संबोधित करते हुए प्रो. एस एल गोदारा ने कहा कि ‘पहला सुख, निरोगी काया’ हमे आज प्राकृतिक चिकित्सा को जीवन मे अपनाना चाहिए। इस पद्धति से रोग मुक्ति के साथ- साथ आध्यात्मिक रूप से भी हमें मजबूरी मिलती है। प्राकृतिक चिकित्सा से अनेक वायरस जनित रोगी से बचाव भी सम्भव है।
प्रो. वीरसिंह ने सेमिनार को संबोधित करते हुवे कहा कि प्राकृतिक चिकित्सा बहुत ही चमत्कारी पद्धति हैं। मै स्वयं समय – समय पर इसका लाभ लेता हूं । हमें शतायु तक स्वस्थ रहना हैं तो प्राकृतिक चिकित्सा की ओर आगे बढ़ना होगा, यह पद्धति स्वस्थ जीवन जीने के लिये प्रेरित करती हैं।

राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा दिवस के अवसर पर तीन योग व प्राकृतिक चिकित्सा के साधकों का सम्मान किया गया। जो निस्वार्थ भाव से इस पद्धति के लिये कार्य कर रहे हैं।
01. लक्ष्मण मोदी- बच्चों के लिये योग, सुशिक्षा, संस्कार आदि के लिये कार्य करने पर आदर्श योग साधक के रूप में सम्मान प्रतीक व श्रीफल देकर मंचस्थ अतिथियों द्वारा सम्मान किया गया।
02. अपराजिता राव- योग व प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति के महिलाओं के लिये प्रचार – प्रसार कार्य करने पर आदर्श साधक के रूप में सम्मान प्रतीक व श्रीफल देकर मंचस्थ अतिथियों द्वारा सम्मान किया गया।
03. दीपक चांवरिया – युवा – विद्यार्थियों के लिये सैंकड़ो परिवारों तक योग व प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति पर कार्य करने पर युवा योग साधक के रूप में सम्मान प्रतीक व श्रीफल देकर मंचस्थ अतिथियों द्वारा सम्मान किया गया।
कार्यक्रम में राजकीय नेत्रहीन छात्रावासित उच्च माध्यमिक विद्यालय, पटेल नगर -बीकानेर के
मुकेश, महेन्द्र, राहुल, घनश्याम, त्रिलोक आदि विद्यार्थियों ने भाग लिया। साथ ही मुकेश ने पर्यावरण बचाव के लिये एक प्रेरणादायक कविता का वाचन किया।
कार्यक्रम के अंत मे केंद्र डॉ. विमलकुमार नंदीवाल ने सभी का आभार वक्त किया। कार्यक्रम का संचालन आरती जांगिड़ ने किया।

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