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व्यापारिक संगठनों से विचार विमर्श किए बगैर ही जारी कर दिया वाणिज्य कर विभाग के पुनर्गठन का आदेश

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– बीकानेर के कारोबारियों ने सीएम को पत्र भेजकर दर्ज करवाई आपत्ति

– कहा सीएम पुनर्गठन की प्रक्रिया में करें संशोधन

बीकानेर। सीएम अशोक गहलोत ने बजट घोषणा के अन्तर्गत घोषित की थी कि वाणिज्य कर विभाग (स्टेट जीएसटी) का ‘पुनर्गठन’ करदाताओं को राहत पहुंचाने एवं टेक्स चोरी को रोकने के उद्देश्य से किया जाएगा। सीएम की इस घोषणा से जीएसटी की जटिलता से पीड़ित करदाता व्यापारियों में आशा का संचार हुआ था, लेकिन उच्च स्तरीय अधिकारियों द्वारा जल्दबाजी में एकतरफा कार्रवाई करते हुए बिना व्यापारिक संगठनों से विचार विमर्श किए वित्त विभाग द्वारा इसी साल 24 सितम्बर को विभाग के पुनर्गठन का आदेश जारी कर दिया गया।

बीकानेर के कारोबारियों का कहना है कि इन आदेशों को देखते हुए यह आभास होता है कि विभाग के उच्च अधिकारियों ने जयपुर स्थित विभागीय अधिकारियों के साथ मिल बैठकर राज्य भर में फैले व्यापारियों के हितों को नजरअन्दाज करते हुए विभागीय शक्तियों को विकेन्द्रीकृत करने के बजाय पुनर्गठन द्वारा जयपुर स्तर का केन्द्रीयकरण कर दिया है। जबकि पुनर्गठन की सीएम की घोषणा से व्यापारी वर्ग में यह आशा थी कि अधिकारियों की शक्तियों का विकेन्द्रीकरण होगा तथा करदाता के हितों की रक्षा की जाएगी।

इस संबंध में बीकानेर व्यापार एसोसिएशन ने सीएम को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति दर्ज करवाई है। इसमें एसोसिएशन के संयोजक सुरेन्द्र पटवा व बीकानेर पापड़ भुजिया मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष वेद प्रकाश अग्रवाल ने आग्रह किया है कि वे इस ‘पुनर्गठन’ के संबंध में व्यक्तिगत रूचि, संज्ञान, विस्तृत जानकारी लेकर ही इसे लागू करें। साथ ही इस संबंध में यह प्रश्न भी विचारणीय है कि (1) क्या आदेश को लागू करते हुए राज्य के व्यापारिक संगठनों से चर्चा की गई? (2) व्यापारियों की लम्बित मांगों का ध्यान रखा गया? (3) पुनर्गठन से उत्पन्न परिस्थितियों पर विचार विमर्श किया गया क्या ? (4) क्या इसको लागू करने से पूर्व राज्य के टैक्स बार संगठनों से चर्चा की गई? जबकि केन्द्र में ‘पुनर्गठन’ के आदेश को जारी करने से पूर्व एक विधिवत विस्तृत तार्किक प्रक्रिया अपनाई गई। समस्त संगठनों से विचार विमर्श कर व्यवहारिक रूप से व्यापारियों, राजस्व के हितों में विस्तृत आदेश जारी किया गया। खेदजनक बात है कि राजस्थान में इस तरह की कोई प्रक्रिया अमल में नहीं ली जाकर एकतरफा आदेश जारी किया गया हैं अतः आग्रह है कि पुनर्गठन के आदेश एवं नवीन संरचना में जाकर सहज प्रकट हो रही कमियों में “इज ऑफ डूईंग बिजनेस, विकेन्द्रीकरण की मूल अवधारणा के अलोक में न्यायसंगत, तार्किक एवं उचित संशोधन व सुधार किए जाएं। बिजनस ऑडिट को विकेन्द्रीकृत करवा तथा राज्य के करदाता संख्या के अनुपात में कैडर का तार्किक विस्तार करना जिसमें जोन स्तर पर पृथक से व्यवस्था हो ताकि सम्बन्धित अधिकारियों के पास कार्य क्षमता से अधिक कार्य भार नहीं हो और व्यापारियों से जुड़े विभागीय कार्यों में अनावश्यक विलम्ब न हो तथा व्यापारियों के व्यापक हित नकारात्मक रूप से प्रभावित न हो। (2) विभाग में ऑडिट कार्य और राजस्व प्रशासन कार्य को पृथक करके दोनों का पृथक पद्सोपान स्थापित करना ताकि दोनों अलग-अलग विशेषज्ञकार सही सम्पादित हो।

व्यापारी काटते रहेंगे जयपुर के चक्कर उन्होंने बताया कि इस पुनर्गठन में ऑडिट विंग का पूर्ण केन्द्रीयकरण कर मुख्यालय जयपुर कर दिया गया है जो कि व्यापारियों के हितों के प्रतिकूल है। इस कारण से राज्य भर के व्यापारी अपना मूल रिकॉर्ड लेकर जयपुर स्थित मुख्यालय पर चक्कर काटते रहेंगे जो कि “इज ऑफ डूईंग बिजनस की अवधारणा के पूर्ण खिलाफ है। पुनर्गठन से पूर्व भी प्रत्येक जोन में बिजनस ऑडिट का मुख्यालय था एवं विभागीय अधिकारियों की पर्याप्त संख्या थी। किन्तु इस पुनर्गठन में उस संस्था को बढ़ाने की बजाय घटा दिया है। जिससे ऑडिट में छंटनी होने वाले व्यापारियों के विरूद्ध आनन-फानन में गैर विधिक, गैर तार्किक फैसले होने की सम्भावना बढ़ जाएगी। केन्द्रीय पंजीयन इकाई के स्थान पर जोन स्तर पर पंजीयन की पृथक संस्था स्थापित करना जिसमें पर्याप्त मानव संसाधन हो। विदित हो कि इस पुनर्गठन आदेश में पंजीयन का कार्य आउट सोर्सिंग के माध्यम से जयपुर स्थित मुख्यालय से करवाने का निर्णय व्यापारियों, टैक्स बार के लिए अव्यवहारिक है। पंजीयन में कठिनाई आने पर व्यापारी और उसके अधिवक्ता को जयपुर सम्पर्क करना पड़ेगा, जाना पड़ेगा, यही नहीं व्यापारी से सम्बन्धित ट्रेड सिक्रेट भी लीक होंगे। अतः पंजीयन में समय व खर्चा भी अधिक लगेगा।

ये दिए सुझाव

पुनर्गठन में पूर्व में गठित जोनल संभागीय एन्टी इवेजन इकाईयों को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का निर्णय स्वागत योग्य है। पुनर्गठन में टेक्स पेयर्स केयर यूनिट का गठन का प्रस्ताव भी स्वागत योग्य है। इसको और अधिक उपयोग बनाये जाने की आवश्यकता है इस यूनिट का संभागीय स्तर पर विस्तार किया जाना चाहिए इसमें व्यापारिक संगठनों एवंम् अधिवक्ताओं को प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए।

उन्होंने सीएम से यह भी आग्रह किया है कि पुनर्गठन को पूर्ण रूप से लागू करने से पूर्व संभाग स्तरीय व्यापारिक संगठनों, चार्टर्ड एकाउन्टेंटस एवं जी.एस.टी. संबंधी अधिवक्ताओं के संगठनों से विचार विमर्श किया जाए तथा अधिकारियों की शक्तियों का विकेन्द्रीकरण किया जाए तथा इस तरह का माहौल पैदा किया जाय कि करदाताओं को अनावश्यक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े। कारोबारियों ने सीएम से बड़ी उम्मीद जताते हुए मांग है कि उनके द्वारा बताए गए बिन्दुओं को ध्यान में रखते हुए पुनर्गठन की प्रक्रिया में आवश्यक सुधार कर संशोधन किए जाए । बता दें कि सीएम ने बजट में घोषणा कि थी कि “जी.एस.टी. लागू होने पर आ रही अड़चनों को दूर करने एवं व्यापारियों की सुविधाओं की दृष्टि से वाणिज्यिक कर विभाग का समग्र पुनर्गठन किया जाएगा तथा जी.एस.टी. ऑडिट और एंटीएवेजन कार्य को सुदृढ़ीकरण के लिए वित्त विभाग में ऑडिट प्राधिकरण एवं बिज़नस इंटेजिलेंस यूनिट का गठन किया जाएगा।”

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