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रीको ने करणी औद्योगिक क्षेत्र में ईसी के बगैर ही आवंटित कर दिए थे भूखंड

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– सरकारी महकमें दे रहे हैं नोटिस पर नोटिस

बीकानेर। बीकानेर के करणी औद्योगिक क्षेत्र (विेस्तार) में रीको ने उद्योग लगाने को लेकर भूखंडों का आवंटन बगैर एनवायरमेंट क्लीयरेंस (ईसी) के ही कर दिया। रीको बीकानेर ने अप्रेल से दिसम्बर 2012 के दौरान बीकानेर करणी औद्योगिक क्षेत्र विस्तार परियोजना में करीब 7 फूड इकाई स्थापित करने को लेकर 2 लाख 20 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में भूखंड आवंटित कर दिए। यह आवंटन भारत सरकार के पर्यावरण विभाग से 19 अगस्त 2010 को जारी आदेश की अवहेलना है। इसके लिए पर्यावरण विभाग जयपुर ने करीब 5 साल बाद यानि 11 अप्रेल 2017 को रीको बीकानेर को पर्यावरण स्वीकृति (ईसी) जारी की, लेकिन रीको बीकानेर द्वारा पिछले 54 माह बीत जाने के बाद भी इसकी अनुपालना नहीं की जा रही है। यह हम नहीं विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा रीको बीकानेर को दिए नोटिस कह रहे हैं। इन सबके बावजूद रीको जयपुर व क्षेत्रीय कार्यालय बीकानेर ने सभी नियम कानूनों को ताक में रखते हुए फरवरी 2014 में आवंटित भूखंडों पर खाद्य इकाईयों को स्थापित करने के लिए बिल्डिंग निर्माण, बिजली, पानी, ट्यूबवैल कनेक्शन के लिए अनुमति जारी कर दी।

जनसुनवाई में कारोबारी संगठनों को नहीं बुलाया

एक बात और रीको बीकानेर द्वारा इस औद्योगिक क्षेत्र के संदर्भ में ईसी प्राप्त करने के लिए जयपुर स्थित पर्यावरण विभाग को 21 मई 2014 को आवेदन पत्र प्रस्तुत किया गया। यानि साल 2012 में भूखंड आवंटित कर दिए और ईसी के लिए आवेदन 2014 में किया जबकि नियमानुसार आवेदन से पहले ईसी लेनी चाहिए थी। इस पूरे प्रकरण में सबसे शर्मनाक बात तो यह सामने आई कि रीको बीकानेर ने ईसी प्राप्त करने के लिए 27 अप्रेल 2016 को बीछवाल औद्योगिक क्षेत्र में जनसुनवाई का कार्यक्रम रखा। सूत्रों के मुताबिक इस जनसुनवाई में भारत सरकार द्वारा 1 सितम्बर 2009 को जारी गजट नोटिफिकेशन में जनसुनवाई प्रक्रिया की पालना नहीं की गई जो जांच का विषय है। क्योंकि रीको ने बीकानेर वाटर एन्वायरों फाउंडेशन, करणी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, बीछवाल औद्योगिक संघ तथा भूखंड आवंटियों को जनसुनवाई की सूचना नहीं दी। इससे जाहिर होता है कि यह जनसुनवाई पूर्व नियोजित योजना के तहत संचालित की गई थी।

मिले नोटिस पर नोटिस

इस पूरे प्रकरण में सबसे हैरान करने वाली बात यह भी सामने आई कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के बीकानेर कार्यालय ने करणी औद्योगिक क्षेत्र विस्तार परियोजना का 25 जून 2020 को निरीक्षण किया और 2 सितम्बर 2020 को रीको बीकानेर को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। वहीं 22 सितम्बर 2020 को भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परितर्वन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय लखनऊ द्वारा करणी क्षेत्र प्रोजेक्ट के संदर्भ में रीको बीकानेर को एक पत्र भी जारी किया गया। इसी क्रम में प्रदूषण मण्डल जयपुर ने 5 अक्टूबर 2020 को रीको बीकानेर को नोटिस जारी किया गया। फिर 24 नवम्बर 2020 को भारत सरकार के ही पर्यावरण मंत्रालय नई दिल्ली ने बीकानेर के इस प्रोजेक्ट को लेकर जयपुर स्थित उद्योग भवन में संचालित एसईआईएए राजस्थान के मेम्बर सेक्ररेटरी को पत्र भेजा गया। इन सभी के बाद इसी साल 13 जुलाई को राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मण्डल की चैयरपर्सन आईएएस वीनू गुप्ता ने रीको जयपुर के सचिव ( इंडस्ट्रीज एंड मैनेजिंग डायरेक्टर) को अद्र्धशासकीय पत्र लिखना पड़ा। इसके ठीक एक माह बाद 13 अगस्त 2021 को बीकानेर के करणी प्रोजेक्ट के संदर्भ में जरूरी कार्रवाई करने को लेकर प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड जयपुर ने देश प्रदेश के संबंधित करीब आधा दर्जन विभागों को पत्र जारी किए गए। फिर भी रीको बीकानेर के कानों पर जू तक नहीं रेंग रही है।

इनका कहना है-
यदि प्राइवेट डवलपर ईसी की अवहेलना करता तो सरकार तुरन्त एक्शन लेती जैसा जयपुर में जेडीए के मंगलम प्रोजेक्ट के ईसी की अवहेलना पर सीज करने की कार्रवाई की, लेकिन रीको सरकारी एजेंसी है इसलिए सरकार कोई कार्रवाई नहीं कर रही। रीको आम पब्लिक के साथ धोखाधड़ी कर रहा है। हमने पर्यावरण मंत्रालय को 11 अप्रेल 2017 की ईसी को निरस्त करने के लिए लिखा है। सरकार इस मामले में तत्काल कार्रवाई करें।
– नारायण दास तुलसानी, नगद नारायण एग्रो फूड्स प्रा लि, बीछवाल औद्योगिक क्षेत्र

करणी औद्योगिक क्षेत्र विस्तार परियोजना मामला पूरी तरह से उलझा हुआ है। जनसुनवाई तक में बुलाया नहीं। अब पूरे मामले में सरकार को ही हस्तक्षेप करना होगा।
– महेश कोठारी, अध्यक्ष, करणी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, बीकानेर

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