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जोधपुर, बीकानेर और जैसलमेर में चार जगह बनेंगे ‘एस्कैप रिजर्वायर्स’

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जलदाय मंत्री कल्ला की अध्यक्षता में आरडब्ल्यूएसएसएमबी की नीति निर्धारण समिति की बैठक

आईजीएनपी क्षेत्र में 1274.26 करोड़ की लागत से 4 ‘एस्कैप रिजर्वायर्स‘ के प्रस्ताव को मिली मंजूरी

जयपुर, 29 अक्टूबर। जलदाय मंत्री डॉ. बी. डी. कल्ला की अध्यक्षता में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के तहत राजस्थान वाटर सप्लाई एवं सीवरेज मैनेजमेंट बोर्ड (आरडब्ल्यूएसएसएमबी) की नीति निर्धारण समिति (पीपीसी) की 206वीं बैठक शुक्रवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग (वीसी) के माध्यम से आयोजित की गई।

डॉ. कल्ला ने बैठक में प्रदेश में जल जीवन मिशन (जेजेएम) के तहत मेजर प्रोजेक्ट्स तथा रेग्यूलर विंग में 3826 गांवों में 7 लाख 37 हजार 644 ‘हर घर नल कनेक्शन‘ देने के एजेंडा प्रस्तावों का अनुमोदन किया गया, इन पर 8354 करोड़ रुपये से अधिक की राशि व्यय की जाएगी। इसमें 27 वृहद पेयजल परियोजनाओं के तहत 9 जिलों बाड़मेर, राजसमंद, जैसलमेर, जालोर, झालावाड़, जोधपुर, कोटा, नागौर एवं बारां के 3 हजार 794 गांवों में 8264 करोड़ रुपये की राशि से 7 लाख 27 हजार 394 ‘हर घर नल कनेक्शन‘ दिए जाएंगे। इसी प्रकार रेग्यूलर विंग में 4 जिलों जैसलमेर, दौसा, बांसवाड़ा एवं सवाईमाधोपुर के 42 गांवों में 12 सिंगल एवं मल्टी विलेज ग्रामीण पेयजल योजनाओं के तहत 12 हजार 260 ‘हर घर नल कनेक्शन‘ के लिए कुल लागत 96.62 करोड़ रुपये के प्रस्तावों का अनुमोदन किया गया।

बैठक में जलदाय मंत्री ने आईजीएनपी क्षेत्र में चार एस्कैप रिजर्वायर्स के निर्माण के लिए 1274.26 करोड़ रुपये की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी। ये एस्कैप रिजर्वायर्स बीकानेर जिले में सत्तासर के पास 507 आरडी और गजनेर लिफ्ट परियोजना के समीप 750 आरडी तथा जैसलमेर में 1352 आरडी तथा जोधपुर में 1121 आरडी के पास बनाए जाएंगे। इन एस्कैप रिजवायर्स के बनने से जल जीवन मिशन के तहत 43 वृहद पेयजल परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त पानी की उपलब्ध हो सकेगा। इससे क्षेत्र के 6 हजार 707 गांवों में 20 लाख 87 हजार से अधिक परिवारों को फायदा होगा। वर्तमान में आईजीएनपी सिस्टम में जलदाय विभाग को पेयजल के लिए 1031 क्यूसेक पानी आवंटित है, जबकि आवश्यकता 1100 क्यूसेक पानी की और है। आईजीएनपी क्षेत्र में बनने वाले इन रिजर्वायर्स में जलदाय विभाग द्वारा आईजीएनपी मुख्य नहर में वर्षा के सीजन में बहने वाले सरप्लस वाटर में से करीब 300 क्यूसेक अतिरिक्त पानी का स्टोरेज किया जा सकेगा। इन रिजर्वायर्स का निर्माण जल संसाधन विभाग द्वारा डिपॉजिट वर्क के रूप में कराया जाएगा। डॉ. कल्ला ने बैठक में जलदाय विभाग के अधिकारियों को जल संसाधन विभाग के साथ समन्वय एवं फोलो अप करते हुए रिजर्वायर्स के कार्य को जल्द शुरू कराने के निर्देश दिए।

जलदाय मंत्री ने बैठक में मुख्यमंत्री की बजट घोषणा के तहत जालौर जिले में भीनमाल जलप्रदाय योजना के लिए 50.97 करोड़ रुपये, बाड़मेर शहरी जल प्रदाय योजना की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति के लिए 13.09 करोड़ रुपये, जयपुर में शाहपुरा की शहरी जल प्रदाय योजना की प्रशासनिक स्वीकृति के लिए 21.20 करोड़ रुपये तथा जयपुर में ही विराटनगर की शहरी जल प्रदाय योजना की प्रशासनिक स्वीकृति के लिए 16.80 करोड़ रुपये के प्रस्तावों का अनुमोदन किया। इसके अलावा अलवर में थानागाजी की शहरी जल प्रदाय योजना के कन्वर्जन के लिए 21.86 करोड़ रुपये तथा जयपुर में झोंटवाड़ा स्थित उद्योग नगर में जलप्रदाय योजना के तहत ईएसआर एवं पाइपलाइन के कार्यों की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति के लिए 1032.41 लाख रुपये आदि प्रस्तावों का भी अनुमोदन किया। साथ ही प्रदेश में जेजेएम की सपोर्ट गतिविधियों के तहत वर्ष 2021-2022 की वार्षिक कार्ययोजना के लिए 297.54 करोड़ रुपये की राशि के प्रस्ताव पर भी अनुमोदन किया गया।

जलदाय मंत्री डॉ. कल्ला ने बैठक की शुरूआत में पीपीसी की गत बैठकों में लिए गए निर्णयों की एजेंडावार विस्तृत समीक्षा करते हुए अधिकारियों से प्रगति के बारे में जानकारी लीं और इनकी समयबद्ध पालना के लिए अधिकारियों को सख्त दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जेजेएम के सभी कार्यों को 2024 तक निर्धारित टाइमलाइन में पूरा कर ग्रामीण परिवारों को लक्ष्य के अनुरूप ‘हर घर नल कनेक्शन‘ देना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, अतः इससे सम्बंधित सभी प्रस्ताव एवं तकनीक प्रक्रियाओं को ‘फुल प्रुफ‘ बनाए ताकि आगे किसी भी स्तर पर इनके निष्पादन में विलम्ब नहीं हो। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जेजेएम एवं बजट घोषणाओं सहित राज्य के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में स्वीकृत परियोजनाओं के कार्यों में किसी भी स्तर प्रक्रियाओं के निष्पादन में अनावश्यक विलम्ब नहीं हो, इसके लिए सख्त मॉनिटरिंग की जाए, यदि किसी स्तर पर कोताही पाई जाए तो सम्बंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाए।

बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) सुधांश पंत ने अधिकारियों को जेजेएम एवं अन्य पेयजल परियोजनाओं में पूर्ण क्षमता से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजनाओं के माध्यम से लोगों को निर्धारित मात्रा में गुणवत्ता युक्त पेयजल समय पर उपलब्ध हो, इसके लिए अधिकारी कड़ी मेहनत करे। उन्होंने वीसी से जुड़े अन्य विभागों के अधिकारियों का आभार व्यक्त किया।

उल्लेखनीय है कि जलदाय मंत्री की अध्यक्षता में गत 14 फरवरी को आयोजित पीपीसी की 203 वीं बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि अब ये बैठक हर तीन माह में एक बार आयोजित की जाएगी। इसके बाद 204वीं बैठक मई माह में, 205वीं बैठक अगस्त माह में और अब 206 वीं बैठक अक्टूबर माह में आज शुक्रवार को आयोजित हुई है।

बैठक में वीसी के माध्यम से जल जीवन मिशन के मिशन निदेशक डॉ. पृथ्वीराज, मुख्य अभियंता (शहरी एवं एनआरडब्ल्यू) सीएम चौहान, मुख्य अभियंता (विशेष प्रोजेक्ट्स), दलीप कुमार गौड़, मुख्य अभियंता (जेजेएम) दिनेश गोयल, मुख्य अभियंता (तकनीकी) एवं आरडब्ल्यूएसएसएमबी के तकनीकी सदस्य संदीप शर्मा, मुख्य अभियंता (जोधपुर) नीरज माथुर, सचिव, संयुक्त सचिव (वित्त) हरीश कुमार जुनेजा, संयुक्त सचिव, आयोजना डीसी जैन, मुख्य अभियंता-जल संसाधन असीम मार्कण्डेय तथा वित्तीय सलाहकार एवं चीफ एकाउंट ऑफिसर केसी कुमावत ने भाग लिया। आरडब्ल्यूएसएसएमबी के सचिव केडी गुप्ता ने बैठक की कार्यवाही का संचालन किया। सम्बंधित मुख्य अभियंताओं ने एजेंडा के बारे में अपना प्रस्तुतीकरण दिया।

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