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आधी नगद-आधी उधार ; ये कैसी है बोनस की सौग़ात

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_सवाल:-जीपीएफ में जमा आधा बोनस क्या कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ा पाएगा? क्या आधे नगद बोनस में छोटू -मोटू व चिंकी दिवाली का त्यौहार मना पाएंगे ? इतने में तो एक बालक की ड्रेस ही आएगी साहब!_

जयपुर। तदर्थ बोनस राशि 6774 के नगद भुगतान के बजाय 50% राशि जीपीएफ व जीपीएफ 2004 खाते में जमा करने की सौगात को लेकर राज्य के तकरीब 6 लाख कार्मिको व शिक्षको में नारजगी बढ़ती जा रही है।

राजस्थान शिक्षक संघ(राष्ट्रीय) के प्रदेश महामंत्री अरविंद व्यास ने कहा कि विगत वर्षों से लगातार मिलते आ रहे बोनस में गत सत्र में 75 प्रतिशत व इस सत्र में 50 प्रतिशत की राशि जीपीएफ में जमा करने की घोषणा की। ऐसे में गत वर्ष चौथाई व इस वर्ष आधे बोनस से कर्मचारियों के बच्चों को दिवाली मना पाना दूभर हो गया है।व्यास ने कहा कि बोनस संदाय अधिनियम 1965 व समय समय पर हुए संशोधित अधिनियम की मंशा के अनुसार बोनस एक मौद्रिक पुरस्कार है, जो किसी कर्मचारी को अपने नियोक्ता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के लिए दिया जाता है । बोनस का प्राथमिक लक्ष्य अपने कर्मचारियों द्वारा अपने महत्वपूर्ण लक्ष्यों को प्राप्त करने में किये गए कार्यो पर बोनस का भुगतान कर धन्यवाद ज्ञापित करना है। ताकि बोनस मुआवजे से कर्मचारीयों के मनोबल,प्रेरणा और उत्पादकता को बढ़ावा मिल सके। जो आगामी उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित कर सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या एक उपहार स्वरूप दी जा रही राशि में से आधी राशि जीपीएफ खाते में जमा करने से कर्मचारियों के मनोबल को बढाया जा सकेगा? विचारणीय है।

संगठन के अतिरिक्त प्रदेश महामंत्री रवि आचार्य ने बताया कि संगठन ने राजस्थान सरकार के मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर जीपीएफ में जमा किये जा रहे 50 प्रतिशत सहित एकमुश्त 6774 रुपये बोनस का नगद भुगतान करने के साथ ही राज्य में न्यू पेंशन स्कीम के तहत कार्यरत कार्मिकों व शिक्षकों को जिनकी नियुक्त 2004 के बाद हुई है। उनके बढ़े डीए की राशि के नगद भुगतान करने की मांग की।
संगठन के प्रदेशाध्यक्ष सम्पतसिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने एकमुश्त बोनस नगद दिया है। किंतु राजस्थान में गत वर्ष में 25 प्रतिशत व इस वर्ष 50 प्रतिशत बोनस नगद दिया जा रहा है।कर्मचारियों द्वारा सत्र पर्यन्त अच्छे कार्यो की एवज में उपहार स्वरूप दिए जा रहे बोनस में से 50 प्रतिशत जीपीएफ में जमा करना सेवानिवृत्ति पर मिलने वाली उधार बख्शीश देने के समान अन्यायपूर्ण प्रथा है।

संगठन के प्रदेश संगठन मंत्री प्रहलाद शर्मा ने कहा कि कभी छुट्टियां ,तो कभी वेतन, डीए , एरियर, नगद बोनस राशि भुगतान करने के परम्परागत आदेशो में, न्याय के प्राकृत सिद्धान्त के विपरीत फेरबदल कर नई-नई प्रथा बनाना शिक्षकों व कर्मिकों के साथ धोखा करने के समक्ष है।
संगठन के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष नवीन शर्मा व प्रदेश संयुक्त मंत्री सुरेश व्यास ने बताया कि बोनस राशि 6774 रुपये मे से 10 प्रतिशत आयकर कटौती के बाद शेष रहे 6096 रु के 50 प्रतिशत राशि 3048 रुपए नगद बोनस से तो एक बालक की एक ड्रेस ही आ पाएगी।

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