मंडी शुल्क समाप्त नहीं किया तो खत्म हो जाएंगे कृषि आधारित उद्योग

  • सरकार नहीं मानी तो बेबस उद्यमी सीएम को सौंप देंगे उद्योगों की चाबी
  • मंदी के दौर में कारोबारियों पर गंभीर कुठाराघात
  • नए उद्योगों का 100 फीसदी छूट का उपहार, पुरानों को मार

बीकानेर। प्रदेषभर में मंडी शुल्क को समाप्त करने की आवाज उठने लगी है। कारोबारियों का कहना है कि यदि सरकार ने मंडी शुल्क को समाप्त नहीं किया तो प्रदेषभर में कृषि आधारित उद्योग खत्म हो जाएंगे। मंदी के इस दौर में इन कारोबारियों पर पिछले 15 साल का मंडी शुल्क वसूल करना उनके हितों पर जबरदस्त कुठाराघात होगा। ऐसे में यदि सरकार ने गंभीरता नहीं दिखाई तो निष्चित है कि राज्य के आर्थिक हालात वेंटिलेटर पर आ जाएंगे। मंडी शुल्क को लेकर बीकानेर जिला उद्योग संघ परिसर में दाल मिल्स एसोसिएषन सहित फूड इंडस्ट्री से जुड़े औद्योगिक संगठनों ने पत्रकार वार्ता रखी। बीकानेर दाल मिल्स एसोसिएषन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष जयकिषन अग्रवाल ने पत्रकारों से कहा कि यदि सरकार नहीं मानी तो हमें मजबूरन अपने उद्योगों की चाबी सीएम को सौंपनी पड़ेगी। इस मुद्दे को लेकर 15 मार्च को प्रदेषभर के उद्यमी व मंडी कारोबारी सीएम से मिलेंगे। उन्होंने बताया कि 26 अप्रेल 2005 के बाद कृषि प्रसंस्करण प्रयोजनार्थ राज्य के बाहर से आयातित कृषि जिन्सों के तहत दी छूट समाप्त होने से यहां की औद्योगिक इकाईयां संकट ग्रस्त होने के कारण सरकार का ध्यान इस ओर दिला चुकी हैं। अग्रवाल ने बताया कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग कच्चे माल के लिए कृषि उपज पर निर्भर करते हैं। जब कभी भी हमें कृषि उपज की खरीद यदि राज्य के कृषि उपज मंडी प्रांगण से करनी होती है तो हम मंडी शुल्क चुकाते आए हैं। हमारी समस्या उस अवैध वसूली से है जो हमें अपनी उस खरीद पर मंडी शुल्क का दायित्व सरकार बनाती है जो राज्य के बाहर से अपना उद्योग चलाने के लिए मंगवाया जाता है। जिस राज्य से यह खरीद हुई है, उसी राज्य में पूर्व में उस राज्य का मंडी शुल्क चुकाना पड़ता है। हमारी सरकार से लम्बे समय से यही मांग रही कि राज्य के बाहर से आने वाले कच्चे माल पर किसी भी तरह का मंडी शुल्क लेना न्याय संगत नहीं है। साथ ही राज्य के औद्योगिक विकास में बहुत बड़ी बाधा है इसलिए इस पर गंभीरता से विचार किया जाना आवष्यक है। इस पर सरकार द्वारा हाल ही में 28 फरवरी को एक आदेष जारी कर 27 अप्रेल 2005 से 31 दिसम्बर 2019 तक कृषि प्रसंस्करण प्रयोजनार्थ राज्य के बाहर से आयातित कृषि जिन्सों व चीनी पर बकाया मंडी शुल्क माफी योजना पर 50 प्रतिषत कर के साथ ब्याज व शास्ति की छूट प्रदान की है। जो कि वर्तमान समय में चल रहे भंयकर मंदी के दौर में पर्याप्त नहीं है। ऐसे में राज्य के औद्योगिक इकाईयों द्वारा इतने लम्बे समय का मंडी कर चुकाना संभव नहीं है। साथ ही 1 जनवरी 2020 से वापस बाहर से आयातित कच्चे माल पर 1.60 प्रतिषत मंडी शुल्क वसूल करने के भी आदेष जारी किए गए है, जो कि न्यायसंगत नहीं है।

सरकार मान रही है कि सही नहीं है औद्योगिक माहौल

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने स्वयं माना कि राज्य का औद्योगिक माहौल सही नहीं है, लेकिन इसके कारणों पर उचित ध्यान नहीं दिया गया कि पूर्व स्थापित उद्योग किन-किन समस्याओं से जूझ रहे हैं व उनका निराकरण किस प्रकार किया जाए। सरकार द्वारा प्रदेष के औद्योगिक माहौल के सुधार को लेकर केवल नए उद्योगों के लिए राज्य निवेष प्रोत्साहन योजना (आरआईपीएस) 2019 जारी की है जिसके तहत नवस्थापित उद्योगों के लिए मंडी शुल्क में 100 प्रतिषत छूट के साथ विभिन्न प्रकार की छूटों की घोषणा की गई है, लेकिन पुराने उद्योगों के लिए किसी प्रकार की छूट न देकर 1 जनवरी 2020 से पूर्ण मंडी शुल्क की वसूली पुराने स्थापित उद्योगों को समाप्त करने का कदम है। क्योंकि प्रतिस्पद्र्धा के इस दौर में अब तक यहां के उद्योग पड़ौसी राज्योें के उद्योगों से ही प्रतिस्पद्र्धा कर रहे थे, लेकिन अब राज्य के नवस्थापित उद्योगों से भी कड़ी प्रतिस्पद्र्धा का सामना करना होगाा, जिससे पुराने स्थापित उद्योगों का अस्तित्व संकट में आ जाएगा।

यह करें सरकार

अग्रवाल ने बताया कि हम राज्य सरकार से मांग करते है कि सरकार को भूतलक्षी प्रभाव से 27 अप्रेल 2005 के बाद कृषि आधारित उद्योगों द्वारा आयातित कच्चे माल पर पूर्ण छूट प्रदान की जाए, साथ ही आरआईपीएस 2019 में नवस्थापित उद्योगों के समान पुराने स्थापित उद्योगों के लिए भी मंडी शुल्क में ज्यादा से ज्यादा छूट दी जाए, ताकि वे पुराने स्थापित उद्योग भी अपना उत्पादन कार्य निरन्त जारी रखते हुए अपने अस्तित्व को बचाए रख सके। यदि राज्य सरकार हमारी इस मांग पर विचार नहीं करती है तो हमें अपनी इकाईयों में उत्पादन कार्य बंद करते हुए उद्योगों की चाबियां सीएम को सौंपने को विवष होना पड़ेगा। पत्रकार वार्ता में बीकानेर जिला उद्योग संघ के अध्यक्ष डी.पी. पचीसिया, बीकानेर दाल मिल्स एसोसिएषन के अध्यक्ष नृसिंहदास मिमानी, गोविन्द ग्रोवर, आॅल इंडिया दाल मिल्स एसोसिएषन के सचिव राजकुमार पचीसिया, आॅल इंडिया दाल मिल्स एसोसिएषन के विषेष आमंत्रित सदस्य व मोहन उद्योग के अषोक वासवानी, बच्चुभाई दाल मिल के प्रमुख मनोज अग्रवाल, मां अन्नपूर्णा इंडस्ट्रीज के प्रमुख सुरेष राठी, रसरसना के प्रमुख गणेष बोथरा सहित बड़ी संख्या में उद्यमी मौजूद थे।

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