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स्कूल शिक्षा विभाग में गबन का जाल

रिश्तेदारों-परिचितों के खातों में ट्रांसफर हुई सरकारी राशि

बीकानेर । राजस्थान स्कूल शिक्षा विभाग में चोरी और गबन के मामलों ने गंभीर रूप ले लिया है। जांच में खुलासा हुआ है कि विभाग के अधीनस्थ कार्यालयों में कार्यरत कुछ संविदा कर्मियों ने सुनियोजित तरीके से फर्जी सेवानिवृत्ति आदेश और उपार्जित अवकाश की स्वीकृतियां जारी कर सरकारी खजाने में सेंध लगाई।
सूत्रों के अनुसार, आरोपित संविदा कर्मियों ने पे-मैनेजर सिस्टम का दुरुपयोग करते हुए अवैध रूप से राशि आहरित की और उसे न केवल अपने बैंक खातों में बल्कि अपने रिश्तेदारों और करीबी परिचितों के खातों में भी जमा करवा दिया। इस पूरे फर्जीवाड़े में विभागीय नियंत्रण और निगरानी की बड़ी चूक सामने आई है।


लगातार बढ़ते ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए शासन ने सभी विभागों को सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सेवानिवृत्ति, उपार्जित अवकाश, भुगतान स्वीकृति जैसे अत्यंत संवेदनशील वित्तीय कार्य अब केवल नियमित एवं विश्वस्त कार्मिकों के माध्यम से ही कराए जाएंगे।


सरकार ने आहरण एवं वितरण अधिकारियों (DDO) को भी चेताया है कि वे अपने लॉग-इन, पासवर्ड और ओटीपी किसी भी अन्य कार्मिक से साझा न करें। सेवानिवृत्ति लाभों से जुड़े प्रत्येक प्रकरण में पूर्ण जांच-पड़ताल के बाद ही राशि आहरित करने के निर्देश दिए गए हैं।


इसके अलावा, चोरी और गबन के मामलों की रोकथाम के लिए मॉनिटरिंग रिव्यू कमेटी गठित करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। किसी भी प्रकरण के उजागर होने पर तत्काल एफआईआर दर्ज कराने, विभागीय कार्रवाई शुरू करने, दोषियों के बैंक खाते फ्रीज कराने और गबन की गई राशि की वसूली सुनिश्चित करने को कहा गया है। न्यायालय में लंबित मामलों में स्टे वेकेट कराने और जांच शीघ्र पूर्ण करने पर भी जोर दिया गया है।


निदेशालय स्तर पर वित्तीय सलाहकार और मुख्य लेखाधिकारी को अधीनस्थ कार्यालयों की सतत निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। शासन ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी कार्यालय में चोरी या गबन पाया जाता है तो संबंधित आहरण एवं वितरण अधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी।
सरकार के इन सख्त निर्देशों के बाद शिक्षा विभाग में हुए इस बड़े वित्तीय फर्जीवाड़े की परतें खुलने और आने वाले दिनों में और खुलासों की संभावना जताई जा रही है।

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