बीकानेर रेल मंडल में लागू होगा ‘कवच 4.0’, 1775 किमी रेलमार्ग पर बढ़ेगी संरक्षा
बीकानेर। उत्तर पश्चिम रेलवे का बीकानेर रेल मंडल अब संरक्षित रेल संचालन को और मजबूत बनाने के लिए स्वदेशी उच्च तकनीकी प्रणाली ‘कवच 4.0’ का उपयोग करने जा रहा है। मंडल के 1775 किलोमीटर लंबे रेलमार्ग पर यह प्रणाली स्थापित की जाएगी, जिस पर लगभग 800 करोड़ रुपये की लागत आएगी।

उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी शशि किरण ने बताया कि रेलवे के 5561 किलोमीटर रेलमार्ग पर 2300 करोड़ रुपये की लागत से कवच प्रणाली स्वीकृत है। बीकानेर मंडल में इसका कार्य स्वीकृत हो जाने के बाद अब उत्तर पश्चिम रेलवे के सभी मंडलों में कवच लागू होने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
कवच प्रणाली क्या है?
कवच एक स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है, जिसे दुर्घटनाओं को रोकने और गति नियंत्रण हेतु विकसित किया गया है।
इसे सुरक्षा अखंडता स्तर 4 (SIL-4) पर डिजाइन किया गया है, जो सुरक्षा का उच्चतम स्तर है।
इसका विकास 2015 में हुआ और दक्षिण मध्य रेलवे पर सफल परीक्षण के बाद 2018 में इसका पहला परिचालन प्रमाणपत्र मिला।
मई 2025 में उन्नत संस्करण ‘कवच 4.0’ को 160 किमी/घंटा की गति के लिए अनुमोदित किया गया।
कवच प्रणाली की प्रमुख तकनीकी संरचना
RFID टैग: हर 1 किमी और प्रत्येक सिग्नल पर लगाए जाते हैं, जो ट्रेन की स्थिति बताते हैं।
दूरसंचार टावर: पटरियों के साथ हर किलोमीटर पर लगाए जाते हैं, जो लोको कवच और स्टेशन कवच से निरंतर संपर्क बनाए रखते हैं।
लोको कवच: इंजन में स्थापित होकर RFID टैग व सिग्नलिंग प्रणाली से जुड़ता है तथा आपात स्थिति में स्वचालित ब्रेक लगाता है।
स्टेशन कवच: स्टेशन पर लगाया जाता है, जो ट्रेनों की सुरक्षित गति और सिग्नलिंग सुनिश्चित करता है।
ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC): सभी प्रणालियों को जोड़ने हेतु उच्च गति डेटा संचार प्रदान करता है।
सिग्नलिंग प्रणाली: पूरी व्यवस्था को समन्वित करती है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, बीकानेर मंडल में कवच प्रणाली लागू होने से संरक्षा में बड़ा सुधार होगा और दुर्घटनाओं की आशंका न्यूनतम रह जाएगी।

