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बिजली की बचत करने वाले उद्यमियों/संस्थानों को राज्य स्तरीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार

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प्रदेश के उद्यमियों/संस्थानों आदि द्वारा विगत वर्ष में 4 करोड़ से अधिक यूनिट बिजली की बचत : डॉ. कल्ला

बीकानेर/जयपुर, 14 दिसम्बर।
प्रदेश में ऊर्जा के उपलब्ध संसाधनों का किफायती एवं कुशल ढ़ंग से उपयोग कर ऊर्जा की बचत करने वाले उद्यमियों/संस्थानों आदि का ऊर्जा मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला द्वारा आभार व्यक्त किया गया।
विद्युत भवन, जयपुर में आयोजित राज्य स्तरीय 11वें ‘‘राजस्थान ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार’’ वर्चूअल समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित डॉ. बी.डी. कल्ला द्वारा बताया कि ऊर्जा किसी भी देश के सत्त विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हमें ऊर्जा की आपूर्ति को बढ़ाने, उपलब्ध संसाधनों का इष्टत्म और किफायती ढं़ग से उपयोग, ऊर्जा की मांग पर नियन्त्रण, ऊर्जा के गैर परम्परागत स्त्रोतों का अधिकाधिक उपयोग आदि के जरिये ऊर्जा संरक्षण के आयामों पर प्रयास करने होंगे।
ऊर्जा की सुनिश्चित आपूर्ति के लिए विभिन्न ऊर्जा प्रोद्योगिकियों, विशेषतः नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास आवश्यक है। नवीकरणीय ऊर्जा के उपकरणों के उपयोग से गैस उत्सर्जन मे कमी एवं ग्लोबल वार्मिग पर नियंत्रण पाया जाना संभव है।
डा0 बी0 डी0 कल्ला ने यह भी बताया कि राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम द्वारा गैर-परम्परागत ऊर्जा स्त्रोतों से विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में किये जा रहे प्रयास भी सराहनीय है। राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम द्वारा किये गये प्रयासों के फलस्वरूप राज्य में सौर ऊर्जा एवं पवन ऊर्जा का लगभग 10,000 मेगावॉट क्षमता की अक्षय ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की जा चुकी है।
5000 मेगावॉट सौर क्षमता हेतु छज्च्ब् एवं 5000 डॅ सोलर क्षमता हेतु भारत सरकार के सेकी (ैम्ब्प्) से डव्न् विचाराधीन है। डॉ0 कल्ला के अनुसार आगामी 3 वर्षो में 30,000 मेगावॉट अक्षय ऊर्जा परियोजनाएं प्रदेश में स्थापित की जावेंगी, जिनमें से 27000 डॅ क्षमता की परियोजनाएं पाइपलाइन में है। ऊर्जा उन्होंने ने यह भी बताया कि अक्षय ऊर्जा भंडारण तकनीक पर तीव्रगति से काम किया जा रहा है, जिससे अक्षय ऊर्जा से उत्पादित विद्युत को रात्रि के समय भी काम लिया जा सके।
इस समारोह के अध्यक्ष डॉ. सुबोध अग्रवाल, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम द्वारा प्रदेश में ऊर्जा की बचत हेतु राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम द्वारा किए गए प्रयासों के परिणामस्वरूप प्रदेश में की गई बिजली की बचत के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की गई।
डॉ. अग्रवाल के अनुसार ऊर्जा संरक्षण अधिनियम-2001 के अन्तर्गत राज्य में ऊर्जा संरक्षण की गतिविधियों के संचालन हेतु, राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम लिमिटेड ,एक राज्य नामित संस्था है, जो कि राज्य में भारत सरकार के ऊर्जा दक्षता ब्यूरो की नीतियों एवं योजनाओं को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित करने का महत्वपूर्ण कार्य सम्पादित करता है।
ऊर्जा की अत्यधिक खपत करने वाली ओद्योगिक इकाइयों हेतु पैट योजना के अर्न्तगत भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय द्वारा ऊर्जा संरक्षण के लक्ष्य निर्धारित किये जाते हैं। इन लक्ष्यों को इकाइयों द्वारा 3 वर्षों के एक चक्र में प्राप्त करना होता है।प्रथम पैट चक्र वर्ष 2012 से प्रारंभ होकर 2015 में समाप्त हुआ। निर्धारित त्रेवार्षिक लक्ष्यों के प्रथम च्रक में राजस्थान द्वारा 1.67 लाख मीट्रिक टन ऑफ ऑयल इक्वेलैंट की बचत की गई है, जिसके कारण प्रदेश में 2.16 मिलियन टन कार्बन उर्त्सजन में कमी आयी है।
द्वितिय पैट चक्र 2016 से प्रारम्भ होकर 2019 में समाप्त हुआ,जिसकी गणना ऊर्जा दक्षता ब्यूरो के स्तर पर अभी होनी है।
राज्य में अब तक लगभग 10 लाख पच्चास हजार ऊर्जा दक्ष स्ट्रीट लाइट्स एवं घरों में लगभग 1.71 करोड़ एल.ई.डी. बल्ब स्थापित किये गये हैं, जिनके माध्यम से लगभग 456 मिलियन यूनिट बिजली की बचत प्रतिवर्ष की जा रही है, जिसके कारण लगभग 3.5 मिलियन टन कार्बन उर्त्सजन को वातावरण में जाने से रोका गया है।
डॉ. अग्रवाल द्वारा यह भी बताया कि राजस्थान में भवन निर्माण के क्षेत्र में ऊर्जा संरक्षण को सुनिश्नित करने हेतु प्रदेश में मार्च 2011 में जारी ऊर्जा संरक्षण भवन दिशा-निर्देश वर्तमान में प्रभावी हैं। भारत सरकार के ऊर्जा दक्षता ब्यूरों द्वारा इनका नवीनतम वर्जन जून 2017 में जारी किया गया गया है, जिसे राज्य में शीघ्र अधिसूचित किया जाना अपेक्षित है। इससे वाणिज्यिक भवनों में ऊर्जा का अंकेक्षण एवं बचत किया जाना बाध्यकारी होगा।
डॉ0 अग्रवाल के अनुसार प्रदेश में दिसबंर 2019 में जारी की गई ’’ राजस्थान सौर ऊर्जा नीति’’ एवं सौर तथा पवन हायब्रिड नीति जारी होने के उपरांत 27,700 मेगावॉट की अक्षय ऊर्जा परियोजनाएं तथा 2000 क्षमता के अक्षय ऊर्जा उपकरणों के निर्माण के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनसे प्रदेश में लगभग 1,17,000 करोड रूपए का निजी निवेश संभावित है।

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