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बीकानेर/जयपुर। सीएम अशोक गहलोत ने कहा नमस्कार, आज अभी हमारे सभी चीफ मिनिस्टर्स कांग्रेस के इसी वक्त में प्रेस से बात कर रहे हैं, यह फैसला हुआ और मुझे आपसे बात करनी है चाइना के बारे में, जो कुछ भी हो रहा है देश के बॉर्डर पर उसके बारे में। जैसाकि आप सभी को मालूम है कि 2014 के अंदर सरकार बनी थी एनडीए की, 2014 के अंदर जब सरकार बनी थी मोदीजी की पहली बार, तब उन्होंने शुरुआत करी थी पड़ोसी देशों के Heads को बुलाया था। एक अच्छी शुरुआत हुई थी कि ये चाहते हैं कि साउथ एशिया में जो कंट्रीज़ हैं उनके राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री आएं, पाकिस्तान सहित, एक शुरुआत हुई। और अभी क्या कारण रहा कि इतने कम अरसे के अंदर आज तमाम पड़ोसी मुल्क के जो मिजाज़ हैं वो हमारे खिलाफ हो गए? चाहे पाकिस्तान तो है ही पहले से ही, जहां पर मोदी जी गए थे अचानक ही बिना इत्तिला के, किस लिए गए थे, आपको मालूम है। श्रीलंका में, नेपाल जो हिंदू राष्ट्र कहलाता था, आज वो पूरी तरह चाइना के दबाव में है और आज वो भी हमारी जमीन पर कब्ज़ा कर रहा है। तो इस प्रकार से जो पड़ोसी मुल्क की जो सोच थी, ऐसा क्या हुआ कि मोदी जी ने दौरे भी किए पाकिस्तान के भी किए और नेपाल के भी किए, अपनी लोकप्रियता को सबके सामने रखा, दिखाया और सामने भी आ रही थी, फिर क्या कारण है वहां सब मुल्क हमारे खिलाफ हो गए? और चाइना का इतिहास तो आपको मालूम ही है कि शुरु से ही जबसे हम आजाद हुए हैं, 1962 से ही वो जिस रूप में 1962 की वॉर हुई थी उसके बाद में लंबी हिस्ट्री है, चाहे वो 1967 में लड़ाई हुई हो, चाहे जब कभी भी पाकिस्तान के साथ में लड़ाई हुई 1965 की या 1971 की, तब भी पाकिस्तान का साथ दिया चाइना ने। पर आज ये समझ के परे है कि प्रधानमंत्री जी जो जिस प्रकार से रिश्ते रखे हैं चाइना के साथ में, जब वो मुख्यमंत्री थे तब भी 4 बार गए चाइना, प्रधानमंत्री थे तब 5 बार गए और वैसे तो उनकी मुलाकात 18 बार हुई है चाइना के प्रेसीडेंट के साथ में और झूला भी झूले थे, आपको याद है अहमदाबाद के अंदर। झूला झूल रहे थे तब भी वहां झड़पें चल रही थीं बॉर्डर पर, तब नरेंद्र मोदी जी को समझ जाना चाहिए था कि मैं इनको झूले झुलवा रहा हूं यहां पर अहमदाबाद में और वहां पर झड़पें हो रही हैं तो इनकी मंशा क्या है। वो मंशा समझ नहीं पाए, बार-बार जाते रहे चाइना और आज जो कुछ भी बॉर्डर पर हुआ है वो क्या कारण हो सकता है, उसको बताना चाहिए प्रधानमंत्री जी को देश को और जिस रूप में विपक्षी पार्टियों के साथ मीटिंग के दौरान उन्होंने कह दिया कि चाइना हमारी जमीन पर आया ही नहीं है, न हमारी कोई चौकी पर कब्ज़ा है, वो उन्होंने ब्लंडर किया है और पूरे चाइना के अंदर देश के पहले प्रधानमंत्री हैं मोदीजी जिनके वक्तव्य का स्वागत हुआ है। वहां के मीडिया ने भी, चाइना बात की वहां पर, मालूम पड़ा कि यहां की मीडिया में प्रधानमंत्री जी के वक्तव्य का स्वागत हो रहा है, वहां की सरकार स्वागत कर रही है। क्योंकि जो चाइना चाहता था उसका सर्टिफिकेट हमारे देश के प्रधानमंत्री जी ने जाने-अनजाने में दे दिया, जिसकी जरूरत नहीं थी। इसलिए कांग्रेस मांग करती है कि प्रधानमंत्री जी को अभी भी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, अपने उस बयान को वापस विड्रॉ करना चाहिए।
आज भी देश चाहता है कि एलएसी, लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल जो है, उसकी स्थिति क्या है वो बताना चाहिए। ये देशवासियों का हक है जानने का। बॉर्डर पर कभी कोई झड़प हुई है या युद्ध हुआ है तो पूरा मुल्क एकजुट रहा है, ये हमारा इतिहास गवाह है। तो क्या कारण है कि इस बार जो है, इस बार जिस रूप में स्थिति बनी है, इतने दिन होने के बावजूद भी, 14 जून के आस-पास की घटना है, 15 जून की है, आज तक देशवासियों को मालूम नहीं है कि वास्तव में कितने सैनिक मारे गए, कितने सैनिक चाइना के मारे गए, कितने घायल हुए, कितने क्षेत्र पर कब्ज़ा किया हुआ है चाइनीज का, क्या वहां स्थिति है, कितना कंस्ट्रक्शन हो रहा है अथवा नहीं हो रहा है, देश को मालूम नहीं है। ये स्थिति जब एक बनती है तो देश में एक चिंता का विषय बनता है। क्या प्रधानमंत्री जी की नैतिक जिम्मेदारी नहीं है कि वो तमाम मुल्क को विश्वास में लें और जब कभी भी मैंने कहा घटनाएं हुईं तो पूरा मुल्क एकजुट रहा है। आज भी विपक्षी पार्टियां बिना कोई शर्त के एकजुट हैं प्रधानमंत्री जी और सरकार के साथ में। पर मैं जो क्वेश्चन कर रहा हूं मैं समझता हूं कि यह तो हक है देशवासियों को पूछने का कि वास्तव में स्थिति क्या है ? जब पूरा मुल्क आपके साथ में खड़ा है और आज 1962 वाली स्थिति भी नहीं है। 1962 के अंदर तो आपको मालूम है कि हमारे पास में कोई हथियार नहीं थे, न बंदूकें थीं न तोपें थीं। तब हमारे वीर सैनिकों ने साहस दिखाया। मेजर शैतान सिंह जी जोधपुर के थे मेजर, वो शहीद हो गए। मुझे बचपन याद है जब मैं 12 साल का था तब मैंने उनकी शव यात्रा में भाग लिया था। उस वक्त भी जज़्बा देखने लायक था किस प्रकार देश और राजस्थान के अंदर मेजर शैतान सिंह के नारे गूंज रहे थे। राजस्थान के तो घर-घर के अंदर सैनिकों का आप देखते हो कि त्याग-बलिदान की कहानियां हैं। करगिल के युद्ध के वक्त में भी करीब 62 लोग शहीद हुए थे राजस्थान के, मैं 56 लोगों के घर गया था। मुझे मालूम है कि युद्ध के वक्त में सैनिकों के साहस, जो सैनिक लोग हमारी रक्षा करते हैं सीमाओं की, उनके प्रति कितना जज़्बा होता है आम जनता के अंदर। इसलिए आज एनडीए गवर्नमेंट समझ नहीं पा रही है कि जो हालात देश में बन गए हैं, लोगों में अंदर ही अंदर आक्रोश है कि क्या कारण है कि आज इतनी हिम्मत हो गई चाइना की? क्योंकि आपको मालूम है कि 1967 के अंदर जब लड़ाई हुई थी तब 40 लोग हमारे शहीद हुए थे, 400 लोग उनके मारे गए थे चाइना के और भाग गए थे चाइनीज। 1967 के बाद में युद्ध हुआ नहीं कभी, झड़पें होती रहती हैं, तो इस बार बता क्यों नहीं रहे हैं प्रधानमंत्री जी, ये मैं पूछना चाहता हूं। अब तो 1962 की स्थिति, मैंने कहा तोपें नहीं थीं बंदूकें नहीं थीं, अब 70 साल में मोदी जी कहते हैं कांग्रेस ने क्या किया? आज जो आधुनिक भारत है, सैन्य बल हमारा है आर्मी है एयरफोर्स है नेवी है, वो दुनिया के सुपरपॉवर के मुकाबले की है। 1974 में इंदिरा गांधी ने एटॉमिक एक्सप्लोजन किया था पोकरण के अंदर, सबक सिखाया पाकिस्तान को, दो टुकड़े कर दिए और पाकिस्तान की जो स्थिति बनी दुनिया जानती थी किस प्रकार लोहा लिया इंदिरा गांधी ने, बांग्लादेश का उदय हो गया, अमेरिका का 7वां बेड़ा आते-आते रास्ते में रुक गया। वो हिंदुस्तान है और आज 70 सालों में हम आधुनिक हथियारों से लैस हैं, हमारे पास सब कुछ है, एटॉमिक पॉवर है, मिसाइल्स हैं, आधुनिक तोपें हैं, बोफोर्स चलाई गई थी करगिल के अंदर, राजीव गांधी ज़िंदाबाद के नारे लगे थे, जिसको लेकर राजीव गांधी को बदनाम किया गया। ये तमाम इतिहास आपके सामने है। तो प्रधानमंत्री जी क्यों हिचक रहे हैं वास्तविक स्थिति बताने में? गलवान वैली में कहां तक कंस्ट्रक्शन कराई गई है ये क्यों नहीं बता रही है और छिपा क्यों रही है? मुख्य रूप से तो बात यही थी। घटनाएं होती रहती हैं, डोकलाम में पहले 2017 में हुआ था आपको मालूम है, देपसांग वैली है एक वहां पर भी 2013 के अंदर यूपीए गवर्नमेंट थी, उस वक्त भी भगाया चाइनीज को, चूमर में 2014 को जब मोदी जी जिनपिंग के साथ में मैंने कहा अहमदाबाद में झूला झूल रहे थे, तब वहां पर हाथापाई हो रही थी, तो ये घटनाएं बताती हैं कि किस दबाव में हैं प्रधानमंत्री जी और अमित शाह जी, क्यों नहीं देश को बता पा रहे हैं, ये समझ के परे है।
आज हमारी इकोनॉमी बहुत बुरे हालात में है और मैं समझता हूं कि क्या सोचकर चाइना ने ये हरकत की है, इसका विश्लेषण होना चाहिए केंद्र सरकार में पीएमओ के अंदर विदेश मंत्रालय के अंदर कि बिना कारण के इतनी बड़ी घटनाएं क्यों हो गईं। हम लोग जूझ रहे हैं एक तरफ तो कोरोना से जूझ रहे हैं, लॉकडाउन ने बर्बाद कर दिया है देश को, जिस रूप में आर्थिक स्थिति ठप्प हो गई है, पहले से ही हम लोग इकोनॉमिक स्लोडाउन में थे।
थैंक्यू।

सवाल- सर आपने एक सवाल उठाया है कि जो वर्तमान में हालात हैं, कोरोना का दौर चल रहा है उसके बावजूद ये परिस्थितियां बनीं तो क्या आपको लगता है कि क्या जमीन की लड़ाई है या कुछ व्यापारिक एंगल भी चाइना के साथ जो संबंध बिगड़े हैं उसमें आपको नज़र आता है?

जवाब- ये समझ के परे है क्योंकि भारतीय जनता पार्टी के जितने भी अध्यक्ष बने हैं उनके रिश्ते अच्छे रहे हैं चाइना के साथ में और इसीलिए मोदी जी भी जब मुख्यमंत्री थे तो जाते रहे हैं चाइना बराबर और प्रधानमंत्री के रूप में भी गए हैं। और वैसे प्रधानमंत्री बनने के बाद में 18 बार मुलाकात हुई है दोनों की, जब दुनियाभर के मुल्कों में जाते हैं तो चाइना के बारे में अवश्य बात होती है। तो यह समझ के परे है कि अच्छे रिश्ते होने के बावजूद भी अचानक ये क्या हुआ? इसलिए हम बार-बार कहते हैं कि उनको बताना चाहिए देश को। इतना बड़ा मार्केट मिला हुआ है हिंदुस्तान में चाइना को उसके बाद में भी हरकत की गई है तो क्यों की गई है?

सवाल: प्रधानमंत्री चीन मुद्दे पर कुछ बोल रहे हैं और रक्षा मंत्री कुछ अलग बोल रहे हैं तो आपको लगता है दोनों में ही समन्वय की कोई कमी है और बयान एक जैसे सरकार की तरफ से नहीं आ रहा।

जवाब: देखिए यह क्या है कि इनको हिस्ट्री देखनी चाहिए, हिस्ट्री देखनी चाहिए जब यूपीए गवर्नमेंट थी या यूपीए के पहले कांग्रेस सरकारें थी तब किस प्रकार मैंने कहा 67 में जब 40 लोग हमारे शहीद हुए थे और 400 उनके मारे गए थे चाइनीज लोग हमारी फौजो ने, तिब्बत के दलाई लामा और सब को शरण दी हिंदुस्तान में, परवाह नहीं कभी चाइना की कभी भी। सिक्किम को देश में मिला लिया इंदिरा गांधी ने चाइना की परवाह ही नहीं करी यह तो हम लोगों की देखते हुए की बातें हैं। तो हमेशा हिंदुस्तान के लोगों ने 62 के युद्ध में जो कुछ हुआ क्योंकि हमारा देश नया-नया आजाद हुआ था, कोई हथियार नहीं थे, कोई साधन नहीं थे तब भी लड़ाई लड़ी हम लोगों ने उसके बाद में तो हमने हमेशा छक्के छुड़ाए हैं। आज तो हम सब कुछ आधुनिक हथियारों से लैस है तो क्या कारण है कि इतने दबे हुए हैं सरकार के लोग, अमित शाह जी तो खैर राहुल गांधी जी बोलते हैं तो उनको तो बोलना ही पड़ता है। उनका काम तो आपको मालूम ही है, मैंने पहले भी कहा उनको तो चिंता सताती है कि मैं कब किस सरकार को गिराउ, किस प्रकार गिराउ, वो तो उधेड़बुन में लगे रहते हैं राहुल गांधी जी बोल जाते हैं तो उनको जवाब कैसे देवे। इसलिए हो सकता है कि उनका समन्वय नहीं बैठ रहा होगा पर मेरा मानना है कि स्थिति बड़ी विकट है और देश बार बार पूछ रहा है दुनिया जानना चाहती है, दुनिया के मुल्कों को आश्चर्य हो रहा है की प्रधानमंत्री जी ने आज तक चीन शब्द का प्रयोग क्यों नहीं किया? अपने वक्तव्य में भी चीन शब्द का प्रयोग नहीं करते हैं, यह क्यों? और इतने अच्छे इनके संबंध रहे हैं उसके बाद में क्या कारण है कि यह स्थितियां बनी, आज भी वह बैठे हैं हमारे सिर पर वहां पर और उन्होंने कह दिया कि हमारी जमीन पर आए नहीं, हमारी चौकियों पर कब्जा किया नहीं, यह क्यों कह दिया गया? मीडिया में जो खबरें आ रही है वह बहुत ही चौंकाने वाली है।

सवाल: सर यह जो प्रधानमंत्री जी ने पिछली बार देश को संबोधित किया था तो उन्होंने बहुत जोर शोर से यह कहा था की भारत आत्मनिर्भर है और आत्मनिर्भर बन गया है और चाइनीज प्रोडक्ट के बारे में उन्होंने कुछ नहीं कहा तो एक सेल्फ रिलायंस का मुद्दा था तो उसको उन्होंने उछाल करके चाइना को एक स्पष्ट संदेश दिया था की हमें आपके प्रोडक्ट की जरूरत नहीं है यह एक कारण रहा जो लगता है दूसरा यह है कि अमेरिका भी मोदी जी को सपोर्ट कर रहा है तो वह भी सामने आ रहा है तो आप लोगों का क्या सोचना है कांग्रेस का?

जवाब: प्रधानमंत्री जी की खाली वक्तव्य देने में मास्टरी है जनता कब तक उनके वक्तव्य सुनती रहेगी, हकीकत और है वक्तव्य और होते हैं। अच्छा वक्ता होना अलग बात है और देश को आप किस प्रकार गवर्न कर रहे हैं, किस प्रकार सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं, किस प्रकार इंटरनल सिक्योरिटी को मजबूत कर रहे हैं, किस प्रकार इकोनॉमी को आप मजबूती की तरफ ले जा रहे हैं या कमजोर कर रहे हैं, किस प्रकार आप कोविड का मुकाबला कर रहे हैं यह भी तो जनता देखना चाहती है और देख रही है। अमेरिका से दोस्ती की, पूरे विश्व में सब जगह से दोस्ती करके आए प्रधानमंत्री जी और आज क्या हो गया? उनकी पोल खुल रही है। अमेरिका क्या कर रहा है आपके साथ में, दिसंबर में क्या करेगा सबको मालूम है। इसलिए मैं समझता हूं कि जो हालात है वह बहुत गंभीर है और उसको गंभीरता से लेना चाहिए और विपक्षी पार्टियों को दोष नहीं देना चाहिए कि देखिए ऐसे वक्त में भी सरकार का साथ नहीं दिया, सरकार का साथ दे रही है पॉलिटिकल पार्टियां, क्या पॉलिटिकल पार्टियों का धर्म नहीं है कि वह जनता की भावनाओं को रिप्रेजेंट करें? जनता की भावनाओं को रिप्रेजेंट करना ही विपक्ष की मूल भावना होती है, मूल काम होता है और वह करने में कांग्रेस पीछे नहीं है राहुल गांधी ने जिस रूप में क्वेश्चन किए हैं उनका जवाब देना ही चाहिए मोदी जी को भी और उनकी टीम के लोगों को भी।
आप सब का बहुत-बहुत धन्यवाद।

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