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व्यवहार बदलो, तकदीर बदल जाएगी: जगद्गुरु वसंत विजयानंद गिरि


बीकानेर। चैत्र नवरात्रि के अवसर पर गंगाशहर मार्ग स्थित अग्रवाल भवन परिसर में आयोजित विराट कथा यज्ञ महोत्सव में पूज्यपाद जगद्गुरु वसंत विजयानंद गिरि ने श्रद्धालुओं को जीवन सुधार का संदेश देते हुए कहा कि व्यक्ति को अपने जन्म से अब तक के कर्मों का आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जाने-अनजाने में जिन लोगों—माता-पिता, पड़ोसियों या अन्य—का दिल दुखाया है, उसे याद कर सुधार की दिशा में कदम बढ़ाएं। जब व्यवहार बदलता है तो तकदीर भी बदल जाती है।


जगद्गुरु ने कहा कि जरूरतमंदों की सहायता करना ही सच्चा धर्म है। अन्न, वस्त्र का दान करने से जहां जरूरतमंदों को राहत मिलती है, वहीं दानदाता को भी आत्मिक संतोष प्राप्त होता है। यदि किसी के पास देने को कुछ नहीं है तो वह प्रेमपूर्वक मुस्कुराकर भी सेवा कर सकता है, जो नि:शुल्क लेकिन अत्यंत प्रभावी दान है।


उन्होंने आगे कहा कि सकारात्मक सोच और सरल स्वभाव अपनाने से जीवन स्वतः सुखमय बन जाता है। मछलियों को आटे की गोलियां, पक्षियों को दाना और अन्य जीवों को आहार देने से पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही उन्होंने घरों में कुलदेवता और इष्टदेवता की नियमित पूजा-अर्चना की परंपरा को पुनर्जीवित करने का आह्वान किया।


तीर्थ धाम के ट्रस्टी डॉ. संकेश जैन के अनुसार, एकादशी पर्व के अवसर पर विशेष दिव्य महायज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें काशी के विद्वान पंडितों द्वारा वैदिक एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से शास्त्रोक्त विधि के अनुसार आहुतियां दी गईं।
ग्यारह दिवसीय इस ऐतिहासिक आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं के बार-बार आग्रह पर तीसरी बार सामूहिक गुरु दीक्षा प्रदान की गई। कार्यक्रम में देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने भाग लिया और विभिन्न बीज मंत्रों, स्तोत्रों व सहस्रनामों के माध्यम से दैवीय ऊर्जा का अनुभव किया।


जगद्गुरु ने अपने संदेश में कहा कि जीवन की परेशानियों से मुक्ति पाने के लिए सच्चे गुरु की शरण में जाना आवश्यक है। अपने पापों को स्वीकार करने से मन हल्का होता है और उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
कार्यक्रम का सीधा प्रसारण गुरुदेव के अधिकृत यूट्यूब चैनल “थॉट योगा” पर किया।

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