डूंगर कॉलेज में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन:लैब से क्लिनिक तक शोध की तेज़ पहुंच जरूरी – केंद्रीय मंत्री शेखावत
बीकानेर। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा को अधिक प्रभावी, सुरक्षित और मानवीय बनाने के लिए यह आवश्यक है कि प्रयोगशालाओं में होने वाली वैज्ञानिक खोजें शीघ्रता से क्लिनिक तक पहुंचें। इससे चिकित्सकों के व्यावहारिक अनुभव और अवलोकन पुनः बेसिक साइंस को नई दिशा दे सकेंगे।


शेखावत सोमवार को डूंगर कॉलेज, बीकानेर में “रेडिएशन बायोलॉजी एवं कैंसर रिसर्च के फ्रंटियर्स” विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन को ऑनलाइन संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि लैब से बेडसाइड और बेडसाइड से लैब तक का सतत संवाद ही चिकित्सा विज्ञान की वास्तविक प्रगति का आधार है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में भारत के वैज्ञानिक इकोसिस्टम और स्वास्थ्य अवसंरचना में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। कैंसर विज्ञान के क्षेत्र में डायग्नोस्टिक्स की सटीकता, किफायती उपचार विकल्पों और गुणवत्तापूर्ण देखभाल को आमजन तक पहुंचाने की दिशा में देश ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। रीजनल कैंसर सेंटर, मेडिकल कॉलेज और कम्युनिटी हॉस्पिटल अब जटिल उपचार पद्धतियां भी संवेदनशीलता और उच्च पेशेवर दक्षता के साथ उपलब्ध करा रहे हैं।
उन्होंने रेडिएशन बायोलॉजी में हो रहे शोध को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि रेडिएशन के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया को बेहतर समझना, उपचार से होने वाले दुष्प्रभावों को कम करना तथा रोगियों की जीवन-गुणवत्ता सुधारने के लिए डोज शेड्यूल का वैज्ञानिक अनुकूलन आधुनिक कैंसर उपचार की रीढ़ है।
रेडिएशन, डायग्नोसिस और थेरेपी का प्रभावी माध्यम
शेखावत ने कहा कि रेडिएशन आज डायग्नोसिस और थेरेपी दोनों ही क्षेत्रों में सबसे प्रभावशाली उपकरणों में से एक है, लेकिन इसका सुरक्षित और संतुलित उपयोग तभी संभव है जब इसके सेलुलर और सिस्टमिक प्रभावों की गहन वैज्ञानिक समझ विकसित की जाए।
युवाओं की जिज्ञासा ही भविष्य की शक्ति
युवा वैज्ञानिकों और शोधार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आपकी जिज्ञासा, समर्पण और सहयोग की भावना इस क्षेत्र का भविष्य तय करेगी। आज का विज्ञान उन्हीं लोगों को आगे बढ़ाता है जो विषयों की पारंपरिक सीमाओं से परे सोचने का साहस रखते हैं।
कार्यक्रम में बीकानेर पश्चिम विधायक जेठानंद व्यास, महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के कुलगुरु आचार्य मनोज दीक्षित, सहायक निदेशक कॉलेज शिक्षा पुष्पेंद्र सिंह, आचार्य तुलसी कैंसर रिसर्च सेंटर की निदेशक डॉ. नीति शर्मा, प्राणिशास्त्र विभाग प्रभारी डॉ. प्रताप सिंह सहित देश-विदेश से आए वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों का राजस्थानी परंपरा से स्वागत एवं सम्मान किया गया।
आयोजन संयोजक डॉ. अर्चना पुरोहित ने स्वागत भाषण देते हुए सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत की। प्राचार्य प्रो. राजेंद्र पुरोहित ने इसे नगर और प्रदेश के लिए उपलब्धि बताते हुए विश्वास जताया कि इससे कैंसर से लड़ने की सामूहिक क्षमता मजबूत होगी। विधायक जेठानंद व्यास ने ऐसे आयोजनों को समाज को दिशा देने वाला बताया।
दो दिवसीय सम्मेलन के निदेशक प्रो. कैलाश स्वामी ने बताया कि पहले दिन तीन तकनीकी सत्र आयोजित हुए, जिनमें देश-विदेश के विशेषज्ञों ने विकिरण के स्वास्थ्य पर प्रभाव, द्वितीयक कैंसर और उपचार से जुड़े शोध निष्कर्ष प्रस्तुत किए। व्योम केंद्र में आयोजित तृतीय सत्र में सात शोध पत्रों का वाचन हुआ तथा हर्बल एवं प्राकृतिक उत्पादों से कैंसर रोकथाम पर विशेष चर्चा की गई।
सम्मेलन के दौरान शोधार्थियों द्वारा पोस्टर प्रस्तुतिकरण किया गया। आगंतुकों के लिए राम रंगमंच पर भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. सोनू शिव एवं डॉ. शशिकांत आचार्य ने किया तथा डॉ. मनीषा अग्रवाल ने आभार व्यक्त किया।

