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शीतलहर में कांपा बीकानेर, पारे के साथ स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति लुढ़की, प्रशासन के फैसले का इंतजार

बीकानेर। प्रदेश के करीब दो दर्जन जिलों में शीतलहर के चलते स्कूलों के शीतकालीन अवकाश की अवधि बढ़ा दी गई है, लेकिन बीकानेर में अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। मंगलवार को तापमान में तेज गिरावट के बीच बच्चे ठिठुरते हुए स्कूल पहुंचे, जिससे अभिभावकों की चिंता और नाराजगी बढ़ती जा रही है।


मंगलवार को बीकानेर में सुबह घना कोहरा छाया रहा। हवा की गति भले ही धीमी रही, लेकिन ठंड चुभती रही। ग्रामीण क्षेत्रों में हालात शहरी क्षेत्र से भी अधिक खराब रहे।


सूत्रों के अनुसार नापासर क्षेत्र की करीब आधा दर्जन सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की उपस्थिति मात्र 8 से 10 प्रतिशत दर्ज की गई। शहरी क्षेत्र में भी हालात बेहतर नहीं रहे। निजी प्राइमरी स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति करीब 35 प्रतिशत रही, जो आम दिनों की तुलना में काफी कम बताई जा रही है।


मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार मंगलवार को बीकानेर का अधिकतम तापमान 16.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से करीब 6 डिग्री कम रहा। वहीं न्यूनतम तापमान 8.5 डिग्री सेल्सियस रहा। सुबह साढ़े आठ बजे हवा में नमी 97 प्रतिशत दर्ज की गई और दिनभर मध्यम गति की सर्द हवा चलती रही।


तापमान में लगातार गिरावट के बावजूद प्रशासन की चुप्पी ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। अभिभावकों का सवाल है कि इस शीतलहर में पढ़ाई कराई जा रही है या बच्चों के स्वास्थ्य की परीक्षा ली जा रही है। द इंडियन डेली में दिनभर अभिभावकों के फोन आते रहे, जिनमें एक ही सवाल गूंजता रहा—क्या स्कूल समय बदलेगा या अवकाश घोषित होगा?


शिक्षक संगठनों ने भी उठाई मांग
राजस्थान में कड़ाके की सर्दी और लगातार जारी शीतलहर के बीच बीकानेर और उदयपुर जिलों में स्कूल समय में बदलाव या अवकाश घोषित करने की मांग तेज हो गई है।


राजस्थान शिक्षा विभागीय कर्मचारी संघ ने इस संबंध में बीकानेर और उदयपुर के जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग को पत्र भेजकर बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए त्वरित निर्णय लेने की मांग की है।


पत्र में उल्लेख किया गया है कि प्रदेश के कई जिलों—चूरू, नागौर, भरतपुर, पाली, हनुमानगढ़, कोटा, दौसा, अजमेर, जयपुर, सीकर, प्रतापगढ़, श्रीगंगानगर, बूंदी सहित अन्य में पहले ही स्कूल समय में बदलाव या अवकाश के आदेश जारी किए जा चुके हैं।


संगठन ने मौसम विभाग के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि बीकानेर और उदयपुर का तापमान अन्य जिलों की तुलना में अधिक चिंताजनक है। इससे सुबह-सवेरे स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बनी हुई है।


पत्र में दोनों जिलों की भौगोलिक परिस्थितियों का भी उल्लेख किया गया है। बीकानेर क्षेत्रफल की दृष्टि से प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा जिला है, जहां ग्रामीण विद्यार्थियों को स्कूल पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। वहीं उदयपुर पहाड़ी और झीलों वाला क्षेत्र होने के कारण सर्दियों में अधिक ठंडा रहता है, जहां दुर्गम रास्तों पर सुबह की यात्रा बच्चों के लिए जोखिमपूर्ण मानी जाती है।

ग्रामीण इलाकों में सीमित सार्वजनिक परिवहन भी एक बड़ी समस्या है।
इन परिस्थितियों को देखते हुए संगठन ने मांग की है कि बीकानेर और उदयपुर जिलों के सभी सरकारी व निजी विद्यालयों में शीतकाल के दौरान स्कूल समय में संशोधन किया जाए या आवश्यकतानुसार अवकाश घोषित किया जाए। साथ ही जारी आदेशों का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने की अपील भी की गई है।

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