तम से क्या घबराना, सूरज रोज निकलता है — आचार्य कुलदीप
बीकानेर। कृष्ण कथा के दूसरे दिन कथा व्यास आचार्य कुलदीप ने श्रीकृष्ण के संदेशों को जीवन से जोड़ते हुए कहा कि तम (अंधकार) से घबराने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि सूरज रोज निकलता है। उन्होंने कहा कि माता-पिता को चाहिए कि वे अपने बालक-बालिकाओं के आत्मविश्वास में निरंतर वृद्धि करें और युवाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करें। जीवन के संघर्षों से परिचित कराना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

आचार्य कुलदीप ने कहा कि धर्म का साथ देना सिखाया जाना चाहिए, न कि धर्म का विरोध। उत्तराधिकार जन्म से नहीं, बल्कि योग्यता और सामर्थ्य से मिलना चाहिए। योग्य उत्तराधिकारी को तैयार करना पड़ता है, उसे सीखना और सक्षम बनना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि मौन ऊर्जा संरक्षण का सर्वश्रेष्ठ माध्यम है।
श्रीमद्भागवत गीता के संदर्भ में आचार्य कुलदीप ने कहा कि यह मुख्य रूप से दो व्यक्तियों का संवाद है, लेकिन इसमें कुल छह व्यक्तियों का कथन निहित है। गुरु-शिष्य परंपरा पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि गुरु अपने शिष्य में जिन गुणों को देखना चाहते हैं, वे गुण स्वयं गुरु में होना आवश्यक है, तभी उनका हस्तांतरण संभव हो पाता है।
अपने संगीतमय प्रवचन में आचार्य कुलदीप ने ‘गुड़ाकेश’ और ‘ऋषिकेश’ के अर्थ को स्पष्ट करते हुए बताया कि गुड़ाकेश का अर्थ है अपनी निद्रा पर विजय प्राप्त करने वाला अर्जुन और ऋषिकेश का अर्थ है समस्त वेदों का ज्ञाता श्रीकृष्ण। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति जागते हुए भी सो रहा है, वह तमोगुण में डूबा होता है और उसे जागृत नहीं किया जा सकता।
कथा के दौरान आचार्य रवि शंकर ने कहा कि कृष्ण की विशेषताओं को अपनाए बिना जीवन में सफलता प्राप्त नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि अधिकतर झगड़ों की जड़ वाणी होती है। इसलिए जहां तक संभव हो, दिमाग, आंखें और कान खुले रखें तथा मुंह बंद रखें—अर्थात अच्छा श्रोता, दर्शक और विचारक बनें।
कथा के दौरान प्रस्तुत मधुर भजनों और संगीत पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने तालियां बजाकर अपने भाव प्रकट किए।

